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Chitrakoot News: लूटपाट कर युवक की हत्या के मामले में पति-पत्नी को आजीवन कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:53 AM IST
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बांदा। लूटपाट के इरादे से एक युवक की हत्या करने और उसके शव को ठिकाने लगाने के अपराध में दोषी पाए गए दंपती को विशेष न्यायाधीश डकैती गगन कुमार भारती की अदालत ने आजीवन कारावास सुनाया है। अदालत ने दोनों पर 86 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की अदायगी न करने की स्थिति में दोनों को अतिरिक्त एक-एक वर्ष की सजा काटनी होगी।
मामला बबेरू थाना क्षेत्र के सतन्याव गांव का है। इसे लेकर कमलेश मिश्रा ने 12 दिसंबर 2023 को बबेरू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के अनुसार उनका भाई अरुणेश मिश्रा 10 दिसंबर 2023 को शाम करीब सात बजे घर से निकला था और फिर लौटकर नहीं आया था। इस संबंध में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी।
जब गांव में अरुणेश की खोजबीन की गई तो उसके मामा दिनेश कुमार शुक्ल ने बताया कि उन्होंने रात करीब 9:30 बजे अरुणेश को गांव के ही देवेश नामदेव और उसकी पत्नी गीता नामदेव के साथ स्कूल की तरफ जाते देखा था। इसी जानकारी के आधार पर जब लोगों ने स्कूल परिसर में जाकर तलाश की तो उच्च प्राथमिक विद्यालय की उत्तर-पश्चिम वाली दीवार के पास अरुणेश का शव मृत अवस्था में पाया गया था। कमलेश मिश्रा को पूरा यकीन था कि उसके भाई की हत्या देवेश और गीता ने ही की है।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि अरुणेश के गले से सोने की चेन और माला, दाहिने हाथ से दो सोने की अंगूठियां, पैंट की जेब से मोबाइल फोन, आधार कार्ड और पर्स गायब थे, जिससे लूटपाट की मंशा स्पष्ट हो रही थी। तत्कालीन विवेचक एसओ पंकज सिंह ने 29 जनवरी 2024 को मामले का आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों के विरुद्ध 28 मार्च 2024 को आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान कुल सात गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायाधीश गगन कुमार भारती ने दोनों दंपती को इस जघन्य अपराध का दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड विधान की संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास सुनाया है। इसके अतिरिक्त, उन पर 86 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
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मामला बबेरू थाना क्षेत्र के सतन्याव गांव का है। इसे लेकर कमलेश मिश्रा ने 12 दिसंबर 2023 को बबेरू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के अनुसार उनका भाई अरुणेश मिश्रा 10 दिसंबर 2023 को शाम करीब सात बजे घर से निकला था और फिर लौटकर नहीं आया था। इस संबंध में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी।
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जब गांव में अरुणेश की खोजबीन की गई तो उसके मामा दिनेश कुमार शुक्ल ने बताया कि उन्होंने रात करीब 9:30 बजे अरुणेश को गांव के ही देवेश नामदेव और उसकी पत्नी गीता नामदेव के साथ स्कूल की तरफ जाते देखा था। इसी जानकारी के आधार पर जब लोगों ने स्कूल परिसर में जाकर तलाश की तो उच्च प्राथमिक विद्यालय की उत्तर-पश्चिम वाली दीवार के पास अरुणेश का शव मृत अवस्था में पाया गया था। कमलेश मिश्रा को पूरा यकीन था कि उसके भाई की हत्या देवेश और गीता ने ही की है।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि अरुणेश के गले से सोने की चेन और माला, दाहिने हाथ से दो सोने की अंगूठियां, पैंट की जेब से मोबाइल फोन, आधार कार्ड और पर्स गायब थे, जिससे लूटपाट की मंशा स्पष्ट हो रही थी। तत्कालीन विवेचक एसओ पंकज सिंह ने 29 जनवरी 2024 को मामले का आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों के विरुद्ध 28 मार्च 2024 को आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान कुल सात गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायाधीश गगन कुमार भारती ने दोनों दंपती को इस जघन्य अपराध का दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड विधान की संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास सुनाया है। इसके अतिरिक्त, उन पर 86 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है।

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