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Bhadohi News: 100 बेड के तीन सरकारी अस्पताल, फिर भी पांच साल में प्रसव 21.3 फीसदी घटा

Sat, 24 Oct 2026 01:40 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2026 01:40 AM IST
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Three government hospitals with 100 beds each, yet deliveries fell by 21.3% in five years.
जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा घट रहा है। ताजा मामला सरकारी अस्पतालों में प्रसव का है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएस-6) के आंकड़े के अनुसार, पांच साल में सरकारी अस्पतालों में प्रसव 21.3 फीसदी तक घट गया है। एनएफएस-5 2021 में जिले के 58.9 फीसदी प्रसव सरकारी अस्पतालों में होते थे, जो एनएफएस-6 में घटकर महज 37.6 फीसदी रह गया है। हालांकि संस्थागत प्रसव की कुल दर में सिर्फ 2.8 फीसदी की गिरावट आई है। यह 94.7% से घटकर 91.9% हुई है। इससे साफ है कि महिलाएं अस्पताल में ही प्रसव करा रही हैं, लेकिन सरकारी के बजाय निजी अस्पतालों को चुन रही हैं। यह बदलाव गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा रहा है। सबसे चिंता की बात यह भी है कि प्रसव के दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की मौजूदगी भी 90.7% से घटकर 89.5% रह गई है।
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सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं का प्रचार न होने से घटा ग्राफ
मऊ। जिले में जिला महिला अस्पताल, 100 बेड का तड़ियाव हॉस्पिटल, 100 बेड का जिला अस्पताल के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हुआ है। इसके बावजूद सरकारी प्रसव में 21.3% की गिरावट से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके पीछे डाॅक्टरों की कमी के साथ सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं का प्रचार-प्रसार न होना है। वहीं निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की मौत का आंकड़ा हर साल बढ़ने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में बने बिना पंजीयन के संचालित अस्पतालों में बड़ी संख्या में महिला का प्रसव कराया जा रहा है। वहीं यह आंकड़ा बड़े निजी अस्पतालों के बजाय छोटे अस्पताल में ज्यादा हैं, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण एबुलेंसकर्मियों के साथ महिला स्वास्थ्यकर्मियों को दिए जाने वाला कमीशन है।
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इनसेट
निजी अस्पतालों में 38.8% ऑपरेशन से प्रसव
मऊ। जिले में सिजेरियन (सी-सेक्शन) प्रसव की दर भी तेजी से बढ़ी है। एनएफएचएस-5 में 14.5% प्रसव सी-सेक्शन से होते थे, जो अब बढ़कर 22.7% हो गया है। इसमें 8.2% की बढ़ोतरी हुई है। सबसे बड़ा अंतर सरकारी और निजी में है। निजी अस्पतालों में 38.8% प्रसव ऑपरेशन से हो रहे हैं, जबकि सरकारी में यह दर मात्र 4.2% है। एनएफएस-5 में निजी में यह दर 33.3% थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, निजी अस्पताल में सी-सेक्शन का ज्यादा होना जांच का विषय है।


एक नजर में आंकड़े: क्या कहता है एनएफएस
आंकड़ा एनएफएस-5-
एनएफएस-6 - बदलाव
संस्थागत प्रसव 94.7%- 91.9% - 2.8% गिरावट
सरकारी संस्थान में प्रसव 58.9%- 37.6%- 21.3% गिरावट
प्रशिक्षित कर्मी की मौजूदगी 90.7%- 89.5%- 1.2% गिरावट
सी-सेक्शन प्रसव 14.5%- 22.7%- 8.2% बढ़ोतरी
निजी में सी-सेक्शन 33.3%- 38.8%- 5.5% बढ़ोतरी
एनएफएस क्या है: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण परिवारों और स्वास्थ्य से जुड़े बदलावों को जानने के लिए किया जाने वाला व्यापक सर्वे है। इसमें मातृ-शिशु स्वास्थ्य, प्रसव, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग जैसे आंकड़े जुटाए जाते हैं।
कोट
एनएफएचएस के आंकड़े मेरे संज्ञान में हैं, इसकी समीक्षा की जा रही है। बिना पंजीयन के संचालित अस्पतालों की जांच कर उन्हें बंद करने के साथ इसमें शामिल लोगों को चिह्नित करने का कार्य भी विभाग कर रहा है। सभी सीएचसी और जिला अस्पताल में प्रसव की सुविधाएं उपलब्ध हैं। जहां सुधार की जरूरत होगी, आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पंकज कुमार, सीएमओ, मऊ
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