{"_id":"69cac8fced26358c9e00ed78","slug":"first-aid-boxes-in-roadways-buses-bottles-are-full-in-some-empty-in-others-ghazipur-news-c-313-1-gzp1001-149747-2026-03-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: रोडवेज बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में कहीं बोतल भरी तो कहीं खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: रोडवेज बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में कहीं बोतल भरी तो कहीं खाली
विज्ञापन
रोडवेज बस में खाली पड़ा फर्स्ट एड बॉक्स - संवाद
विज्ञापन
गाजीपुर। अगर आप रोडवेज डिपो की बसों से सफर कर रहे हैं और रास्ते में बीमार पड़ गए, तो आपको प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाएगा। रोडवेज डिपो के बेड़े में 89 बसें हैं, लेकिन 40 बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है। जिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स लगे हुए हैं, वे शो-पीस बने हुए हैं। उनमें दवाओं की जगह खाली पानी की बोतल व अन्य सामान रखे हुए हैं। नियमानुसार रोडवेज की हर बस में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए। उसके अंदर दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। लेकिन रोडवेज डिपो प्रबंधन नियमों का पालन नहीं कर रहा है। उसे यात्रियों की सुविधा की चिंता नहीं है और वह केवल किराया वसूलने तक ही सीमित रह गया है।
रोडवेज डिपो की बसें लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, अकबरपुर, वाराणसी, आजमगढ़, मऊ आदि जनपदों के लिए संचालित होती हैं। गैर-जनपदों के अलावा स्थानीय रूटों पर भी बसों का संचालन किया जाता है। प्रतिदिन करीब 1700 यात्री यात्रा करते हैं। नियमानुसार बसों में यात्रियों के लिए दवाओं से लैस फर्स्ट एड बॉक्स होना बेहद जरूरी है।
हथौड़ी गायब, हादसा होने पर कैसे टूटेंगे शीशे
गाजीपुर। रोडवेज बसों में हथौड़ी भी होनी चाहिए, ताकि हादसा होने की स्थिति में खिड़कियों का शीशा तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला जा सके। लेकिन इसकी स्थिति भी फर्स्ट एड बॉक्स जैसी ही है। रोडवेज बसों से हथौड़ी गायब है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब हथौड़ी ही नहीं है, तो हादसे की स्थिति में यात्रियों को बाहर कैसे निकाला जाएगा। संवाद
गाजीपुर से वाराणसी जाने वाली रोडवेज बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है, जबकि इस रूट पर काफी संख्या में यात्री सफर करते हैं। रोडवेज की ज्यादातर बसों का संचालन वाराणसी के लिए होता है।
गाजीपुर से शेरपुर के लिए संचालित रोडवेज बस में फर्स्ट एड बॉक्स लगा है, लेकिन उसमें दवाएं नदारद हैं। बॉक्स केवल शो-पीस बना हुआ है। बाहर से देखने पर लगता है कि फर्स्ट एड बॉक्स मौजूद है, लेकिन खोलने पर हकीकत सामने आती है।
अधिकांश रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स लगा है। जिन फर्स्ट एड बॉक्स में दवाएं नहीं हैं, उनमें आज ही दवाएं रखवा दी जाएंगी। - अभिषेक सिंह, स्टेशन प्रभारी, रोडवेज डिपो
Trending Videos
रोडवेज डिपो की बसें लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, अकबरपुर, वाराणसी, आजमगढ़, मऊ आदि जनपदों के लिए संचालित होती हैं। गैर-जनपदों के अलावा स्थानीय रूटों पर भी बसों का संचालन किया जाता है। प्रतिदिन करीब 1700 यात्री यात्रा करते हैं। नियमानुसार बसों में यात्रियों के लिए दवाओं से लैस फर्स्ट एड बॉक्स होना बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हथौड़ी गायब, हादसा होने पर कैसे टूटेंगे शीशे
गाजीपुर। रोडवेज बसों में हथौड़ी भी होनी चाहिए, ताकि हादसा होने की स्थिति में खिड़कियों का शीशा तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला जा सके। लेकिन इसकी स्थिति भी फर्स्ट एड बॉक्स जैसी ही है। रोडवेज बसों से हथौड़ी गायब है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब हथौड़ी ही नहीं है, तो हादसे की स्थिति में यात्रियों को बाहर कैसे निकाला जाएगा। संवाद
गाजीपुर से वाराणसी जाने वाली रोडवेज बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है, जबकि इस रूट पर काफी संख्या में यात्री सफर करते हैं। रोडवेज की ज्यादातर बसों का संचालन वाराणसी के लिए होता है।
गाजीपुर से शेरपुर के लिए संचालित रोडवेज बस में फर्स्ट एड बॉक्स लगा है, लेकिन उसमें दवाएं नदारद हैं। बॉक्स केवल शो-पीस बना हुआ है। बाहर से देखने पर लगता है कि फर्स्ट एड बॉक्स मौजूद है, लेकिन खोलने पर हकीकत सामने आती है।
अधिकांश रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स लगा है। जिन फर्स्ट एड बॉक्स में दवाएं नहीं हैं, उनमें आज ही दवाएं रखवा दी जाएंगी। - अभिषेक सिंह, स्टेशन प्रभारी, रोडवेज डिपो

रोडवेज बस में खाली पड़ा फर्स्ट एड बॉक्स - संवाद