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Ghazipur Ground Report: गाजीपुर में धरातल पर कितना विकास? जानें ग्रामीण इलाकों से लेकर पर्यटन तक क्या बदला

अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: Akash Dubey Updated Thu, 09 Apr 2026 04:21 PM IST
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सार

अमर उजाला टीम ने गाजीपुर में सरकारी योजनाओं का जमीनी असर परखा। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास, केले की खेती में चुनौती को लेकर चर्चा की गई। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हो रहे कार्यों की हकीकत को भी जाना गया।

Ghazipur Ground Report: How Much Development Is Visible on Ground in district
गाजीपुर ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बजने में अब एक साल वर्ष से भी कम का समय शेष है। इस बीच राजनीतिक दलों ने भी अपनी-अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में अमर उजाला की टीम ने जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए गाजीपुर जिले का दौरा किया। यहां केले की खेती का प्रभाव और धार्मिक पर्यटन के अवसरों को करीब से देखा गया। इस पड़ताल का उद्देश्य यह समझना था कि सरकारी योजनाओं का आम जनजीवन पर कितना असर पड़ा है और जिले में सरकार के विकास के दावों की असल तस्वीर क्या है?

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ग्रामीण क्षेत्रों में कितना हुआ बदलाव?
इस सवाल का जवाब तलाशते हुए हमारी टीम गाजीपुर के रेवतीपुर गांव पहुंची। दावा किया जाता है यह देश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां हमारी बात गांव के प्रधान राकेश राय से हुई। उन्होंने कहा, मतदाता के हिसाब से यह सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। जो भी संसाधन सरकार की तरफ आता है उसका अधिकतम सुनियोजना करने का काम करते हैं। जिस पंचायत के सामने खड़े हैं शायद यह प्रदेश की सबसे समृद्ध पंचायत है। यहां डबल ग्राउंड स्टेडियम है, जहां रात्रि के समय भी मैच हो सकता है। यहां उच्च स्तरीय मार्ग बने हुए हैं। स्थानीय निवासी प्रवीण शुक्ल ने बताया कि वर्तमान प्रधान ने अच्छा विकास किया है। आने वाले चुनाव में ग्राम प्रधान उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर मिलेगी। 
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यहां देखें पूरी बातचीत-


किसानों का कितना बदला जीवन और क्या है चुनौती?
टीम केले की खेती करने वाले किसानों से बातचीत की। यहां का केला सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। यहां के किसानों को राज्य सरकार की योजनाओं का कैसे लाभ मिल रहा है?, कैसे यहां रेवतीपुर में केले की खेती होती है? स्थानीय किसान अनिल कुमार राय ने बताया कि केले की खेती पिछले साल 30 बीघा थी। इस साल 15 बीघा है। बीते साल किसानों को काफी नुकसान हुआ है। जिससे इस बार खेती पर असर है। बाढ़ से ज्यादा नुकसान होता है। सरकार की सब्सिडी चल रही है। हम लोग लीज पर खेती लेते हैं लेकिन सब्सिडी का पैसा जमीन मालिक को जाता है, लेकिन हम फिर भी खेती कर रहे हैं। स्थानीय किसान प्रदीप पांडेय ने बताया कि बाढ़ की वजह से पहले एक जैसी खेती करनी पड़ती थी। अब सीएम योगी की नीतियों की वजह से ये काम व्यावसायिकखेती की तरफ बढ़ा है। किसानों की आय में इजाफा हुआ है।  केले की खेती में बढ़िया सब्सिडी मिलती है। करीब एक बीघे में 55 हजार के करीब सरकार की ओर से मिल जाता है।

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रोजगार और पर्यटन के क्षेत्र में गाजीपुर को क्या हुआ हासिल?
इस सवाल के जवाब के लिए अमर उजाला की टीम जिले के मां कामाख्या मंदिर पहुंची। मंदिर के पुजारियों और यहां आए भक्तों से बात की। यहां से लोगों से जानेंगे कि एक मंदिर के जीर्णोद्धार से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला और पर्यटन कितना बढ़ा है। मां कामाख्या मंदिर के मुख्य पुजारी मिथिलेश उपाध्याय ने बताया कि 1984 में मंदिर का नवनिर्माण हुआ। तब से आज तक बहुत विकास हुआ। समिति गठित होने से विकास तेजी से हुआ। 2017 के बाद से और ज्यादा बदलाव आया। मंदिर समिति अध्यक्ष जन्मेजय सिंह ने कहा कि सरकार का सहयोग है। मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ने कहा कि यहां चार से पांच हजार लोगों को रोजगार मिला है। यहां 365 दिन वाले दुकानदार हैं। श्रद्धालु राजकुमार राय ने कहा कि यहां पर सब ठीक है। पहले से बहुत परिवर्तन हो गया है।

यहां देखें पूरी बातचीत-
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