UPSC: गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा ने पाई 301वीं रैंक, एक अन्य अभ्यर्थी ने भी किया दावा; दीपक को मिली 672वीं रैंक
UPSC Result: गाजीपुर जिले की डॉ. आकांक्षा सिंह और दीपक कुशवाहा को जब फोन आया तो उनके खुशी की ठिकाना नहीं रहा। दोनों के गांव में भी जश्न का माहाैल चल रहा है। दोनों ने अपने-अपने अनुभव अमर उजाला से साझा किए।
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घर में शोक का माहौल था। दादा के निधन के बाद गरुड़ पुराण का पाठ चल रहा था। परिवार के लोग दुख में डूबे हुए थे। तभी अचानक एक फोन कॉल ने पूरे माहौल को बदल दिया। खबर आई कि अभईपुर गांव की बेटी डॉ. आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल की है।
यह जानकारी देते हुए डाॅ.आकांक्षा ने बताया कि हालांकि कुछ देर के लिए परिणाम को लेकर ऊहापोह की स्थिति रही क्योंकि यूपीएससी का परिणाम आने के बाद बिहार की आकांक्षा सिंह नाम की ही एक अन्य अभ्यर्थी ने भी 301वीं रैंक पर दावा कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
हालांकि अभईपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह ने तुरंत एक वीडियो जारी कर अपनी सफलता के प्रमाण साझा किए, जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई। उसने बताया कि दुख और गर्व के मिले-जुले उस पल में परिवार की आंखों से आंसू जरूर निकले, लेकिन इस बार वे खुशी और गर्व के थे।
पिता रणजीत सिंह ने बताया कि डॉ. आकांक्षा शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। उसकी प्रारंभिक शिक्षा गुजरात के जामनगर में हुई, जबकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली से पूरी की। मेडिकल क्षेत्र में रुचि के चलते उन्होंने पहले एमबीबीएस की पढ़ाई की। डॉक्टर बनने के बाद भी उनका लक्ष्य यहीं नहीं रुका और उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर आखिरकार उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार इस परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।
पहले ही प्रयास में दीपक ने सिविल सेवा की परीक्षा में हासिल की 672वीं रैंक
कड़ी मेहनत और पक्के इरादे हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है स्टेशन बाजार निवासी दीपक कुशवाहा ने। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में 672वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
सबसे खास बात यह है कि दीपक ने यह सफलता अपने पहले ही प्रयास में हासिल की है। दीपक के पिता रामवृक्ष भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में स्टेशन बाजार के बजरंग कॉलोनी में रहते हैं। दो बहनों (जिनकी शादी हो चुकी है) के इकलौते भाई दीपक शुरु से ही मेधावी रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जमानिया में ही पूरी हुई।
वाराणसी से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा के लिए एक वर्ष राजस्थान के कोटा में रहकर तैयारी की। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने प्रतिष्ठित एनआईटी वारंगल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने रायपुर स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्य किया।
प्रोजेक्ट मैनेजर जैसी शानदार नौकरी के बावजूद दीपक का सपना एक प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश और समाज की सेवा करने का था। इसी सपने को पूरा करने के लिए दो वर्ष पहले उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली का रुख किया।
उनके अटूट धैर्य और समर्पण का ही परिणाम है कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहरा दिया। सिविल सेवा की परीक्षा में बेटे की इस शानदार कामयाबी पर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया।
