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Fatehpur News: पहले दहाड़े मारकर रोया... बाद में कबूला मैंने चाकू से रेता गला

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 12:28 AM IST
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First I cried out loud... later I confessed I slit her throat with a knife.
फोटो-39-आरोपी अंकित। स्रोत पुलिस
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फतेहपुर। जमींदार परिवार के वरिष्ठ अधिवक्ता जयराज मान सिंह के हत्यारोपी मुंशी अंकित मिश्रा के चेहरे पर न तो सिकन थी और न ही कोई पछतावा। हां...चेहरा और आंखें गुस्से से लाल थीं मानो अभी प्रतिशोध का बदला बाकी हो। जमींदार परिवार और जिले के हर व्यक्ति के मन में सिर्फ एक ही सवाल था आखिर जयराज की हत्या क्यों की गई। पुलिस ने हत्या का खुलासा कर दावा किया कि अंकित परिवार का करीबी बनकर भूमि बिकवाना चाहता था। इसलिए उसने यह कृत्य किया। उस पर किसी का शक न जाए इसलिए शव के पास दहाड़े मार मारकर खूब रोया। बाद में कबूला मैंने ही बाग में चाकू से जयराज का गला रेता था।
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पुलिस लाइन में शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक अनूप सिंह ने वरिष्ठ अधिवक्ता जयराज मान सिंह की हत्या का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के एसपी बंगले के बगल में रहने वाले जयराज मान सिंह (68) तांबेश्वर नगर निवासी मुंशी अंकित मिश्रा के साथ रोज की तरह महर्षि विद्या मंदिर के पास स्थित बाग में घूमने गए थे। यहां उनकी गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।
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पूछताछ में आरोपी ने कबूला कि वह पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ लगाने करीब आठ साल पहले बाग जाता था। यहां जयराज सिंह से मुलाकात होने लगी। कुछ ही समय में उनका करीबी बनकर घरेलू, लेनदेन समेत अन्य काम देखने लगा। 109 बीघा बाग की भूमि बिकवाने के लिए ग्राहक खोजने लगा। जयराज के भूमि के भाव बढ़ाने से सौदा नहीं पा रहा था।
इससे उसे मिलने वाला कमीशन कटता दिख रहा था। इस पर उसने करीब एक माह पहले जयराज की हत्या की योजना बनाई। बाजार से चाकू खरीदकर अपने ही घर में छिपा दिया। 21 जनवरी की शाम उसने जमीन की नाप कराई थी। शाम करीब चार बाइक से जयराज मान सिंह के बंगले पहुंचा। बंगले से निकलते समय कमर में चाकू छिपाकर रख लिया था।
बंगले में बाइक खड़ी कर जयराज मान सिंह को कार में बैठाकर बाग पहुंचा। कार खड़ी करने के बाद दोनों टहलते हुए सरसों के खेत के पास पहुंचे। इसी बीच जयराज की गर्दन पर पीछे से से गला रेत दिया। दौड़कर कार के पास पहुंचा। यहां मिट्टी में हाथ और चाकू रगड़ कर खून साफ किया।
इसके बाद कार से अपने घर पहुंचा। यहां हाथ, पैर, कपड़ों और चाकू पर लगा खून बाथरूम में पानी से धो दिया। चाकू को किचन में छिपा दिया। अपने घर से निकलने के बाद जयराज की पत्नी शहनाज मान सिंह को फोन किया बोला कि भैया (जयराज) ने जमीन की नाप में सहयोग के लिए घर से कर्मचारी गंगादीन को बुलाया। वह उसे लेने आ रहा है।
बंगले से गंगादीन को कार से लकर बाग पहुंचा। कार रोककर खुद कई बार जयराज के नंबर पर फोन किया। गंगादीन से भी फोन कराया। फोन रिसीव न होने पर दोनों ने बाग व खेत में खोजबीन की। अंकित ने शहनाज मान सिंह को भी फोन किया और बताया कि भैया फोन नहीं उठा रहे हैं। फोन साइलेंट पर है।
इसके बाद गंगादीन को कार में बैठाकर महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय के सामने रोड पर खोजबीन को ले गया। यहां से भूमि के मेन गेट की ओर पहुंचा। तभी शहनाज, बेटी सोफिया के साथ पति का फोन रिसीव न होने पर मौके पर पहुंच चुकी थी। यहां पति जयराज का शव देखकर अंकित को फोन किया।
वह बाग के दूसरी ओर से पहुंचा। सभी को बिलखता देखकर वह भी दहाड़े मार कर रोने लगा। उसने डायल 112 पर नंबर पुलिस को सूचना दी। यहां शहनाज ने पुलिस के सामने ही अंकित पर हत्या का आरोप लगाया था।

गंगादीन को बनाना चाहता था गवाह
गंगादीन को साथ ले जाने के पीछे योजना थी वह गवाह के रूप में काम आएगा। जब तक वह गंगादीन को लेकर बाघ तक पहुंचेगा इसी बीच कह देगा कि किसी ने जयराज की हत्या कर दी। बाद में गंगादीन को गवाह के रूप में पेश कर देगा। हालांकि पुलिस की फॉरेंसिक, सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज की जांच में अंकित का झूठ पकड़ा गया। क्योंकि अंकित ने पुलिस को बताया वह बाग से सीधे बंगले गया था। सीसीटीवी फुटेज में अपने घर जाता दिखा था। आरोपी के पास से पुलिस ने खून से सने कपड़े, वारदात में इस्तेमाल किया चाकू, कार, बाइक और मोबाइल फोन बरामद किया है।

