घर की दहलीज से गंगा किनारे तक: पांच किमी चलकर एयर शो देखने पहुंची 16 मुस्लिम महिलाएं, बोलीं- विमान देखना है
घर की दहलीज से गंगा किनारे तक 16 मुस्लिम महिलाएं पांच किलोमीटर पैदल चलकर वाराणसी में एयर शो देखने पहुंचीं। पहली बार लड़ाकू विमान देखने की हसरत उन्हें नमो घाट तक खींच लाई। महिलाओं ने कहा कि अगर यह मौका नहीं मिलता तो शायद जिंदगी गुजर जाती, लेकिन उन्हें ऐसे लड़ाकू विमान देखने का अवसर कभी नहीं मिल पाता।
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घर की चारदीवारी और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच जिंदगी गुजर जाती है। बड़े शहरों में होने वाले आयोजन और आसमान में उड़ते लड़ाकू विमानों को देखने का मौका मिलेगा, ऐसा कभी सोचा भी नहीं था। लेकिन शनिवार को दुलहीपुर की 16 मुस्लिम महिलाओं ने इस सोच को पीछे छोड़ दिया।
एयर शो देखने की चाह उन्हें घर से पांच किलोमीटर दूर गंगा किनारे बहादुरपुर घाट तक खींच लाई। सुबह सात बजे घर से निकलीं और साढ़े आठ बजे घाट पहुंच गईं। डेढ़ घंटे में रास्ते की दूरी और पैदल चलने की थकान पर उत्साह भारी रहा। आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनने और उनकी एक झलक पाने की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दी।
महिलाओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से बनारस में एयर शो का आयोजन हुआ, तभी उन्हें पहली बार इतने करीब से लड़ाकू विमान देखने का अवसर मिला। उनका कहना था कि अगर यह आयोजन यहां नहीं होता तो शायद जिंदगी गुजर जाती और वे ऐसे विमानों को सामने से उड़ते कभी नहीं देख पातीं। उनके लिए यह केवल एक हवाई प्रदर्शन नहीं, बल्कि घर से बाहर निकलकर एक ऐसा अनुभव हासिल करने का मौका था, जिसकी उन्होंने पहले कल्पना भी नहीं की थी।
छत से रिहर्सल देखी, अब सामने उड़ते विमान देखने पहुंचीं
दुलहीपुर की शबाना ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से घर की छत से एयर शो की रिहर्सल और पहले दिन का प्रदर्शन देख रही थीं। आसमान में विमानों की आवाज सुनाई देती तो वह छत पर पहुंच जाती थीं। लेकिन दूर से दिखाई देने वाले विमानों को देखने की उत्सुकता उन्हें शनिवार को गंगा किनारे ले आई। इस बार वह परिवार की अन्य महिलाओं के साथ पहुंचीं, ताकि एयर शो का नजारा और करीब से देख सकें।
साजिया ने कहा कि बनारस में फाइटर प्लेन देखने का मौका मिलना उनके लिए खास है। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि अपने आसपास ही लड़ाकू विमानों की उड़ान देखने का अवसर मिल जाएगा। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी यादगार है कि इसके लिए किसी दूसरे शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
'हम तो घर में ही रहते हैं, पहली बार देखे ऐसे विमान'
रूबिका ने कहा कि उन्होंने पहले कभी इस तरह के लड़ाकू विमान नहीं देखे थे। ज्यादातर समय घर में ही बीतता है। ऐसे में एयर शो देखने का मौका मिलना उनके लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण बनारस में ऐसा आयोजन संभव हो पाया और उन्हें भी पहली बार यह नजारा देखने का अवसर मिला।
दुलहीपुर की ही आयशा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि महिलाओं को घर से बाहर निकलने का मौका बहुत कम मिलता है। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बंगलुरु और दूसरे बड़े शहरों में होने वाले ऐसे आयोजन को वह अपने इलाके में देख सकेंगी। एयर शो ने उन्हें यह अवसर दिया कि वे भी परिवार के साथ घर से निकलकर इस रोमांच का हिस्सा बनें।
'दूर किसी दूसरे शहर में होता तो हम कैसे देख पाते'
बीएसई की छात्रा फातिमा ने कहा कि अगर एयर शो देश के किसी दूर शहर में होता तो उनके लिए वहां पहुंचकर इसे देख पाना आसान नहीं था। बनारस में आयोजन होने से आसपास के लोगों को भी यह मौका मिल गया। उनके अनुसार, यह उनके लिए गर्व और खुशी की बात है कि लड़ाकू विमानों को देखने के लिए उन्हें दूर नहीं जाना पड़ा।
सुबह सात बजे घर से निकलकर साढ़े आठ बजे बहादुरपुर घाट पहुंचने वाली इन महिलाओं के लिए पांच किलोमीटर का रास्ता महज दूरी नहीं था। वह एक ऐसे अनुभव तक पहुंचने का सफर था, जिसकी उम्मीद उन्होंने पहले नहीं की थी। गंगा किनारे पहुंचकर आसमान की ओर टकटकी लगाए इन महिलाओं के चेहरे पर उत्साह था। किसी के लिए विमान देखना पहली बार का रोमांच था तो किसी के लिए घर की सीमाओं से बाहर निकलकर परिवार के साथ एक यादगार दिन बिताने का मौका।