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Bijnor News: डूडा कॉलोनी में मादा गुलदार पिंजरे में कैद
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अफजलगढ़। नगर की डूडा कॉलोनी में एक सप्ताह से बस्ती और आसपास के जंगल में घूम रही मादा गुलदार आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गई। गुलदार के पकड़े जाने से कॉलोनीवासियों ने राहत महसूस की है। वनकर्मी उसे पीलीडैम स्थित वन चौकी ले गए।
नगर की डूडा कॉलोनी के आसपास जंगल तथा बस्ती में लगातार गुलदार देखा जा रहा था, जिससे कॉलोनी में भय का माहौल व्याप्त था। कॉलोनीवासियों ने वन विभाग से पिंजरा लगवाने की मांग की थी। 13 सितंबर यानी रविवार की शाम को वन विभाग की टीम ने गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया और गुलदार को लुभाने के लिए पिंजरे में मुर्गा रखा गया था और रात में ही करीब 1:15 बजे गुलदार मुर्गे के लालच में पिंजरे में आकर कैद हो गया।
जब कॉलोनिवासियों ने पिंजरे से गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनी। मौके पर कॉलोनिवासियों सहित ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। उन्होंने ने वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पिंजरे को कब्जे में लिया। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि गुलदार मादा है और उसकी उम्र करीब 2 से 3 वर्ष के बीच है।
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उसे स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पिंजरे सहित पीली डैम स्थित वन चौकी पर ले जाया गया है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
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नगर की डूडा कॉलोनी के आसपास जंगल तथा बस्ती में लगातार गुलदार देखा जा रहा था, जिससे कॉलोनी में भय का माहौल व्याप्त था। कॉलोनीवासियों ने वन विभाग से पिंजरा लगवाने की मांग की थी। 13 सितंबर यानी रविवार की शाम को वन विभाग की टीम ने गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया और गुलदार को लुभाने के लिए पिंजरे में मुर्गा रखा गया था और रात में ही करीब 1:15 बजे गुलदार मुर्गे के लालच में पिंजरे में आकर कैद हो गया।
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जब कॉलोनिवासियों ने पिंजरे से गुलदार के गुर्राने की आवाज सुनी। मौके पर कॉलोनिवासियों सहित ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। उन्होंने ने वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पिंजरे को कब्जे में लिया। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि गुलदार मादा है और उसकी उम्र करीब 2 से 3 वर्ष के बीच है।
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उसे स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पिंजरे सहित पीली डैम स्थित वन चौकी पर ले जाया गया है। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।