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Fatehpur News: बीमा कंपनी को कार की मूल्यांकन राशि देने का आदेश
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फतेहपुर। क्लेम में लापरवाही पर आयोग ने बीमा कंपनी को क्षतिग्रस्त वाहन सही कराने और ब्याज समेत कार की मूल्यांकन राशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष राम नरेश मौर्य व सदस्य पद्मिनी आनंद ने शुक्रवार को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी, फोर्थ फ्लोर एल्डिको कॉरपोरेट गोमती नगर लखनऊ के खिलाफ सुनाया।
मलवां थाने के कोराईं बुधइयापुर निवासी संतलाल सिंह ने आयोग में 30 मार्च 2019 को परिवाद दाखिल किया था। परिवादी के मुताबिक कार का बीमा विपक्षी कंपनी से कराया था। वह 11 जून 2018 से 10 जून 2019 तक प्रभावी था। बीमा के समय कार का मूल्य 3,92,040 रुपये आंका गया था। 22 नवंबर 2018 को किसी वाहन की टक्कर से कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
वर्कशॉप संचालक ने गाड़ी पहले की तरह बनाकर देने की बात कही लेकिन बीमा शर्तों के अनुसार कार्य नहीं किया गया और न ही बीमा कंपनी ने भुगतान किया। परिवादी ने वर्कशॉप और बीमा कंपनी को एक-दूसरे से संबद्ध बताया।
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बीमा कंपनी ने जवाब में कहा कि वाहन इंडसइंड बैंक बैंक से वित्तपोषित है। इसे आवश्यक पक्षकार होने के बावजूद शामिल नहीं किया गया। साथ ही बीमा पॉलिसी के तहत इंजन जाम होने से हुई क्षति कवर नहीं थी। वर्कशॉप की ओर से कहा गया कि वह बीमा कंपनी के कहने पर गाड़ी की मरम्मत कर भुगतान लेता है और परिवादी से उसका कोई संबंध नहीं है। इस आधार पर आयोग ने वर्कशॉप के खिलाफ वाद निरस्त कर दिया।
कार का बीमित मूल्य 3,92,040 रुपये था। मरम्मत का खर्च 4,40,585 रुपये आया। आयोग ने दावा सर्वेयर की रिपोर्ट को खारिज करते हुए बीमा कंपनी को परिवादी को 3,92,040 रुपये छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ देने के आदेश दिए। इसके अलावा शारीरिक व मानसिक कष्ट और परिवाद व्यय के लिए 30,000 रुपये भुगतान करने के भी आदेश दिए गए।
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मलवां थाने के कोराईं बुधइयापुर निवासी संतलाल सिंह ने आयोग में 30 मार्च 2019 को परिवाद दाखिल किया था। परिवादी के मुताबिक कार का बीमा विपक्षी कंपनी से कराया था। वह 11 जून 2018 से 10 जून 2019 तक प्रभावी था। बीमा के समय कार का मूल्य 3,92,040 रुपये आंका गया था। 22 नवंबर 2018 को किसी वाहन की टक्कर से कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
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वर्कशॉप संचालक ने गाड़ी पहले की तरह बनाकर देने की बात कही लेकिन बीमा शर्तों के अनुसार कार्य नहीं किया गया और न ही बीमा कंपनी ने भुगतान किया। परिवादी ने वर्कशॉप और बीमा कंपनी को एक-दूसरे से संबद्ध बताया।
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बीमा कंपनी ने जवाब में कहा कि वाहन इंडसइंड बैंक बैंक से वित्तपोषित है। इसे आवश्यक पक्षकार होने के बावजूद शामिल नहीं किया गया। साथ ही बीमा पॉलिसी के तहत इंजन जाम होने से हुई क्षति कवर नहीं थी। वर्कशॉप की ओर से कहा गया कि वह बीमा कंपनी के कहने पर गाड़ी की मरम्मत कर भुगतान लेता है और परिवादी से उसका कोई संबंध नहीं है। इस आधार पर आयोग ने वर्कशॉप के खिलाफ वाद निरस्त कर दिया।
कार का बीमित मूल्य 3,92,040 रुपये था। मरम्मत का खर्च 4,40,585 रुपये आया। आयोग ने दावा सर्वेयर की रिपोर्ट को खारिज करते हुए बीमा कंपनी को परिवादी को 3,92,040 रुपये छह प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ देने के आदेश दिए। इसके अलावा शारीरिक व मानसिक कष्ट और परिवाद व्यय के लिए 30,000 रुपये भुगतान करने के भी आदेश दिए गए।