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Chitrakoot News: नाबालिग को बहलाकर ले जाने में दोषी को चार साल की कैद
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 12 May 2026 11:36 PM IST
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चित्रकूट। नाबालिग को बहलाकर ले जाने में आरोपी रिश्तेदार को सत्र न्यायाधीश ने को चार वर्ष के कठोर सजा सुनाई। उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की अदायगी न करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
जानकारी के मुताबिक मऊ थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 14 जुलाई 2021 को पुलिस को सूचना दी कि उसकी बेटी नित्य क्रिया को गई थी। घर लौटते समय उसके मौसी का बेटा बहलाकर अपने साथ ले गया है। वहीं किशोरी ने अपने बयान में कहा था कि मौसी की बेटी उसके घर के बगल में ब्याही है। इस कारण उसका रिश्तेदार अक्सर आता जाता रहता है। रिश्तेदार बेहोशी का पदार्थ सुंघाकर अपने साथ ले गया। उससे जोर जबरदस्ती किया। विवेचक एसआई कन्हैया बक्स सिंह ने आरोपी को 14 दिसंबर को गिरफ्तार किया और 17 दिसंबर को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पक्ष व पक्ष दोनों की दलीलें सुनीं और बयान व साक्ष्य के आधार पर उसे दोषी करार दिया। इस मामले में सत्र न्यायाधीश शेषमणि ने दोषी रिश्तेदार को सजा दी।
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कोर्ट का आदेश न मानने पर दोषी को तीन साल की कैद
चित्रकूट। जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने में दोषी को अपर सत्र न्यायाधीश राममणि पाठक ने तीन वर्ष के कारावास की सजा दी।
जानकारी के मुताबिक मानिकपुर थाना क्षेत्र के निही चिरैया गांव निवासी बबुली कोल, लवलेश कोल, संतोष कोल व नंद किशोर कोल उर्फ आनंदी के खिलाफ जानलेवा हमला, बलवा, जान से मारने की धमकी की प्राथमिकी वर्ष 20216 में दर्ज हुई थी। सभी को न्यायालय से गिरफ्तारी के वारंट भी जारी किए गए, लेकिन कोई भी हाजिर नहीं हो रहे थे। सभी फरार चल रहे थे। इस दौरान विवेचक ने नंद किशोर कोल के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पक्ष व विपक्ष दोनों की दलीलें सुनीं। अदालत में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। वह आठ वर्ष नौ माह 23 दिन जेल में भी रहा है।
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कोषागार मामले में वृद्धा को मिली जमानत
चित्रकूट। कोषागार के 43.13 करोड़ के घोटाला की आरोपी वृद्धा को आईटी एक्ट के मामले में भी जमानत मिल गई है। पूरे मामले में काफी दिन पहले हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी।
जानकारी के मुताबिक कोषागार घोटाला में सबसे पहले पेंशनर सुशीला देवी ने ही पुलिस से शिकायत की थी। एसआईटी को जांच में पेंशनर के खाता में 1,84,77,232 रुपये डाल कर बिचौलियों ने कोषागार कर्मियों से मिलकर निकालने के सबूत मिले थे। इस पर पेंशनर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कई महीने तक पेंशनर जेल में रही। हाईकोर्ट से पेंशनर को जमानत मिल गई थी लेकिन एसआईटी की बढ़ाई गई धारा आईटी एक्ट में सत्र न्यायाधीश से जमानत नहीं मिल सकी थी। सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला ने आईटी एक्ट में भी जमानत दे दी है।
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जानकारी के मुताबिक मऊ थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 14 जुलाई 2021 को पुलिस को सूचना दी कि उसकी बेटी नित्य क्रिया को गई थी। घर लौटते समय उसके मौसी का बेटा बहलाकर अपने साथ ले गया है। वहीं किशोरी ने अपने बयान में कहा था कि मौसी की बेटी उसके घर के बगल में ब्याही है। इस कारण उसका रिश्तेदार अक्सर आता जाता रहता है। रिश्तेदार बेहोशी का पदार्थ सुंघाकर अपने साथ ले गया। उससे जोर जबरदस्ती किया। विवेचक एसआई कन्हैया बक्स सिंह ने आरोपी को 14 दिसंबर को गिरफ्तार किया और 17 दिसंबर को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पक्ष व पक्ष दोनों की दलीलें सुनीं और बयान व साक्ष्य के आधार पर उसे दोषी करार दिया। इस मामले में सत्र न्यायाधीश शेषमणि ने दोषी रिश्तेदार को सजा दी।
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कोर्ट का आदेश न मानने पर दोषी को तीन साल की कैद
चित्रकूट। जानबूझकर न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने में दोषी को अपर सत्र न्यायाधीश राममणि पाठक ने तीन वर्ष के कारावास की सजा दी।
जानकारी के मुताबिक मानिकपुर थाना क्षेत्र के निही चिरैया गांव निवासी बबुली कोल, लवलेश कोल, संतोष कोल व नंद किशोर कोल उर्फ आनंदी के खिलाफ जानलेवा हमला, बलवा, जान से मारने की धमकी की प्राथमिकी वर्ष 20216 में दर्ज हुई थी। सभी को न्यायालय से गिरफ्तारी के वारंट भी जारी किए गए, लेकिन कोई भी हाजिर नहीं हो रहे थे। सभी फरार चल रहे थे। इस दौरान विवेचक ने नंद किशोर कोल के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पक्ष व विपक्ष दोनों की दलीलें सुनीं। अदालत में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। वह आठ वर्ष नौ माह 23 दिन जेल में भी रहा है।
कोषागार मामले में वृद्धा को मिली जमानत
चित्रकूट। कोषागार के 43.13 करोड़ के घोटाला की आरोपी वृद्धा को आईटी एक्ट के मामले में भी जमानत मिल गई है। पूरे मामले में काफी दिन पहले हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी।
जानकारी के मुताबिक कोषागार घोटाला में सबसे पहले पेंशनर सुशीला देवी ने ही पुलिस से शिकायत की थी। एसआईटी को जांच में पेंशनर के खाता में 1,84,77,232 रुपये डाल कर बिचौलियों ने कोषागार कर्मियों से मिलकर निकालने के सबूत मिले थे। इस पर पेंशनर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कई महीने तक पेंशनर जेल में रही। हाईकोर्ट से पेंशनर को जमानत मिल गई थी लेकिन एसआईटी की बढ़ाई गई धारा आईटी एक्ट में सत्र न्यायाधीश से जमानत नहीं मिल सकी थी। सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला ने आईटी एक्ट में भी जमानत दे दी है।