किसानों का दर्द: एक हाथ में टॉर्च... दूसरे में लाठी, सर्दी में फसल बचाएं या जान; छुट्टा पशुओं से हैं परेशान
कड़ाके की ठंड में दिन में भी लोगों की कंपकंपी छूट रही है। ऐसे सर्द मौसम में किसान छुट्टा पशुओं से फसल को बचाने के लिए खेतों पर रात बिता रहे हैं। बदायूं के वजीरगंज क्षेत्र के गांव रहेड़िया, सहाबर खेड़ा, मालिन गौटिया समेत गांवों के किसान निराश्रित पशुओं से परेशान हैं।
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बदायूं जिले में किसानों ने खेतों के चारों ओर तारबंदी की हुई है, कुछ ने तो अपने खेत की मेड़ों पर लोहे के टिनशेड भी लगा रखे हैं, बावजूद इसके छुट्टा पशु इन्हें तोड़कर खेतों में घुस फसल नष्ट कर जा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को भीषण सर्दी में खेतों में घूमकर और मचानों पर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। खेत की रखवाली के दौरान छुट्टा पशु हमलावर भी हो जाते हैं, ऐसे में उन्हें अपनी जान का भी खतरा रहता है।
वजीरगंज क्षेत्र के गांव रहेड़िया, सहाबर खेड़ा, मालिन गौटिया, सिंगथरा, दिसौलीगंज, सैदपुर, कुर्बी, छरचू, बीरमपुर आदि गांव में इन दिनों निराश्रित पशुओं के झुंड से किसान परेशान हैं। किसानों ने खेतों के चारों ओर लोहे के तारों से तारबंदी की हुई है, कुछ ने तो अपने खेत की मेड़ों पर लोहे के टिनशेड भी लगवा दिए हैं, लेकिन छुट्टा पशुओं के झुंड के आगे ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहा है। ऐसे में किसानों के परिवार के सदस्य बारी-बारी जागकर खेतों में पहरा दे रहे हैं।
नहीं रुकी चोरी तो नलकूपों पर ही सोने लगे किसान
जानवर फसल चौपट कर रहे हैं तो चोर खेतों में लगे नलकूपों से कीमती सामान चोरी कर ले जा रहे हैं। लगातार घटनाओं से परेशान किसान नलकूप पर ही सोने लगे हैं। सिविल लाइंस, कुंवरगांव व मूसाझाग थाना क्षेत्र में हर रोज दर्जनों नलकूपों से कीमती सामान की चोरी चोर करते आ रहे हैं। यही वजह है कि किसान फसल के साथ-साथ नलकूपों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
झुंड के झुंड खेत में घुसकर फसल कर देते हैं नष्ट
रहेड़िया के किसान अंशु मौर्य ने बताया कि छुट्टा जानवरों के क्षेत्र में कई झुंड हैं, एक तरफ से भगाया जाए तो दूसरी तरफ चले जाते हैं। यह सिलसिला 24 घंटे चलता है। फसल बचाना बड़ी चुनौती है। साथ ही कई सांड़ हमलावर हो चुके हैं। उनसे जान बचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
पूरा परिवार फसल की रखवाली में लगा
किसान श्रीनिवास शाक्य ने कहा कि खेती करना आसान नहीं है। प्रकृति की मार से बच भी जाए तो फसल पशुओं की भेंट चढ़ जाती है। परिवार के सभी सदस्य रखवाली में जुटे हुए हैं। अगर एक भी दिन खेत पर न जाएं तो फिर फसल सुरक्षित नहीं रहेगी।
किसान राकेश सिंह ने कहा कि सांड़ हमला न कर दें इसके डर से मचान बना लिया है। वहीं अलाव जलाकर रात में फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है। कई बार जानवरों से सामना हो जाता है। खेती ही गुजारे का सहारा है, उसे बचाना मजबूरी है।
कोहरे में टॉर्च की रोशनी भी तोड़ रही दम
किसान नवनीत पाठक ने कहा कि घने कोहरे के कारण टॉर्च की रोशनी भी दम तोड़ रही है। इतनी कड़ाके की ठंड में पूरी रात जागकर फसलों की रक्षा करनी पड़ रही है। पशुओं का झुंड हमलावर हो जाए तो भागकर जान बचानी पड़ती है।