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Etah News: विश्व हिंदी दिवसः डॉ. शशिकांत शर्मा ने मराठा क्षेत्र में जगाई हिंदी की अलख
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 09 Jan 2026 11:35 PM IST
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डॉ. शशिकांत शर्मा
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एटा। जिले के प्रख्यात लेखक डॉ. शशिकांत शर्मा ने मराठा क्षेत्र महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अलख जगाई है। छात्रों व अभिभावकों को प्रेरित कर हिंदी सिखाने का काम किया।
डॉ. शशिकांत शर्मा की अब तक कुल 32 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसमें व्यंग्य संग्रह बूढ़ा बैल और मखमली जूता के लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया है। डॉ. शशिकांत शर्मा ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र के बाबा नानक सिंधी हिंदी जूनियर कॉलेज में हिंदी को लेकर काफी संघर्ष किया। छात्रों व अभिभावकों को हिंदी के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने अपराजिता उपन्यास भी लिखा है। वर्तमान में वह अर्चना साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था के अध्यक्ष है।
प्रख्यात लेखक डॉ. शशिकांत शर्मा ने बताया कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि भारत की पहचान और रिश्तों की गर्माहट है। हिंदी भारत की सीमाओं तक ही सिमटी है लेकिन सच्चाई इससे कहीं बड़ी है। दुनिया के कई देशों में हिंदी बोली, समझी और सिखाई जाती है। विश्व हिंदी दिवस हमें यही याद दिलाता है कि हिंदी का आकाश बहुत विस्तृत है।
उनके द्वारा ये लिखी गईं प्रमुख पुस्तकें
उपन्यास अपराजिता, व्यंग्य संग्रह में बूढ़ा बैल, पंडित जी मेरे मरने के बाद, न बांस न बांसुरी, मुर्गी की डेढ़ टांग, मखमली जूता, काव्य संग्रह में आस्था की कलम, आस्था का सूरज।
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डॉ. शशिकांत शर्मा की अब तक कुल 32 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसमें व्यंग्य संग्रह बूढ़ा बैल और मखमली जूता के लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया है। डॉ. शशिकांत शर्मा ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र के बाबा नानक सिंधी हिंदी जूनियर कॉलेज में हिंदी को लेकर काफी संघर्ष किया। छात्रों व अभिभावकों को हिंदी के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने अपराजिता उपन्यास भी लिखा है। वर्तमान में वह अर्चना साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था के अध्यक्ष है।
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प्रख्यात लेखक डॉ. शशिकांत शर्मा ने बताया कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि भारत की पहचान और रिश्तों की गर्माहट है। हिंदी भारत की सीमाओं तक ही सिमटी है लेकिन सच्चाई इससे कहीं बड़ी है। दुनिया के कई देशों में हिंदी बोली, समझी और सिखाई जाती है। विश्व हिंदी दिवस हमें यही याद दिलाता है कि हिंदी का आकाश बहुत विस्तृत है।
उनके द्वारा ये लिखी गईं प्रमुख पुस्तकें
उपन्यास अपराजिता, व्यंग्य संग्रह में बूढ़ा बैल, पंडित जी मेरे मरने के बाद, न बांस न बांसुरी, मुर्गी की डेढ़ टांग, मखमली जूता, काव्य संग्रह में आस्था की कलम, आस्था का सूरज।