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Bijnor News: ओडीओसी योजना में शामिल होगा बिजनौर का गुड़
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर राज्य सरकार ने एक जनपद एक व्यंजन योजना (ओडीओसी) का शुभारंभ किया। बिजनौर का गुड़ भी इस योजना में शामिल होगा। इसके लिए उद्योग विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। योजना में शामिल होने के बाद गुड़ के कारोबार में बढ़ोतरी होगी।
ओडीओपी की तर्ज पर अब ओडीओसी योजना शुरू की गई है। इससे जिले के बेहतरीन व्यंजनों को प्रदेश स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। ओडीओपी में बिजनौर की काष्ठकला और ब्रश उद्योग को बढ़ावा मिला है। ऐेसे में यहां के गुड़ को भी नई पहचान दिलाई जाएगी। उद्योग विभाग ने इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है। जिसके चलते गुड़ और इससे जुड़े उत्पाद ओडीओसी में शामिल होंगे। गुड़ के अलावा गजक, शक्कर, खांड आदि उत्पाद को इसमें शामिल करने की तैयारी है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद गुड़ के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने की वजह से खांडसारी इकाइयां धीरे-धीरे बंद हो रही है। ऐसे में सभी जिलों के व्यंजनों को संभालने के लिए यह योजना शुरू की गई है। योजना में शामिल होने के बाद गुड़ कारोबार से जुड़े लोगों को मदद मिलेगी।
जिले में संचालित हैं 550 कोल्हू
सहायक चीनी आयुक्त ब्रजेश कुमार ने बताया कि जिले में 76 क्रेशर और 550 कोल्हू संचालित हैं। यहां हर साल 10 लाख क्विंटल से ज्यादा गुड़ तैयार हो रहा है। नांगल सोती, रेहड़ आदि जगहों का गुड़ लोग बेहद पसंद करते हैं। इसी वजह से जिले में गुड़ की लोकप्रियता बरकरार है। इसी के चलते गुड़ को ओडीओसी में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
जर्मनी और कनाडा तक नांगलसोती गुड़ की पहचान
जिले का गुड़ सिर्फ बिजनौर तक सीमित नहीं रहा है। नांगलसोती में बना गुड़ विदेशी को खूब पसंद आ रहा है। यहां का दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, बिहार आदि राज्यों के अलावा जर्मनी और कनाडा तक पहुंच रहा है। इसकी पहचान किसी ब्रांड से नहीं बल्कि नांगलसोती गांव के नाम से है। साथ ही खाड़ी देशों में यहां के गुड़ की खूशबू महकी।
ओडीओसी में बिजनौर के गुड़ और इससे जुड़े उत्पादों को शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही गुड़ को एक जनपद एक व्यंजन में शामिल होने की उम्मीद है। ....अमित कुमार, उपायुक्त उद्योग, बिजनौर
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ओडीओपी की तर्ज पर अब ओडीओसी योजना शुरू की गई है। इससे जिले के बेहतरीन व्यंजनों को प्रदेश स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। ओडीओपी में बिजनौर की काष्ठकला और ब्रश उद्योग को बढ़ावा मिला है। ऐेसे में यहां के गुड़ को भी नई पहचान दिलाई जाएगी। उद्योग विभाग ने इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है। जिसके चलते गुड़ और इससे जुड़े उत्पाद ओडीओसी में शामिल होंगे। गुड़ के अलावा गजक, शक्कर, खांड आदि उत्पाद को इसमें शामिल करने की तैयारी है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद गुड़ के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने की वजह से खांडसारी इकाइयां धीरे-धीरे बंद हो रही है। ऐसे में सभी जिलों के व्यंजनों को संभालने के लिए यह योजना शुरू की गई है। योजना में शामिल होने के बाद गुड़ कारोबार से जुड़े लोगों को मदद मिलेगी।
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जिले में संचालित हैं 550 कोल्हू
सहायक चीनी आयुक्त ब्रजेश कुमार ने बताया कि जिले में 76 क्रेशर और 550 कोल्हू संचालित हैं। यहां हर साल 10 लाख क्विंटल से ज्यादा गुड़ तैयार हो रहा है। नांगल सोती, रेहड़ आदि जगहों का गुड़ लोग बेहद पसंद करते हैं। इसी वजह से जिले में गुड़ की लोकप्रियता बरकरार है। इसी के चलते गुड़ को ओडीओसी में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
जर्मनी और कनाडा तक नांगलसोती गुड़ की पहचान
जिले का गुड़ सिर्फ बिजनौर तक सीमित नहीं रहा है। नांगलसोती में बना गुड़ विदेशी को खूब पसंद आ रहा है। यहां का दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, बिहार आदि राज्यों के अलावा जर्मनी और कनाडा तक पहुंच रहा है। इसकी पहचान किसी ब्रांड से नहीं बल्कि नांगलसोती गांव के नाम से है। साथ ही खाड़ी देशों में यहां के गुड़ की खूशबू महकी।
ओडीओसी में बिजनौर के गुड़ और इससे जुड़े उत्पादों को शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही गुड़ को एक जनपद एक व्यंजन में शामिल होने की उम्मीद है। ....अमित कुमार, उपायुक्त उद्योग, बिजनौर
