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Bijnor News: आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक पर तराशा जाएगा युवाओं का हुनर

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:12 AM IST
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The skills of the youth will be honed on modern electric chalk.
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पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान, कारीगरों के हुनर को मिलेगी नई उड़ान

-माटी कला, पॉपकॉर्न व दोना पत्तल के लिए 69 लाभार्थियों का चयन
-नंबर गेम
-69 कुल लाभार्थियों का चयन
-53 लाभार्थी माटी कला के
-08 पॉपकॉन के लाभार्थी
-08 दोना पत्तल के लाभार्थी
ब्रजवीर चौधरी
बिजनौैर। जिले में बंदी की कगार पर पहुंचे पारंपरिक लघु एवं कुटीर उद्योगों को अब नई पहचान मिलेगी। जिले में माटी कला, दोना-पत्तल और पॉपकॉर्न जैसे कारोबार आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधनों के सहारे पुनर्जीवित होंगे। इससे जुड़े कारीगरों और युवाओं को नए हुनर के साथ स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। उनके उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान और विस्तार मिलेगा।
गन्ना बाहुल क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध बिजनौर जनपद में चीनी एवं खांडसारी इकाइयों के अलावा अन्य पारंपरिक इकाइयां भी संचालित होती हैं। यहां नगीना क्षेत्र अपनी काष्ठकला के उत्कृष्ट लकड़ी की नक्काशी और हस्तशिल्प के प्रसिद्ध है। ब्रश व कपड़ा कारोबार भी अपनी पहचान रखता है। इसी क्रम में बिजनौर जनपद में माटी कला का भी अच्छा कारोबार रहा है। जिले में माटी कला के कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। अफसरों के अनुसार माटी कला उद्योग योजना के तहत 53 लाभार्थियों का चयन किया गया है। यह उद्योग मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों जैसे कुल्हड़, घड़े और सजावटी सामान के निर्माण से जुड़ा है। चयनित लाभार्थियों को पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद शासन से प्राप्त टूल किट्स वितरित की जाएंगी। विभाग का उद्देश्य इस पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराकर नई पहचान दिलाना है। इसके लिए तीनों योजनाओं के तहत कुल 69 लाभार्थियों का चयन कर लिया है।
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- दोना-पत्तल और पॉपकॉर्न उद्योग बढ़ाएंगे रोजगार
दोना-पत्तल कारोबार को बढ़ावा देने के लिए आठ लाभार्थियों का चयन किया गया है। उन्हें मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी और कारोबार संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके अलावा पारंपरिक पॉपकॉर्न उद्योग के लिए भी आठ लाभार्थियों का चयन किया गया है। इस योजना के माध्यम से कारीगरों और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
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- डिजाइन, गुणवत्ता बढ़ेगी, बाजार में बढ़ेगी मांग - एसएल अग्रवाल
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एसएल अग्रवाल ने बताया कि चयनित लाभार्थियों को माटी कला, पॉपकॉर्न निर्माण और दोना-पत्तल उद्योग से संबंधित आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही डिजाइन विकास, उत्पाद गुणवत्ता सुधार और बाजार की जानकारी भी दी जाएगी। इससे पारंपरिक कारीगरों की आय बढ़ाने के साथ नए लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे। विभाग का लक्ष्य स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

--- ये होंगे इन कारोबार से लाभ
- लाभार्थियों को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा।
- आधुनिक तकनीक, डिजाइन और विपणन की जानकारी दी जाएगी।
- पारंपरिक कारीगरों की आय बढ़ाने और नए रोजगार सृजन पर जोर।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मिलेगी मदद।
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