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Chandauli News: तीन दिन में 8 डिग्री गिरा तापमान, टिन शेड गिरा
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चकिया क्षेत्र के लठौरा गांव में अर्नब तूफान बरसात के जद में आकर पीड़ित परिवार का आशियाना ध्वस्त
- फोटो : ARchive
पीडीडीयू नगर। अर्नब तूफान के असर के कारण तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। इससे ठंड का असर दिख रहा है। वहीं न्यूनतम तापमान में भी एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। जिले में बुधवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस था। बृहस्पतिवार को दिन का तापमान गिरकर 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि रात का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के स्थान पर 19 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। उधर, तूफान और लगातार हो रही बारिश से नियामताबाद के धूस खास गांव में प्रभावती देवी का कच्चा मकान ढह गया। मकान का एक हिस्सा गिरने से गृहस्थी के सामान और खाने-पीने की वस्तुएं बर्बाद हो गईं। वहीं, चकिया के लठौरा गांव में संतोष कन्नौजिया का सीमेंट और टिन के करकट से बना मकान गिर गया।
वहीं शुक्रवार को अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहा। इससे ठंड का असर दिखा। लोग गर्म कपड़े पहने नजर आए। मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के बीच सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे। कुछ देर बाद बारिश शुरू हो गई, जो दिनभर अलग-अलग गति से होती रही। कभी तेज बौछारें पड़ीं तो कभी मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहा। नगर सहित गांवाें की कई सड़कों पर बारिश का पानी भर गया। इसके चलते लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण सड़क पर निकलने वाले दोपहिया वाहन चालकों को भी दिक्कत हुई। आसमान में बादल छाए रहने से दिन में धूप नहीं निकली और मौसम का मिजाज बदला रहा। उधर, नियामताबाद क्षेत्र में अर्नब तूफान से धान की फसल गिरने के साथ ही खेतों में जलभराव की समस्या भी बढ़ गई है। नियामताबाद, सरने, रामपुर, भरतपुर, बौरी, बुधवार और पचोखर गांवों में फसल प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि गड़ई नदी के पानी की निकासी के लिए कम्हरिया गांव में बना गेट बंद होने से खेतों का पानी नहीं निकल पा रहा है। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने जिलाधिकारी से राजस्व और कृषि विभाग की टीम भेजकर फसलों की क्षति का सर्वे कराने और किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
उधर, तूफान और लगातार हो रही बारिश से नियामताबाद के धूस खास गांव में प्रभावती देवी का कच्चा मकान ढह गया। मकान का एक हिस्सा गिरने से गृहस्थी के सामान और खाने-पीने की वस्तुएं बर्बाद हो गईं। वहीं, चकिया के लठौरा गांव में संतोष कन्नौजिया का सीमेंट और टिन के करकट से बना मकान गिर गया। संतोष पत्नी संगीता देवी और तीन बच्चों के साथ पड़ोसियों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोनों परिवारों को आपदा राहत और आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
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जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव का कहना है कि जिले के जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया है, वे फसल के नुकसान की जानकारी टोल फ्री नंबर 14447 पर दे सकते हैं। शिकायत दर्ज कराने के बाद विभाग की टीम क्षति हुई फसल का सर्वे कर रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनियों से किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। अन्य किसानों की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा तहसील के अधिकारियों के अनुमोदन पर कराया जाएगा।
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वहीं शुक्रवार को अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहा। इससे ठंड का असर दिखा। लोग गर्म कपड़े पहने नजर आए। मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के बीच सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए रहे। कुछ देर बाद बारिश शुरू हो गई, जो दिनभर अलग-अलग गति से होती रही। कभी तेज बौछारें पड़ीं तो कभी मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहा। नगर सहित गांवाें की कई सड़कों पर बारिश का पानी भर गया। इसके चलते लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण सड़क पर निकलने वाले दोपहिया वाहन चालकों को भी दिक्कत हुई। आसमान में बादल छाए रहने से दिन में धूप नहीं निकली और मौसम का मिजाज बदला रहा। उधर, नियामताबाद क्षेत्र में अर्नब तूफान से धान की फसल गिरने के साथ ही खेतों में जलभराव की समस्या भी बढ़ गई है। नियामताबाद, सरने, रामपुर, भरतपुर, बौरी, बुधवार और पचोखर गांवों में फसल प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि गड़ई नदी के पानी की निकासी के लिए कम्हरिया गांव में बना गेट बंद होने से खेतों का पानी नहीं निकल पा रहा है। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने जिलाधिकारी से राजस्व और कृषि विभाग की टीम भेजकर फसलों की क्षति का सर्वे कराने और किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है।
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उधर, तूफान और लगातार हो रही बारिश से नियामताबाद के धूस खास गांव में प्रभावती देवी का कच्चा मकान ढह गया। मकान का एक हिस्सा गिरने से गृहस्थी के सामान और खाने-पीने की वस्तुएं बर्बाद हो गईं। वहीं, चकिया के लठौरा गांव में संतोष कन्नौजिया का सीमेंट और टिन के करकट से बना मकान गिर गया। संतोष पत्नी संगीता देवी और तीन बच्चों के साथ पड़ोसियों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोनों परिवारों को आपदा राहत और आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
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जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव का कहना है कि जिले के जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया है, वे फसल के नुकसान की जानकारी टोल फ्री नंबर 14447 पर दे सकते हैं। शिकायत दर्ज कराने के बाद विभाग की टीम क्षति हुई फसल का सर्वे कर रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनियों से किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। अन्य किसानों की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा तहसील के अधिकारियों के अनुमोदन पर कराया जाएगा।