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Chitrakoot News: दो विभागों में फंसी कांशीराम कॉलोनी, अटका विकास
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:47 PM IST
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चित्रकूट। लोढ़वारा स्थित कांशीराम कॉलोनी के लगभग तीन हजार लोग 15 वर्ष से मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों से वंचित हैं। इस कॉलोनी का निर्माण हुए डेढ़ दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन डूडा और पालिका के बीच अधिकारों की खींचतान के चलते यहां न तो कोई नया विकास कार्य हो पाया है और न ही मौजूदा ढांचों की मरम्मत। ऐसे में इसका खामियाजा कॉलोनीवासियों को तो भुगतना पड़ रहा है, साथ ही उनकी समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं।
लोढ़वारा में वर्ष 2008 में एक हजार आवासों की एक बड़ी कॉलोनी का शिलान्यास किया गया था। यह कॉलोनी दो वर्षों में तैयार हो गई थी, और कुछ आवंटियों को आवास मिल भी गए थे। हालांकि, सुविधाओं की कमी के कारण आधे से अधिक लोगों ने कॉलोनी छोड़ दी। खाली हुए आवासों पर बाद में अवैध कब्जे हो गए और तब से इन आवासों में किसी भी प्रकार के विकास या मरम्मत कार्य नहीं कराए गए हैं। इस मामले में मुख्य विवाद डूडा विभाग और नगर पालिका के बीच हैंडओवर प्रक्रिया को लेकर है।
डूडा विभाग के अनुसार, कॉलोनी का निर्माण कार्य वर्ष 2010 में पूरा हो गया था और उसी समय इसे नगर पालिका को सौंप दिया गया था। लेकिन नगर पालिका इससे इन्कार कर रही है। पालिका का तर्क है कि लोढ़वारा क्षेत्र वर्ष 2020 में नगर पालिका के विस्तारीकरण में शामिल हुआ है, ऐसे में वर्ष 2010 में हैंडओवर का सवाल ही नहीं उठता। दो विभागों के बीच फंसी कांशीराम कॉलोनी में न तो नए विकास कार्य हो पा रहे हैं और न ही जर्जर भवनों की मरम्मत हो पा रही है। जिसका सीधा खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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कांशीराम कॉलोनी बनने के बाद वर्ष 2010 में इसका हैंडओवर नगर पालिका को कर दिया गया था। अब विकास कार्य कराना नगर पालिका की जिम्मेदारी है।
-अजय कुमार यादव, प्रभारी अधिकारी डूडा
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कांशीराम कॉलोनी का क्षेत्र वर्ष 2020 में नगर पालिका के विस्तारीकरण में शामिल हुआ है, इसलिए हैंडओवर की पिछली स्थिति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
-लालजी यादव, ईओ पालिका चित्रकूट।
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बिना हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी हुए कांशीराम कॉलोनी में निर्माण या मरम्मत जैसे कार्य कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
- नरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद चित्रकूट।
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लोढ़वारा में वर्ष 2008 में एक हजार आवासों की एक बड़ी कॉलोनी का शिलान्यास किया गया था। यह कॉलोनी दो वर्षों में तैयार हो गई थी, और कुछ आवंटियों को आवास मिल भी गए थे। हालांकि, सुविधाओं की कमी के कारण आधे से अधिक लोगों ने कॉलोनी छोड़ दी। खाली हुए आवासों पर बाद में अवैध कब्जे हो गए और तब से इन आवासों में किसी भी प्रकार के विकास या मरम्मत कार्य नहीं कराए गए हैं। इस मामले में मुख्य विवाद डूडा विभाग और नगर पालिका के बीच हैंडओवर प्रक्रिया को लेकर है।
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डूडा विभाग के अनुसार, कॉलोनी का निर्माण कार्य वर्ष 2010 में पूरा हो गया था और उसी समय इसे नगर पालिका को सौंप दिया गया था। लेकिन नगर पालिका इससे इन्कार कर रही है। पालिका का तर्क है कि लोढ़वारा क्षेत्र वर्ष 2020 में नगर पालिका के विस्तारीकरण में शामिल हुआ है, ऐसे में वर्ष 2010 में हैंडओवर का सवाल ही नहीं उठता। दो विभागों के बीच फंसी कांशीराम कॉलोनी में न तो नए विकास कार्य हो पा रहे हैं और न ही जर्जर भवनों की मरम्मत हो पा रही है। जिसका सीधा खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
कांशीराम कॉलोनी बनने के बाद वर्ष 2010 में इसका हैंडओवर नगर पालिका को कर दिया गया था। अब विकास कार्य कराना नगर पालिका की जिम्मेदारी है।
-अजय कुमार यादव, प्रभारी अधिकारी डूडा
कांशीराम कॉलोनी का क्षेत्र वर्ष 2020 में नगर पालिका के विस्तारीकरण में शामिल हुआ है, इसलिए हैंडओवर की पिछली स्थिति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
-लालजी यादव, ईओ पालिका चित्रकूट।
बिना हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी हुए कांशीराम कॉलोनी में निर्माण या मरम्मत जैसे कार्य कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
- नरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद चित्रकूट।