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Bijnor News: यूरोपियन महिलाओं के गले में सजेगी नगीना की नक्काशी
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नगीना हैंडीक्राफ्ट कारोबारियों के यहां बनने वाली वुडन ज्वैलरी। संवाद
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गौरव गोयल
नगीना (बिजनौर)। अमेरिका की मनमाना टैरिफ नीति के बाद भारत के साथ यूरोपीय देशों के बीच हुए बड़े व्यापारिक समझौते से नगीना के विश्वविख्यात हैंडीक्राफ्ट उद्योग को नए पंख लगने की उम्मीद है। यूरोपीय देशों में निर्यात होने वाली अधिकतर वस्तुओं को कर मुक्त किए जाने की घोषणा से यहां बनने वाली वुडन ज्वैलरी को अब नए बाजार मिल सकेंगे। नगीना में निर्मित होने वाली वुडन ज्वैलरी को सबसे ज्यादा यूरोपियन देशों में ही पसंद किया जाता है।
काष्ठ कला नगरी नगीना का हैंडीक्राफ्ट उद्योग हमेशा से विदेशी निर्यातों पर निर्भर रहा है। पिछले दिनों में अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाली अधिकतर वस्तुओं पर मनमाना टैरिफ लगा दिया था। नगीना में निर्मित हैंडीक्राफ्ट के का निर्यात दुनिया भर में सबसे ज्यादा अमेरिका में होता है। टैरिफ की मार से यहां के उद्योग की गति पिछले काफी समय से मंद सी पड़ गई है। अब भारत के यूरोपीय देशों के साथ अधिकतर वस्तुओं के निर्यात व आयात में टैरिफ के छूट की घोषणा ने हैंडीक्राफ्ट से जुड़े व्यापारियों के चेहरे पर खुशी ला दी है। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में हैंडीक्राफ्ट का सामान पहले से जाता रहा है लेकिन अब कर छूट से वहां से एक नए बाजार के मिलने की संभावना बढ़ गई है।
सालाना 400 करोड़ रुपये का होता है निर्यात
नगीना का काष्ठ कला उद्योग लकड़ी पर की जाने वाली नक्काशी के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां के शिल्पकारों द्वारा लकड़ी पर बनाए जाने वाले सिंगारदान, व्हील वाली घड़ी, छड़ी, माला, महिलाओं के आभूषण, बच्चों के खिलौने व सजावट का सामानों कि देश से ज्यादा विदेश में हमेशा से डिमांड रही है। सालाना 400 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कारोबार करने वाला हैंडीक्राफ्ट उद्योग भारत व यूरोपीय देशों के बीच हुए बड़े व्यापारिक समझौते को अपने व्यापार के लिए फायदे का सौदा मान रहा है।
अमेरिका से होने वाले नुकसान को यूरोप से पूरा करने की कोशिश
नगीना के प्रमुख हैंडीक्राफ्ट निर्यात कारोबारी जुल्फिकार आलम बताते हैं कि अभी यूरोपीय देशों में यहां का केवल 10 प्रतिशत माल ही निर्यात होता है। सरकार की पहल के बाद कारोबार बढ़ाने के लिए वहां पसंद किए जाने वाले आइटम को ही यहां बनाया जाएगा। उनका कहना है कि नगीना के कारोबारियों की कोशिश रहेगी कि अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपाई यूरोप से नए बाजार को विकसित कर की जा सके।
नगीना डेवलपमेंट हैंडीक्राफ्ट सोसाइटी के अध्यक्ष इरशाद अली मुल्तानी का कहना है कि यूरोपीय देशों के साथ भारत के बड़े व्यापारिक समझौते से नगीना के हैंडीक्राफ्ट उद्योग को जरूर संजीवनी मिलेगी। उनका कहना है कि निर्यात में कर की छूट से यहां के हैंडीक्राफ्ट कारोबारी को नया बाजार सुलभ तरीके से उपलब्ध हो सकेगा, जिससे अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
काष्ठ कला उद्यमी आफताब मुल्तानी बताते हैं कि फैशन की दुनिया में यूरोपीय देश सबसे आगे हैं। उनका कहना है कि अपने यहां बनने वाली वुडन ज्वैलरी यूरोपीय पैटर्न की ही कहलाती है। सरकार के इस नए समझौते से करीब 15- 20 साल से बंद पड़े वुडन ज्वैलरी के निर्यात कारोबार को एक नया आयाम, नया रास्ता व नया बाजार मिल सकेगा। उनका कहना है कि अभी तक हम दूसरे देशों के द्वारा ही इसका निर्यात करते थे। हमारे पास सीधे खरीदार नहीं थे। अब सरकारी पहल से हम सीधे बाजार को तलाश सकेंगे।
हैंडीक्राफ्ट कारोबारी इश्तियाक अहमद उर्फ बाबू भाई का कहना है कि यूरोपीय देशों के साथ भारत के बड़े व्यापारिक संबंध का लाभ नगीना के हैंडीक्राफ्ट उद्योग को जरूर मिलेगा। कहना है कि अब हैंडीक्राफ्ट उद्योग को यूरोप के देशों में भी एक नया बाजार आसानी से मिल सकेगा।
