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Basti News: तापमान में गिरावट से बच्चों में बढ़ा कोल्ड डायरिया का खतरा
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प्रशिक्षण में शामिल प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र देते जिला भूमि संरक्षण अधिकारी बस्ती स्रोत वि
- फोटो : रायबरेली में सलोन कस्बा स्थित औद्योगिक क्षेत्र।
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बस्ती। कड़ाके की ठंड बच्चों पर कहर बनकर टूट रही है। ठंड के चलते बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। इसका असर अस्पताल में दिख रहा है। बताया गया कि तापमान में लगातार गिरावट और सर्द बर्फीली हवा के कारण बच्चों में कोल्ड डायरिया और निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं। जांच के बाद उन्हें भर्ती करने के लिए कहा जा रहा है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें 30 से 40 बच्चे ठंड से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित दिखे। ऐसे बच्चों के अभिभावक को डॉक्टर बचाव संबंधी तरीका बता रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि इन दिनों सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे बच्चे हैं। ठंड के चलते बच्चों में दस्त, उल्टी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। अधिक संक्रमण वाले बच्चों को पीआईसीयू में भर्ती किया जा रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शुक्ल ने बताया कि ठंड में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खासकर साफ-सफाई में लापरवाही, ठंडा पानी पीना, खुले में ठंड लगना और गुनगुना भोजन न मिलने से कोल्ड डायरिया की समस्या बढ़ रही है। एमडी डॉ. पीएल गुप्ता ने कहा कि सर्द हवा और तापमान में गिरावट के कारण निमोनिया के मामले भी सामने आ रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों को ठंड से बचाने की सलाह दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, सिर और सीना ढंककर रखें, ठंडे पानी और खुले खाद्य पदार्थों से बचाएं। दस्त या सांस लेने में तकलीफ होने पर देरी न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही बताया कि ठंड का प्रकोप अभी जारी रहने की संभावना है। ऐसे में सतर्कता ही बचाव का सबसे बेहतर उपाय है। शुक्रवार को 512 मरीज ओपीडी में पहुंचे थे। सर्वाधिक मरीज मेडिसिन और बाल रोग विभाग में दिखे।
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मेडिकल वार्ड और आईसीयू में मरीज भर्ती
जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड और आईसीयू में सांस लेने और दस्त की शिकायत पर बुजुर्ग और अन्य मरीजों को भर्ती किया गया है। फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि भर्ती मरीजों का लगातार स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। ठंड में बुजुर्गों के सामने सांस में तकलीफ की शिकायत है।
कोट
ठंड को देखते हुए बाल रोग विभाग की ओपीडी में संक्रमण वाले बच्चे आ रहे हैं। डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों के उपचार में लापरवाही न हो। चिल्ड्रेन वार्ड और पीआईसीयू में भी सुविधाएं हैं।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें 30 से 40 बच्चे ठंड से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित दिखे। ऐसे बच्चों के अभिभावक को डॉक्टर बचाव संबंधी तरीका बता रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि इन दिनों सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे बच्चे हैं। ठंड के चलते बच्चों में दस्त, उल्टी, बुखार और सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। अधिक संक्रमण वाले बच्चों को पीआईसीयू में भर्ती किया जा रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शुक्ल ने बताया कि ठंड में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खासकर साफ-सफाई में लापरवाही, ठंडा पानी पीना, खुले में ठंड लगना और गुनगुना भोजन न मिलने से कोल्ड डायरिया की समस्या बढ़ रही है। एमडी डॉ. पीएल गुप्ता ने कहा कि सर्द हवा और तापमान में गिरावट के कारण निमोनिया के मामले भी सामने आ रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों को ठंड से बचाने की सलाह दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, सिर और सीना ढंककर रखें, ठंडे पानी और खुले खाद्य पदार्थों से बचाएं। दस्त या सांस लेने में तकलीफ होने पर देरी न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही बताया कि ठंड का प्रकोप अभी जारी रहने की संभावना है। ऐसे में सतर्कता ही बचाव का सबसे बेहतर उपाय है। शुक्रवार को 512 मरीज ओपीडी में पहुंचे थे। सर्वाधिक मरीज मेडिसिन और बाल रोग विभाग में दिखे।
मेडिकल वार्ड और आईसीयू में मरीज भर्ती
जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड और आईसीयू में सांस लेने और दस्त की शिकायत पर बुजुर्ग और अन्य मरीजों को भर्ती किया गया है। फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि भर्ती मरीजों का लगातार स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। ठंड में बुजुर्गों के सामने सांस में तकलीफ की शिकायत है।
कोट
ठंड को देखते हुए बाल रोग विभाग की ओपीडी में संक्रमण वाले बच्चे आ रहे हैं। डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों के उपचार में लापरवाही न हो। चिल्ड्रेन वार्ड और पीआईसीयू में भी सुविधाएं हैं।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।