फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chandauli News ›   Old houses demolished, work on new ones stalled for seven months; 14 families are making do in the Panchayat building and the school.

Chandauli News: पुराने गिरा दिए, नए मकानों का काम सात महीने से अधूरा, पंचायत भवन और स्कूल में गुजारा कर रहे 14 परिवार

Fri, 31 Jul 2026 01:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2026 01:36 AM IST
विज्ञापन
Old houses demolished, work on new ones stalled for seven months; 14 families are making do in the Panchayat building and the school.
नौगढ़ में अधूरा पड़ा आवास। संवाद
नौगढ़। क्षेत्र के देवखत गांव में मुख्यमंत्री आवास की पहली किस्त मिलने के बाद 14 परिवारों ने अपने कच्चे घर तोड़ दिए और नए आशियाने की नींव डाल दी, लेकिन सात महीने बाद भी दूसरी किस्त नहीं मिली। इससे निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया। अब हालात ऐसे हैं कि न तो पुराना घर बचा और न ही नया मकान तैयार हो सका है। सात महीने से इन परिवारों को कभी पंचायत भवन तो कभी प्राथमिक विद्यालय में रात गुजारनी पड़ रही है।
विज्ञापन


देवखत गांव के 14 लाभार्थियों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना मुसीबत बन गई है। लाभार्थियों का कहना है कि अधिकारियों के निर्देश पर उन्होंने पहली किस्त मिलते ही पुराने मकानों को तोड़कर नए का निर्माण कार्य शुरू करा दिया था। पहली किस्त में मिले 40 हजार रुपये से केवल नींव, पिलर और दीवारों का कुछ काम हो पाया है। इसके बाद दूसरी किस्त जारी नहीं हुई और काम पूरी तरह ठप पड़ गया।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 1.20 लाख रुपये की सहायता मिलनी है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब सात महीने पहले पहली किस्त उनके बैंक खातों में भेजी गई थी। निर्माण कार्य की प्रगति के बाद दूसरी किस्त मिलनी थी, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देकर भुगतान रोक दिया गया। तब से लाभार्थी बैंक और ब्लॉक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------
बरसात ने बढ़ाई मुश्किलें, सिर छिपाने की जगह नहीं
मानसून की लगातार बारिश ने इन परिवारों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। अधूरे मकानों में न छत है और न ही रहने लायक कोई व्यवस्था। कई परिवार प्लास्टिक की तिरपाल डालकर किसी तरह रात गुजार रहे हैं, जबकि कई लोगों को पंचायत भवन और प्राथमिक विद्यालय में शरण लेनी पड़ रही है। छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते दूसरी किस्त मिल जाती तो मकानों की छत पड़ जाती और उन्हें इस तरह बेघर होकर इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता। अब हर बारिश के साथ उनके सामने परिवार की सुरक्षा और सामान बचाने की नई चुनौती खड़ी हो जाती है।
---------------
कर्ज लेकर भी नहीं पूरा हो पा रहा निर्माण
कुछ लाभार्थियों ने रिश्तेदारों और साहूकारों से कर्ज लेकर निर्माण पूरा की कोशिश की, लेकिन महंगाई के कारण संभव नहीं हो पाया। सीमेंट, सरिया, ईंट और मजदूरी की लागत बढ़ने से गरीब परिवार निर्माण कार्य पूरा नहीं करा सके। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीबों को पक्का घर देने की बात करती है, लेकिन किस्तों में देरी होने से योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। समय पर धनराशि नहीं मिलने से गरीब परिवार परेशान हो रहे हैं।
------------
लाभार्थियों बोले-
--------------
- पहली किस्त सात महीने पहले मिली थी, जिससे नींव और पिलर बनवाए। दूसरी किस्त के लिए बैंक और ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। मकान अधूरा होने के कारण कभी पंचायत भवन तो कभी स्कूल में रह रहे हैं। - चंद्रावती, निवासी, देवखत
--------------
- 40 हजार रुपये नींव और पिलर बनाने में ही खत्म हो गए। इसके बाद निर्माण बंद हो गया। बरसात के मौसम में रहने के लिए जगह नहीं है। बच्चों और परिवार के साथ परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - रंजना, देवखत

---------------------
कोट---

देवखत गांव के 14 लाभार्थियों की मुख्यमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त तकनीकी खामी के कारण रुकी हुई है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। तकनीकी समस्या दूर होते ही दूसरी किस्त लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। - राकेश सिंह, खंड विकास अधिकारी, नौगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed