{"_id":"6976626157984b334201b5e2","slug":"soil-from-the-grave-of-martyr-syed-nusrat-hussain-will-be-brought-back-to-the-country-from-malta-jail-fatehpur-news-c-217-1-sknp1021-148180-2026-01-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehpur News: माल्टा जेल से वतन आएगी शहीद सैय्यद नुसरत हुसैन की कब्र की मिट्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehpur News: माल्टा जेल से वतन आएगी शहीद सैय्यद नुसरत हुसैन की कब्र की मिट्टी
विज्ञापन
फाइल फोटो-02-सैय्यद नुसरत हुसैन। स्रोत परिजन
- फोटो : police
विज्ञापन
जहानाबाद। देश की आजादी की लड़ाई में शहीद सैय्यद नुसरत हुसैन की माल्टा जेल में स्थित कब्र की मिट्टी भारत लाने की तैयारी की जा रही है। आजादी के लिए चलाए गए सिल्क लेटर मूवमेंट (तहरीक-ए-रेशमी रूमाल) में अहम भूमिका निभाने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर माल्टा जेल में कैद किया गया था। यहां उन्होंने अंतिम सांस ली। आगामी फरवरी में उनके पैतृक कस्बे में कब्र की मिट्टी पहुंचने की संभावना है।
कोड़ा जहानाबाद निवासी अमर शहीद हकीम सैय्यद नुसरत हुसैन ने रेशमी रूमाल तहरीक के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। वर्ष 1917 में उन्हें मिस्र से गिरफ्तार कर माल्टा द्वीप की जेल में भेज दिया गया था।
जेल में अंग्रेजी हुकूमत की यातनाएं सहते हुए वर्ष 1920 में उनका निधन हो गया और वहीं उन्हें दफन कर दिया गया। अब उनकी कब्र की मिट्टी माल्टा द्वीप से लाने की पहल यूनिवर्सिटी में कार्यरत रिसर्च स्कॉलर उर्फी रजा जैदी द्वारा तुर्किश एंबेसी के माध्यम से की जा रही है।
कब्र की मिट्टी शहीद के पैतृक कस्बा कोड़ा जहानाबाद लाई जाएगी। यहां शहीद माल्टा नुसरत हुसैन इंटर कॉलेज में उनके वंशज सैय्यद आबिद हसन मिट्टी का स्वागत करेंगे। उन्होंने बताया कि रेशमी रूमाल तहरीक के शहीद परदादा की स्मृति को संजोने के लिए मिट्टी वतन लाई जा रही है। यहां जहां उनके जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन और शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाएगा।
Trending Videos
कोड़ा जहानाबाद निवासी अमर शहीद हकीम सैय्यद नुसरत हुसैन ने रेशमी रूमाल तहरीक के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। वर्ष 1917 में उन्हें मिस्र से गिरफ्तार कर माल्टा द्वीप की जेल में भेज दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
जेल में अंग्रेजी हुकूमत की यातनाएं सहते हुए वर्ष 1920 में उनका निधन हो गया और वहीं उन्हें दफन कर दिया गया। अब उनकी कब्र की मिट्टी माल्टा द्वीप से लाने की पहल यूनिवर्सिटी में कार्यरत रिसर्च स्कॉलर उर्फी रजा जैदी द्वारा तुर्किश एंबेसी के माध्यम से की जा रही है।
कब्र की मिट्टी शहीद के पैतृक कस्बा कोड़ा जहानाबाद लाई जाएगी। यहां शहीद माल्टा नुसरत हुसैन इंटर कॉलेज में उनके वंशज सैय्यद आबिद हसन मिट्टी का स्वागत करेंगे। उन्होंने बताया कि रेशमी रूमाल तहरीक के शहीद परदादा की स्मृति को संजोने के लिए मिट्टी वतन लाई जा रही है। यहां जहां उनके जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन और शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाएगा।

फाइल फोटो-02-सैय्यद नुसरत हुसैन। स्रोत परिजन- फोटो : police

फाइल फोटो-02-सैय्यद नुसरत हुसैन। स्रोत परिजन- फोटो : police