शहनाज का विश्वासपात्र बनकर अपने स्तर बेचता भूमि
एसपी अनूप सिंह ने बताया कि अंकित मिश्रा ने 2019 में डीएलएड की परीक्षा पास की थी। वह परिवार का विश्वास पात्र बन चुका था। अंकित ने भूमि बिकवाने के लिए काफी समय से खरीदारों की तलाश की थी। कीमत को लेकर सौदा तय नहीं हो पा रहा था। अंकित का मानना था कि जयराज जीवित रहते जिस कीमत पर जमीन का सौदा करना चाहते थे उसमें काफी समय लगेगा। अंकित की हाल ही में शादी शादी हुई थी। अब रुपयों की जरूरत थी। अंकित ने पिछले आठ वर्ष में कई बार में 12 से 15 लाख रुपये लिए थे। शादी में भी ढाई लाख रुपये लिए थे। अंकित की जल्दी करोड़पति बनने की इच्छा थी। इसलिए उसने जयराज को रास्ते से हटाकर जमींदार परिवार का खास बनने की सोची।

किसी हालत में जिंदा नहीं छोड़ना चाहता था
पुलिस के मुताबिक जयराज मान सिंह के साथ-साथ अंकित चल रहा था। इसी बीच वह कुछ कदम पीछे हो गया। मौका पाकर पीछे से ही गर्दन पर झपटा मारकर चाकू से हमला कर दिया। जयराज ने खुद को बचाने की कोशिश की लेकिन उन्हें टांग फंसाकर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद बेरहमी से गला काट दिया। पुलिस को अंकित के हाथों का खून कार की चाबी, पैंट, नाखून पर लगा मिला।

नौकरी से हटवाने की थी खुन्नस
हत्यारोपी जानता था कि जयराज मान सिंह हाईप्रोफाइल और अकूत संपत्ति वाले व्यक्ति हैं। वह उनसे नौकरी के लालच में जुड़ा था। चर्चा है कि एक न्यायाधीश के यहां नौकरी कुछ दिनों के लिए जयराज मान सिंह ने लगवाई थी। इसके बाद हटवा दिया था।

पुलिस पत्नी को लेकर घटनास्थल पहुंची
जयराज मान सिंह की पत्नी शहनाज मान सिंह शुक्रवार दोपहर घटनास्थल पर पहुंचीं। यहां पुलिस की एक जीप भी साथ थी। वह काफी देर तक मौके पर रूकीं। इसके बाद लौट आईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि शहनाज भी अक्सर प्राॅपर्टी की देखरेख को आती-जाती रहती हैं।


पुलिस इन बिंदुओं पर कर रही विवेचना
- भूमि की नाप पहले कई बार हो चुकी थी। लेखपाल भी भूमि को नाप को चुके थे। ऐसे में घटना के दिन नाप की क्या जरूरत थी।
- गला रेतने वाला चाकू पुलिस ने घर से बरामद किया है। चाकू किचन में इस्तेमाल करने वाला परिजन बता रहे हैं। ऐसे चाकू से 80 फीसदी तक गला कैसे काटा जा सकता है।
- जयराज मान सिंह की लंबाई करीब छह फीट से अधिक की है। हत्यारोपी की लंबाई साढ़े पांच फीट के आसपास है। इन हालातों में वह अकेले घटना को अंजाम नहीं दे सकता है।
- किसी से अंकित ने प्राॅपर्टी के नाम पर एडवांस रकम ले ली। रकम लेने का पता जयराज को लगा। उस पर रुपये देने का दबाव भी हत्या का कारण हो सकता है।
- माना जा रहा है कि किसी के कहने पर हत्याकांड की जिम्मेदारी अंकित ने अपने सिर पर ली है। पुलिस अंदरखाने इस बिंदु की जांच कर रही है।


एक साझेदार ने बेची थी 10 बीघा भूमि
जयराज मान सिंह की प्राॅपर्टी में चार हिस्सेदार हैं। इनमें एक हिस्सेदार ने एक डॉक्टर को करीब 10 बीघा भूमि करोड़ों की बेची थी। हिस्सेदार प्रयागराज का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस सारे हिस्सेदारों से पूछताछ में जुटी है। कुछ दिन पहले एक सफेदपोश भाइयों से भी भूमि के सौदे को लेकर तेजी से चर्चा उठा थी। भूमि का सौदा 300 करोड़ तक का पहुंचा था।

आठ वर्ष का विश्वास एक पल में ही खत्म
जमींदार परिवार के लोग मुंशी अंकित पर आंख मूंद कर भरोसा करते थे। उधार मांगने पर भी उसे रुपये आसानी से मिल जाते थे। ऐसे में आखिर उसे क्या जरूरत पड़ी कि उसने आठ वर्ष में कमाया पूरा विश्वास एक पल में ही चाकू की धार से खत्म कर दिया।

फोटो-39-आरोपी अंकित। स्रोत पुलिस

फोटो-39-आरोपी अंकित। स्रोत पुलिस

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