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Chitrakoot News: परिवार नियोजन में पुरुषों की फिसड्डी भागीदारी
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 12 May 2026 12:46 AM IST
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चित्रकूट। जिले में परिवार नियोजन की भागीदारी में महिलाओं की अपेक्षा पुरुष बहुत ही पीछे हैं। दो सालों में 6727 महिलाओं के सापेक्ष मात्र 28 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। जिला अस्पताल सहित आठ केंद्रों में नसबंदी की जाती है। इसमें दो से तीन बच्चों वाली महिलाओं ने अधिक नसबंदी कराई है। लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से नसबंदी कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
केंद्र सरकार परिवार नियोजन के लिए परिवार कल्याण कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत जिला अस्पताल, 200 शय्या मातृ एवं शिशु अस्पताल खोह के अलावा मानिकपुर, राजापुर, पहाड़ी, मऊ, रामनगर, शिवरामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नसबंदी की जाती है। महिलाओं को गर्भ निरोधक दवाएं भी निशुल्क वितरित की जाती हैं। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर दंपती को नसबंदी के लिए जागरूक भी किया जाता है।
इसके बाद भी पुरुषों ने नसबंदी कराने में रुचि नहीं दिखाई है। जबकि शासन की ओर से पुरुष को नसबंदी कराने में तीन हजार रुपये और महिला को 1400 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाता है। इसके बाद पुरुष नसबंदी कराने में महिलाओं से काफी पीछे हैं। महिलाएं स्वयं जागरूक होकर पुरुषों को पछाड़ रही हैं।
एसीएमओ डॉ. महेंद्र कुमार जतारया ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुष व महिला नसबंदी एक प्रमुख विधि है। इसके लिए आशा जागरूक करती है। नसबंदी कराने में कोई खतरा नहीं होता है। पुरुष फिर भी आगे नहीं आ रहे हैं। (संवाद)
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आंकड़ा
वर्ष 2024-25 में कुल 3285 महिलाओं की अपेक्षा मात्र आठ पुरुषों ने नसबंदी कराई। वहीं 2025-26 में 3442 महिलाओं के सापेक्ष 20 पुरुषों ने ही नसबंदी कराने में अपनी सहभागिता निभाई।
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नसबंदी को लेकर गलतफहमी
एसीएमओ ने बताया कि पुरुषों में नसबंदी को लेकर कई गलतफहमी हैं। जैसे शारीरिक कमजोरी आना, भूख न लगना, सर्दी के मौसम में कराना सहित अन्य हैं। जबकि हकीकत यह है कि नसबंदी कराने में किसी तरह की कोई कमजोरी नहीं होती है। भूख व वजन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
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केंद्र सरकार परिवार नियोजन के लिए परिवार कल्याण कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत जिला अस्पताल, 200 शय्या मातृ एवं शिशु अस्पताल खोह के अलावा मानिकपुर, राजापुर, पहाड़ी, मऊ, रामनगर, शिवरामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नसबंदी की जाती है। महिलाओं को गर्भ निरोधक दवाएं भी निशुल्क वितरित की जाती हैं। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर दंपती को नसबंदी के लिए जागरूक भी किया जाता है।
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इसके बाद भी पुरुषों ने नसबंदी कराने में रुचि नहीं दिखाई है। जबकि शासन की ओर से पुरुष को नसबंदी कराने में तीन हजार रुपये और महिला को 1400 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाता है। इसके बाद पुरुष नसबंदी कराने में महिलाओं से काफी पीछे हैं। महिलाएं स्वयं जागरूक होकर पुरुषों को पछाड़ रही हैं।
एसीएमओ डॉ. महेंद्र कुमार जतारया ने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुष व महिला नसबंदी एक प्रमुख विधि है। इसके लिए आशा जागरूक करती है। नसबंदी कराने में कोई खतरा नहीं होता है। पुरुष फिर भी आगे नहीं आ रहे हैं। (संवाद)
आंकड़ा
वर्ष 2024-25 में कुल 3285 महिलाओं की अपेक्षा मात्र आठ पुरुषों ने नसबंदी कराई। वहीं 2025-26 में 3442 महिलाओं के सापेक्ष 20 पुरुषों ने ही नसबंदी कराने में अपनी सहभागिता निभाई।
नसबंदी को लेकर गलतफहमी
एसीएमओ ने बताया कि पुरुषों में नसबंदी को लेकर कई गलतफहमी हैं। जैसे शारीरिक कमजोरी आना, भूख न लगना, सर्दी के मौसम में कराना सहित अन्य हैं। जबकि हकीकत यह है कि नसबंदी कराने में किसी तरह की कोई कमजोरी नहीं होती है। भूख व वजन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।