एयर शो: आंखों से धुंधली दुनिया, फिर भी फाइटर प्लेन देखने की आखिरी हसरत लेकर पहुंचे कई बुजुर्ग; बताया उत्साह
आंखों से धुंधला दिखने के बावजूद लड़ाकू विमान देखने की हसरत लेकर 80 वर्षीय अजीमुल्लाह एयर शो में पहुंचे। वह एक दिन पहले ही वाराणसी आ गए थे और रात रिश्तेदार के घर बिताई। वहीं, 70 वर्षीय शांति देवी ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में पहली बार लड़ाकू विमान देखे। एयर शो का रोमांच उम्र पर भारी पड़ा।
विस्तार
आंखों से दूर की रोशनी भले ही साथ छोड़ गई हो, लेकिन आसमान में उड़ते लड़ाकू विमानों को देखने की हसरत उम्र के आखिरी पड़ाव में भी कम नहीं हुई। शनिवार को एयर शो के दूसरे दिन 80 साल के अजीमुल्लाह इसी उम्मीद के साथ डोमरी पहुंचे। एक दिन पहले ही आकर रिश्तेदार के यहां रात गुजारी और सुबह होते ही एयर शो स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने कहा, 'मोदी नहीं होते तो हमार ई आखिरी इच्छा पूरी नहीं होती।'
अजीमुल्लाह के लिए यह सिर्फ एक एयर शो देखना नहीं, बल्कि उम्रभर की एक अधूरी हसरत पूरी होने जैसा था। आंखों से दूर की चीजें साफ नहीं दिखतीं, फिर भी लड़ाकू विमानों की एक झलक पाने की उम्मीद उन्हें यहां तक खींच लाई। विमानों की आवाज और आसमान में उनकी मौजूदगी ने उनके इस इंतजार को खास बना दिया।
70 साल की उम्र में पहली बार सुनी लड़ाकू विमानों की गर्जना
एयर शो देखने पहुंचीं 70 वर्षीय शांति देवी की भी अपनी कहानी रही। वह बोलीं कि जिंदगी में कभी लड़ाकू विमान नहीं देखे थे। उम्र के इस पड़ाव पर आंखों से तो ज्यादा दूर नहीं दिखता पर कम से कम उनकी आवाज सुनने और नीचे उड़ते विमानों की झलक पाने की इच्छा थी। इसी उम्मीद में वह डोमरी पहुंचीं। विमानों की गर्जना सुनकर उनके चेहरे पर उत्सुकता साफ झलक रही थी।
35 किलोमीटर चलकर सुबह आठ बजे पहुंच गए वीरेंद्र प्रताप
65 वर्षीय वीरेंद्र प्रताप का उत्साह भी कम नहीं था। वह चंदौली से करीब 35 किलोमीटर की दूरी तय करके सुबह आठ बजे तक एयर शो स्थल पर पहुंच गए। उनके लिए भी लड़ाकू विमानों को करीब से देखने का मौका खास रहा। वहीं 70 वर्षीय भोला प्रसाद ने कहा कि राफेल के बारे में किताबों में पढ़ा था, लेकिन कभी उम्मीद नहीं की थी कि उसे अपनी आंखों से देख सकेंगे।