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घर-घर गीता, भागवत और रामायण से ही बचेगा सनातन : महामंडलेश्वर स्वामी सहजानंद पुरी
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विराट हिन्दू सम्मेलन को सम्बोधित करते महामंडलेश्वर
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स्योहारा। हिंदू सम्मेलन समिति की ओर से स्योहारा की विकास नगर कॉलोनी में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी सहजानंद पुरी जी महाराज ने कहा कि हिंदू का दुख हमारा है और हिंदू का सुख भी हमारा है। हिंदू संस्कृति की रक्षा करना हम सभी का प्रथम कर्तव्य है।
महामंडलेश्वर स्वामी सहजानंद पुरी जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू संस्कृति विश्व की सबसे श्रेष्ठ संस्कृति है। संगठन, एकता और परिवार की मजबूती से ही समाज शक्तिशाली बनता है। उन्होंने कहा कि घर के बाहर शंख, स्वास्तिक और धनुष-बाण का प्रतीक होना चाहिए तथा घर के ऊपर विजय पताका ध्वज लहराना चाहिए, जिससे हिंदू पहचान बनी रहे। उन्होंने एकल परिवार की जगह संगठित परिवार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हम दो हमारे चार की सोच को अपनाना होगा। अगर हम कमजोर रहेंगे तो राक्षसी शक्तियां हमारे घरों पर कब्जा कर लेंगी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर में गीता, भागवत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथ होने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने धर्म और सनातन संस्कृति को पहचान सके। विभाग प्रचारक क्रांति कुमार ने कहा कि बच्चों को संस्कार देने के लिए उन्हें शाखा में अवश्य भेजें। उन्होंने कहा कि हर हिंदू को कम से कम तीन चार बच्चों के बारे में सोचना चाहिए, ताकि समाज मजबूत बन सके। जिला प्रचारक प्रवीण कुमार ने कहा कि “मेरा परिवार रहे या न रहे, लेकिन मेरा देश रहना चाहिए।” उन्होंने हिंदुओं से अपनी शक्ति पहचानने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी शक्ति से विधर्मी ताकतों का मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अगर सोने की रक्षा करनी है तो घर में लोहा भी रखना होगा, क्योंकि लोहा ही सोने की रक्षा कर सकता है।
सम्मेलन में शोवीर सिंह, अनिल कुशवाहा, वैभव रस्तोगी, आलोक अग्रवाल, सार्थक अग्रवाल, आनंद कुमार, हरिओम सिंह, प्राशु नैगी, रामभरोसे लाल, वीर सिंह राणा, प्रमोद कुमार, विपिन तोमर, अंचल कुमार, डॉ. अशोक राय, अशोक मिगलानी, तुलाराम चंद्रा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. महेन्द्र ने की तथा संचालन कपिल शर्मा ने किया।
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महामंडलेश्वर स्वामी सहजानंद पुरी जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू संस्कृति विश्व की सबसे श्रेष्ठ संस्कृति है। संगठन, एकता और परिवार की मजबूती से ही समाज शक्तिशाली बनता है। उन्होंने कहा कि घर के बाहर शंख, स्वास्तिक और धनुष-बाण का प्रतीक होना चाहिए तथा घर के ऊपर विजय पताका ध्वज लहराना चाहिए, जिससे हिंदू पहचान बनी रहे। उन्होंने एकल परिवार की जगह संगठित परिवार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हम दो हमारे चार की सोच को अपनाना होगा। अगर हम कमजोर रहेंगे तो राक्षसी शक्तियां हमारे घरों पर कब्जा कर लेंगी।
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उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर में गीता, भागवत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथ होने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने धर्म और सनातन संस्कृति को पहचान सके। विभाग प्रचारक क्रांति कुमार ने कहा कि बच्चों को संस्कार देने के लिए उन्हें शाखा में अवश्य भेजें। उन्होंने कहा कि हर हिंदू को कम से कम तीन चार बच्चों के बारे में सोचना चाहिए, ताकि समाज मजबूत बन सके। जिला प्रचारक प्रवीण कुमार ने कहा कि “मेरा परिवार रहे या न रहे, लेकिन मेरा देश रहना चाहिए।” उन्होंने हिंदुओं से अपनी शक्ति पहचानने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी शक्ति से विधर्मी ताकतों का मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अगर सोने की रक्षा करनी है तो घर में लोहा भी रखना होगा, क्योंकि लोहा ही सोने की रक्षा कर सकता है।
सम्मेलन में शोवीर सिंह, अनिल कुशवाहा, वैभव रस्तोगी, आलोक अग्रवाल, सार्थक अग्रवाल, आनंद कुमार, हरिओम सिंह, प्राशु नैगी, रामभरोसे लाल, वीर सिंह राणा, प्रमोद कुमार, विपिन तोमर, अंचल कुमार, डॉ. अशोक राय, अशोक मिगलानी, तुलाराम चंद्रा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. महेन्द्र ने की तथा संचालन कपिल शर्मा ने किया।
