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Gonda News: आयुष्मान योजना के 92 हजार पात्रों का पता गुम
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:12 PM IST
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गोंडा। जिले में आयुष्मान भारत योजना के 92,641 पात्रों का पता कागजों में ही गुम हो गया है। शासन से मिली सूची में नाम तो दर्ज हैं, लेकिन पूरा पता, ग्राम पंचायत, विकासखंड या मोबाइल नंबर नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग को इन पात्राें को खोजने में परेशानी उठानी पड़ रही है। कई मामलों में केवल मजरे का नाम ही लिखा है, जिससे सही व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के 3,27,001 परिवारों के 15,91,703 सदस्यों का गोल्डन कार्ड बनाकर उन्हें प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध करानी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव-गांव शिविर लगाकर और अस्पतालों के माध्यम से अब तक करीब आठ लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, लेकिन अधूरी सूची के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभी भी छूटे हुए हैं।
5,338 लोगों के सिर्फ नाम दर्ज
सूची में 5,338 ऐसे पात्र हैं, जिनका सिर्फ नाम ही दर्ज है। ब्लॉक, सोर्स एड्रेस, पूरा पता और गांव का नाम तक दर्ज नहीं है। शहरी सूची में रोशनी, चांदनी, शाहिद, सैफ, जाकिर, असलम जैसे नाम दर्ज हैं, लेकिन इनके बारे में अन्य कोई जानकारी ही नहीं है। ऐसे लोगों को खोजकर कार्ड बनाना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।
कैंप लगाकर तलाशे जा रहे लाभार्थी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंचायत भवनों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शिविर लगाकर छूटे हुए लाभार्थियों को खोजा जा रहा है। कर्मचारी सूची में दर्ज नामों को पढ़कर ग्रामीणों से जानकारी लेते हैं और पहचान होने पर उनका कार्ड बनाया जा रहा है। कई पात्र खुद भी शिविरों में पहुंचकर अपना आयुष्मान कार्ड बनवा रहे हैं। नोडल अधिकारी डॉ. सीके वर्मा ने बताया कि जिनका पूरा पता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें खोजने में दिक्कत आ रही है। इसके लिए गांव-गांव शिविर लगाए जा रहे हैं और स्थानीय लोगों के सहयोग से पात्रों की पहचान कर कार्ड बनाए जा रहे हैं।
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आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के 3,27,001 परिवारों के 15,91,703 सदस्यों का गोल्डन कार्ड बनाकर उन्हें प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध करानी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव-गांव शिविर लगाकर और अस्पतालों के माध्यम से अब तक करीब आठ लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, लेकिन अधूरी सूची के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभी भी छूटे हुए हैं।
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5,338 लोगों के सिर्फ नाम दर्ज
सूची में 5,338 ऐसे पात्र हैं, जिनका सिर्फ नाम ही दर्ज है। ब्लॉक, सोर्स एड्रेस, पूरा पता और गांव का नाम तक दर्ज नहीं है। शहरी सूची में रोशनी, चांदनी, शाहिद, सैफ, जाकिर, असलम जैसे नाम दर्ज हैं, लेकिन इनके बारे में अन्य कोई जानकारी ही नहीं है। ऐसे लोगों को खोजकर कार्ड बनाना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।
कैंप लगाकर तलाशे जा रहे लाभार्थी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंचायत भवनों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर शिविर लगाकर छूटे हुए लाभार्थियों को खोजा जा रहा है। कर्मचारी सूची में दर्ज नामों को पढ़कर ग्रामीणों से जानकारी लेते हैं और पहचान होने पर उनका कार्ड बनाया जा रहा है। कई पात्र खुद भी शिविरों में पहुंचकर अपना आयुष्मान कार्ड बनवा रहे हैं। नोडल अधिकारी डॉ. सीके वर्मा ने बताया कि जिनका पूरा पता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें खोजने में दिक्कत आ रही है। इसके लिए गांव-गांव शिविर लगाए जा रहे हैं और स्थानीय लोगों के सहयोग से पात्रों की पहचान कर कार्ड बनाए जा रहे हैं।