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Bulandshahar News: 17 साल बाद हत्या में दोषी को हुआ आजीवन कारावास
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बुलंदशहर। जनपद की एक अदालत ने औरंगाबाद थाना क्षेत्र में वर्ष 2008 में हुई युवक की हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। करीब 17 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद बृहस्पतिवार को अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोषी पर 11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि 21 नवंबर 2008 को औरंगाबाद थाना क्षेत्र के गांव गंगाहरी निवासी रामपाल ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उनका बेटा कर्मवीर उर्फ पिंटू घर पर मौजूद था। तभी अलीगढ़ के थाना पालीमुकीमपुर के गांव लास्की निवासी नारायण सिंह हाल निवासी मोहल्ला कर्बला, औरंगाबाद उसे बुलाकर साथ ले गया। इसके बाद कर्मवीर वापस नहीं लौटा और उसका शव गांव के ही एक खेत में पड़ा मिला था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी की और 14 फरवरी 2009 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
इस मामले को उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत चिह्नित किया गया था, जिसका उद्देश्य जघन्य अपराधों के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना है। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में ठोस गवाह और साक्ष्य पेश किए, जिससे आरोपी का दोष सिद्ध हो सका। बृहस्पतिवार को जिला न्यायाधीश संजय सिंह की अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई हुई।
उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने नारायण सिंह को कर्मवीर की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। संवाद
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अभियोजन पक्ष ने बताया कि 21 नवंबर 2008 को औरंगाबाद थाना क्षेत्र के गांव गंगाहरी निवासी रामपाल ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उनका बेटा कर्मवीर उर्फ पिंटू घर पर मौजूद था। तभी अलीगढ़ के थाना पालीमुकीमपुर के गांव लास्की निवासी नारायण सिंह हाल निवासी मोहल्ला कर्बला, औरंगाबाद उसे बुलाकर साथ ले गया। इसके बाद कर्मवीर वापस नहीं लौटा और उसका शव गांव के ही एक खेत में पड़ा मिला था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी की और 14 फरवरी 2009 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
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इस मामले को उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत चिह्नित किया गया था, जिसका उद्देश्य जघन्य अपराधों के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना है। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में ठोस गवाह और साक्ष्य पेश किए, जिससे आरोपी का दोष सिद्ध हो सका। बृहस्पतिवार को जिला न्यायाधीश संजय सिंह की अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई हुई।
उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने नारायण सिंह को कर्मवीर की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। संवाद
