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Deoria News: डराने लगी सरयू, कटान रोधी कार्य पूर्ण नहीं होने पर मचेगी तबाही
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:41 AM IST
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भागलपुर। सरयू नदी के जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। भले ही यह मामूली बढ़ाव है, मगर सरयू एक तरह से चेतावनी देने लगी है। समय रहते यदि कटान रोधी कार्य पूर्ण नहीं कराए गए तो तटवर्ती गांवों के लोगों को बड़ी तबाही का सामना करना पड़ सकता है।
क्षेत्र में करीब 20 हजार की आबादी हर साल बाढ़ से प्रभावित होती है। बाढ़ के दौरान भागलपुर, छित्तूपुर, देवसिया, नरियांव, मईल, नरसिंहडांढ, तेलिया कला में ज्यादा तबाही देखने को मिलती है। इसके अलावा सरयू नदी से भागलपुर-मईल मार्ग बांध और भागलपुर धरहरा मार्ग बांध बड़ी आबादी को बाढ़ के समय बचाने का कार्य करते हैं।
सरकार ने भागलपुर, छित्तूपुर, देवसिया गांवों को बचाने के लिए लगभग 12 करोड़ की लागत से दो परियोजनाओं की मंजूरी दी है। बचाव कार्य धीमी गति से चल रहा है और नदी का जलस्तर धीमी गति से बढ़ने लगा है। मानसून आने के बाद नदी उफान पर होती है। इससे पहले यदि कटान रोधी कार्य पूर्ण नहीं होता है तो तटवर्ती इलाकों के लोगों को तबाही झेलनी पड़ सकती है।
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बोल्डर से लांचिंग, अपरन का कार्य दोनों परियोजनाओं में करीब 60 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। पीचिंग का कार्य चल रहा है। गत दिनों डीएम मधुसूदन हुल्की ने कटान रोधी कार्य का निरीक्षण किया था और 15 जून तक कटान रोधी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए थे, उसके बाद कार्य में तेजी आई है।
बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र कुमार ने बताया कि दोनों परियोजनाओं का कार्य जल्द पूर्ण कर लिया गया है। ठेकेदार को श्रमिकों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
क्षेत्र में करीब 20 हजार की आबादी हर साल बाढ़ से प्रभावित होती है। बाढ़ के दौरान भागलपुर, छित्तूपुर, देवसिया, नरियांव, मईल, नरसिंहडांढ, तेलिया कला में ज्यादा तबाही देखने को मिलती है। इसके अलावा सरयू नदी से भागलपुर-मईल मार्ग बांध और भागलपुर धरहरा मार्ग बांध बड़ी आबादी को बाढ़ के समय बचाने का कार्य करते हैं।
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सरकार ने भागलपुर, छित्तूपुर, देवसिया गांवों को बचाने के लिए लगभग 12 करोड़ की लागत से दो परियोजनाओं की मंजूरी दी है। बचाव कार्य धीमी गति से चल रहा है और नदी का जलस्तर धीमी गति से बढ़ने लगा है। मानसून आने के बाद नदी उफान पर होती है। इससे पहले यदि कटान रोधी कार्य पूर्ण नहीं होता है तो तटवर्ती इलाकों के लोगों को तबाही झेलनी पड़ सकती है।
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