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Chandauli News: छह महीने से हर सुबह गंगा किनारे जन्म लेता है पांच फीट का पार्थिव शिवलिंग
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पड़ाव के डोमरी गंगा घाट पर पार्थिव शिवलिंग के साथ बाल ब्रह्मचारी अचेत कुमार। संवाद
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Iरतनपुर के अचेत कुमार चार-पांच घंटे की मेहनत से शिवलिंग बनाकर ही ग्रहण करते हैं अन्न-जलI
अमरेंद्र पांडेय
पीडीडीयू नगर/वाराणसी। आस्था और संकल्प के आगे संसाधनों की कमी भी बौनी पड़ जाती है। चंदौली जिले के नियामताबाद विकासखंड स्थित रतनपुर गांव के शिवभक्त अचेत कुमार इसकी अनूठी मिसाल हैं। आर्थिक तंगी के कारण देश के प्रमुख शिवधामों और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने अपनी भक्ति को नया स्वरूप दे दिया। पिछले छह महीनों से वह प्रतिदिन गंगा तट पर रेत और मिट्टी से करीब पांच फीट ऊंचा पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। अचेत कुमार की दिनचर्या पूरी तरह शिवभक्ति को समर्पित है। सुबह गंगा स्नान के बाद वह रेत और मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण शुरू करते हैं। चार से पांच घंटे की मेहनत के बाद शिवलिंग तैयार होने पर विधि-विधान से पूजन और जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद ही अन्न-जल ग्रहण करते हैं।
गरीबी ने रोका, भक्ति नहीं
अचेत कुमार बताते हैं कि बचपन से उनकी इच्छा थी कि वे देश के सभी प्रमुख शिव मंदिरों और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करें, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह सपना अधूरा रह गया। इसी बीच गंगा स्नान के दौरान उनके मन में विचार आया कि जब शिवधामों तक पहुंचना संभव नहीं है, तो महादेव को अपने पास ही स्थापित किया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने गंगा तट पर पार्थिव शिवलिंग बनाना शुरू किया, जो अब उनकी नियमित साधना बन चुकी है।
पशुओं से बचाने के लिए बनाया विशाल शिवलिंग
शुरुआत में अचेत कुमार छोटे आकार के शिवलिंग बनाते थे, लेकिन उन्हें अक्सर पशु क्षतिग्रस्त कर देते थे। इसके बाद उन्होंने करीब पांच फीट ऊंचा पार्थिव शिवलिंग बनाना शुरू किया। अब प्रतिदिन तैयार होने वाला यह शिवलिंग गंगा तट पर आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
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बाबा दिल में हैं, मंदिर नहीं जा सकते तो क्या हुआ
अचेत कुमार कहते हैं, पैसा नहीं है तो क्या हुआ, बाबा भोलेनाथ तो हमारे दिल में हैं। जब तक शिवलिंग बनाकर गंगा जल अर्पित नहीं कर लेता, मन को शांति नहीं मिलती। उनके लिए यह केवल पूजा नहीं, बल्कि शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है।
गंगा तट पर जुटने लगे श्रद्धालु
अचेत कुमार की इस अनोखी साधना की चर्चा अब आसपास के गांवों तक पहुंच चुकी है। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु उनके बनाए शिवलिंग के दर्शन कर जल अर्पित करते हैं। स्थानीय निवासी कन्हैया पहलवान, लाल बाबू निषाद और मुन्ना यादव का कहना है कि आज के दौर में, जब लोग सुविधाओं के बिना पूजा-पाठ की कल्पना भी नहीं करते, अचेत कुमार ने साबित कर दिया है कि सच्ची श्रद्धा के लिए धन नहीं, समर्पण की आवश्यकता होती है।
अमरेंद्र पांडेय
पीडीडीयू नगर/वाराणसी। आस्था और संकल्प के आगे संसाधनों की कमी भी बौनी पड़ जाती है। चंदौली जिले के नियामताबाद विकासखंड स्थित रतनपुर गांव के शिवभक्त अचेत कुमार इसकी अनूठी मिसाल हैं। आर्थिक तंगी के कारण देश के प्रमुख शिवधामों और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने अपनी भक्ति को नया स्वरूप दे दिया। पिछले छह महीनों से वह प्रतिदिन गंगा तट पर रेत और मिट्टी से करीब पांच फीट ऊंचा पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। अचेत कुमार की दिनचर्या पूरी तरह शिवभक्ति को समर्पित है। सुबह गंगा स्नान के बाद वह रेत और मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण शुरू करते हैं। चार से पांच घंटे की मेहनत के बाद शिवलिंग तैयार होने पर विधि-विधान से पूजन और जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद ही अन्न-जल ग्रहण करते हैं।
गरीबी ने रोका, भक्ति नहीं
अचेत कुमार बताते हैं कि बचपन से उनकी इच्छा थी कि वे देश के सभी प्रमुख शिव मंदिरों और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करें, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह सपना अधूरा रह गया। इसी बीच गंगा स्नान के दौरान उनके मन में विचार आया कि जब शिवधामों तक पहुंचना संभव नहीं है, तो महादेव को अपने पास ही स्थापित किया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने गंगा तट पर पार्थिव शिवलिंग बनाना शुरू किया, जो अब उनकी नियमित साधना बन चुकी है।
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पशुओं से बचाने के लिए बनाया विशाल शिवलिंग
शुरुआत में अचेत कुमार छोटे आकार के शिवलिंग बनाते थे, लेकिन उन्हें अक्सर पशु क्षतिग्रस्त कर देते थे। इसके बाद उन्होंने करीब पांच फीट ऊंचा पार्थिव शिवलिंग बनाना शुरू किया। अब प्रतिदिन तैयार होने वाला यह शिवलिंग गंगा तट पर आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
बाबा दिल में हैं, मंदिर नहीं जा सकते तो क्या हुआ
अचेत कुमार कहते हैं, पैसा नहीं है तो क्या हुआ, बाबा भोलेनाथ तो हमारे दिल में हैं। जब तक शिवलिंग बनाकर गंगा जल अर्पित नहीं कर लेता, मन को शांति नहीं मिलती। उनके लिए यह केवल पूजा नहीं, बल्कि शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण की अभिव्यक्ति है।
गंगा तट पर जुटने लगे श्रद्धालु
अचेत कुमार की इस अनोखी साधना की चर्चा अब आसपास के गांवों तक पहुंच चुकी है। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु उनके बनाए शिवलिंग के दर्शन कर जल अर्पित करते हैं। स्थानीय निवासी कन्हैया पहलवान, लाल बाबू निषाद और मुन्ना यादव का कहना है कि आज के दौर में, जब लोग सुविधाओं के बिना पूजा-पाठ की कल्पना भी नहीं करते, अचेत कुमार ने साबित कर दिया है कि सच्ची श्रद्धा के लिए धन नहीं, समर्पण की आवश्यकता होती है।