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नगीना (बिजनौर)। अमेरिका की मनमाना टैरिफ नीति के बाद भारत के साथ यूरोपीय देशों के बीच हुए बड़े व्यापारिक समझौते से नगीना के विश्वविख्यात हैंडीक्राफ्ट उद्योग को नए पंख लगने की उम्मीद है। यूरोपीय देशों में निर्यात होने वाली अधिकतर वस्तुओं को कर मुक्त किए जाने की घोषणा से यहां बनने वाली वुडन ज्वैलरी को अब नए बाजार मिल सकेंगे। नगीना में निर्मित होने वाली वुडन ज्वैलरी को सबसे ज्यादा यूरोपियन देशों में ही पसंद किया जाता है।
काष्ठ कला नगरी नगीना का हैंडीक्राफ्ट उद्योग हमेशा से विदेशी निर्यातों पर निर्भर रहा है। पिछले दिनों में अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाली अधिकतर वस्तुओं पर मनमाना टैरिफ लगा दिया था। नगीना में निर्मित हैंडीक्राफ्ट के का निर्यात दुनिया भर में सबसे ज्यादा अमेरिका में होता है। टैरिफ की मार से यहां के उद्योग की गति पिछले काफी समय से मंद सी पड़ गई है। अब भारत के यूरोपीय देशों के साथ अधिकतर वस्तुओं के निर्यात व आयात में टैरिफ के छूट की घोषणा ने हैंडीक्राफ्ट से जुड़े व्यापारियों के चेहरे पर खुशी ला दी है। उनका कहना है कि यूरोपीय देशों में हैंडीक्राफ्ट का सामान पहले से जाता रहा है लेकिन अब कर छूट से वहां से एक नए बाजार के मिलने की संभावना बढ़ गई है।
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सालाना 400 करोड़ रुपये का होता है निर्यात
नगीना का काष्ठ कला उद्योग लकड़ी पर की जाने वाली नक्काशी के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां के शिल्पकारों द्वारा लकड़ी पर बनाए जाने वाले सिंगारदान, व्हील वाली घड़ी, छड़ी, माला, महिलाओं के आभूषण, बच्चों के खिलौने व सजावट का सामानों कि देश से ज्यादा विदेश में हमेशा से डिमांड रही है। सालाना 400 करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कारोबार करने वाला हैंडीक्राफ्ट उद्योग भारत व यूरोपीय देशों के बीच हुए बड़े व्यापारिक समझौते को अपने व्यापार के लिए फायदे का सौदा मान रहा है।
अमेरिका से होने वाले नुकसान को यूरोप से पूरा करने की कोशिश
नगीना के प्रमुख हैंडीक्राफ्ट निर्यात कारोबारी जुल्फिकार आलम बताते हैं कि अभी यूरोपीय देशों में यहां का केवल 10 प्रतिशत माल ही निर्यात होता है। सरकार की पहल के बाद कारोबार बढ़ाने के लिए वहां पसंद किए जाने वाले आइटम को ही यहां बनाया जाएगा। उनका कहना है कि नगीना के कारोबारियों की कोशिश रहेगी कि अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपाई यूरोप से नए बाजार को विकसित कर की जा सके।
नगीना डेवलपमेंट हैंडीक्राफ्ट सोसाइटी के अध्यक्ष इरशाद अली मुल्तानी का कहना है कि यूरोपीय देशों के साथ भारत के बड़े व्यापारिक समझौते से नगीना के हैंडीक्राफ्ट उद्योग को जरूर संजीवनी मिलेगी। उनका कहना है कि निर्यात में कर की छूट से यहां के हैंडीक्राफ्ट कारोबारी को नया बाजार सुलभ तरीके से उपलब्ध हो सकेगा, जिससे अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
काष्ठ कला उद्यमी आफताब मुल्तानी बताते हैं कि फैशन की दुनिया में यूरोपीय देश सबसे आगे हैं। उनका कहना है कि अपने यहां बनने वाली वुडन ज्वैलरी यूरोपीय पैटर्न की ही कहलाती है। सरकार के इस नए समझौते से करीब 15- 20 साल से बंद पड़े वुडन ज्वैलरी के निर्यात कारोबार को एक नया आयाम, नया रास्ता व नया बाजार मिल सकेगा। उनका कहना है कि अभी तक हम दूसरे देशों के द्वारा ही इसका निर्यात करते थे। हमारे पास सीधे खरीदार नहीं थे। अब सरकारी पहल से हम सीधे बाजार को तलाश सकेंगे।
हैंडीक्राफ्ट कारोबारी इश्तियाक अहमद उर्फ बाबू भाई का कहना है कि यूरोपीय देशों के साथ भारत के बड़े व्यापारिक संबंध का लाभ नगीना के हैंडीक्राफ्ट उद्योग को जरूर मिलेगा। कहना है कि अब हैंडीक्राफ्ट उद्योग को यूरोप के देशों में भी एक नया बाजार आसानी से मिल सकेगा।

नगीना हैंडीक्राफ्ट कारोबारियों के यहां बनने वाली वुडन ज्वैलरी। संवाद
