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Basti News: रोडवेज की सुस्ती ने बढ़ा रखी है निजी बसों की रफ्तार

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 01:17 AM IST
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The slowdown in roadways has increased the speed of private buses.
बड़ेवन के पास सवारी के इंतजार में खड़े निजी वाहन संवाद - फोटो : Archive
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बस्ती। प्राइवेट बसों का नेटवर्क लोकल से लेकर लांग रूट तक फैल चुका है। निगम की बसें इनके आगे मात खा जा रही हैं। प्राइवेट बसों की बात करें तो रोडवेज बसों के मुकाबले अच्छी सुविधाएं दे रही हैं। सभी रूटों पर समय से लग्जरी बसें उपलब्ध हैं और गंतव्य पर तय समय में पहुंचा रही हैं। इस नई व्यवस्था के चलते परिवहन निगम पीछे हो गया है और आमदनी घट गई है। दो साल पहले तक बस्ती डिपो में प्रतिमाह 15 से 16 लाख रुपये की आमदनी होती थी, जो घटकर 11 से 12 लाख रुपये हो गई है।
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निजी बसों की सक्रियता की वजह से रोडवेज बसें आजकल खाली दौड़ रही हैं। लांग रूट की बसों की हालत तो कुछ ठीक है, लेकिन लोकल रूट पर चलने वाली रोडवेज डिपो और अनुबंधित बसें खटारा हो चुकी हैं। इससे इसमें यात्रा करने से यात्री कतराते हैं। लोग सरकारी बसों के बजाय प्राइवेट वाहनों से यात्रा कर रहे हैं। इसका प्रभाव रोडवेज की आमदनी पर पड़ रही है। निजी बसें सिर्फ लंबे रूट पर ही नहीं बल्कि लोकल मार्ग पर भी चलकर परिवहन निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहीं हैं।
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बता दें कि टूरिस्ट बस के नाम पर रोडवेज बस अड्डे के आसपास और हाईवे पर टोल प्लाजा से सवारियां बुलाकर बैठा रहे हैं। मानक का परवाह किए बगैर अधिकतर बसों को दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, मेरठ और गोरखपुर समेत बिहार बॉर्डर तक दौड़ाया जा रहा है। अधिकतर बसों पर टूरिस्ट लिखा है, लेकिन इन्हें डग्गामार वाहनाें की तरह चलाया जाता है। लग्जरी कार से भी सवारी ढोया जा रह है। इससे रोडवेज बसों को पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रहीं।
अहम बात यह है कि कई प्राइवेट बसों में अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं है। अधिकारी इन बसों की चेकिंग नहीं करते हैं। ऐसे में बिना मानक के ही बसों को चलाया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार परिवहन निगम को रोजाना दो से तीन लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
लोकल रूट पर भी प्राइवेट बसों का दबदबा : लोकल रूट पर अनुबंधित बसें जबकि लंबे रूट निगम बसें संचालित हो रही हैं। बस्ती से आसपास के कस्बों हर्रैया, कप्तानगंज, रूधौली जैसे रूटों पर रोडवेज की मौजूदगी कमजोर है। इन रूटों पर प्राइवेट मैजिक, जीप और मिनी बसें ही मुख्य साधन हैं। शाम होने पर इन रूटों पर बसों की संख्या भी सीमित हो जाती है, ऐसे में निजी बसें फायदा उठा लेती हैं।
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