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Etah News: डॉक्टर तो हैं, पर दवा देने वाला कोई नहीं...
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राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल मुरसवां। स्रोत स्वयं
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एटा। एटा और कासगंज जिलों में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है। एटा के 13 अस्पतालों में 10 और कासगंज के सभी 11 आयुर्वेदिक अस्पतालों में फार्मासिस्टों के पद पूरी तरह खाली हैं। जिससे ग्रामीण मरीजों को इलाज के बावजूद समय पर दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर लोग आज भी आयुर्वेदिक उपचार पर भरोसा करते हैं। अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श तो मिल जाता है लेकिन दवाओं के वितरण और अस्पताल की नियमित व्यवस्थाओं में कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही है। लंबे समय से खाली पदों के कारण व्यवस्थाओं का असर मरीजों के इलाज पर भी पड़ रहा है।
जिले में कुल 13 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें तीन फार्मासिस्ट तैनात हैं। इससे दवाओं के रखरखाव और वितरण की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचने के बाद भी जरूरी दवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं कासगंज जिले की बात की जाए तो यहां पर कुल 11 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं जिसमें एक भी फार्मासिस्ट तैनात नहीं है।
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कासगंज के यूनानी अस्पताल की कमान एटा के अधिकारी के हाथ
यूनानी चिकित्सा व्यवस्था भी अधिकारियों की कमी से जूझ रही है। कासगंज जिले में क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी का पद ही नहीं है। ऐसे में एटा के क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी को कासगंज के अस्पतालों की कमान संभालनी पड़ रही है। अतिरिक्त जिम्मेदारी के कारण विभागीय निगरानी और व्यवस्थाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
दोनों जिलों के लिए सिर्फ 10 लाख रुपये का बजट
1.5 साल से इन अस्पतालों में बजट के अभाव में दवाओं की भारी कमी थी। अव्यवस्थाओं के बीच राहत की बात यह है कि दवाओं की खरीद के लिए शासन से दोनों जिलों के लिए 10 लाख रुपये का बजट जारी किया है। बजट मिलने के बाद अस्पतालों में जरूरी आयुर्वेदिक दवाओं की उपलब्धता हो चुकी है। हालांकि, कर्मचारियों की कमी दूर किए बिना केवल दवाओं की उपलब्धता से मरीजों को पूरी राहत मिलना भी मुश्किल है।
जिले में इन जगहों पर संचालित हैं आयुर्वेदिक अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अचलपुर, नगर क्षेत्र, जलेसर, सौंगरा, करतला, पौंडरी, मुरसंवा, चुरथरा, सराय अगहत, सुन्ना सिहोरी, नगला धनी।
कासगंज में इन जगहों पर संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल किनावा, तबालपुर, वजीरपुर, मामों, गोरहा, सरावल, मोहनपुर, लल्लूपुरा, सिढ़पुरा, मझौला और सिकंदरपुर वैश्य।
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जनपद में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल-13
कुल चिकित्सकों के पद-13
तैनात चिकित्सक-13
फार्मासिस्ट के पद-13
तैनात फार्मासिस्ट-03
कासगंज में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल-11
कुल चिकित्सकों के पद-11
तैनात चिकित्सक-11
फार्मासिस्ट के पद-11
तैनात फार्मासिस्ट- 00
जिले में कुल 13 आयुर्वेद अस्पताल संचालित हैं जिनमें फार्मासिस्ट के 10 पद खाली हैं। वहीं कासगंज जिले में एक भी फार्मासिस्ट नहीं है। इसके लिए लगातार शासन में पत्राचार और प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. अमित गुप्ता, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
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वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर लोग आज भी आयुर्वेदिक उपचार पर भरोसा करते हैं। अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श तो मिल जाता है लेकिन दवाओं के वितरण और अस्पताल की नियमित व्यवस्थाओं में कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही है। लंबे समय से खाली पदों के कारण व्यवस्थाओं का असर मरीजों के इलाज पर भी पड़ रहा है।
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जिले में कुल 13 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें तीन फार्मासिस्ट तैनात हैं। इससे दवाओं के रखरखाव और वितरण की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचने के बाद भी जरूरी दवाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं कासगंज जिले की बात की जाए तो यहां पर कुल 11 आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हैं जिसमें एक भी फार्मासिस्ट तैनात नहीं है।
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कासगंज के यूनानी अस्पताल की कमान एटा के अधिकारी के हाथ
यूनानी चिकित्सा व्यवस्था भी अधिकारियों की कमी से जूझ रही है। कासगंज जिले में क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी का पद ही नहीं है। ऐसे में एटा के क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी को कासगंज के अस्पतालों की कमान संभालनी पड़ रही है। अतिरिक्त जिम्मेदारी के कारण विभागीय निगरानी और व्यवस्थाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
दोनों जिलों के लिए सिर्फ 10 लाख रुपये का बजट
1.5 साल से इन अस्पतालों में बजट के अभाव में दवाओं की भारी कमी थी। अव्यवस्थाओं के बीच राहत की बात यह है कि दवाओं की खरीद के लिए शासन से दोनों जिलों के लिए 10 लाख रुपये का बजट जारी किया है। बजट मिलने के बाद अस्पतालों में जरूरी आयुर्वेदिक दवाओं की उपलब्धता हो चुकी है। हालांकि, कर्मचारियों की कमी दूर किए बिना केवल दवाओं की उपलब्धता से मरीजों को पूरी राहत मिलना भी मुश्किल है।
जिले में इन जगहों पर संचालित हैं आयुर्वेदिक अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अचलपुर, नगर क्षेत्र, जलेसर, सौंगरा, करतला, पौंडरी, मुरसंवा, चुरथरा, सराय अगहत, सुन्ना सिहोरी, नगला धनी।
कासगंज में इन जगहों पर संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल किनावा, तबालपुर, वजीरपुर, मामों, गोरहा, सरावल, मोहनपुर, लल्लूपुरा, सिढ़पुरा, मझौला और सिकंदरपुर वैश्य।
जनपद में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल-13
कुल चिकित्सकों के पद-13
तैनात चिकित्सक-13
फार्मासिस्ट के पद-13
तैनात फार्मासिस्ट-03
कासगंज में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल-11
कुल चिकित्सकों के पद-11
तैनात चिकित्सक-11
फार्मासिस्ट के पद-11
तैनात फार्मासिस्ट- 00
जिले में कुल 13 आयुर्वेद अस्पताल संचालित हैं जिनमें फार्मासिस्ट के 10 पद खाली हैं। वहीं कासगंज जिले में एक भी फार्मासिस्ट नहीं है। इसके लिए लगातार शासन में पत्राचार और प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. अमित गुप्ता, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी