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Gonda News: बेटी की हत्या में पिता और सौतेली मां को उम्रकैद
Tue, 11 Aug 2026 11:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 11 Aug 2026 11:26 PM IST
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श्वेता की फाइल फोटो और दोषी पिता व सौतेली मां। संवाद
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गोंडा। बेटी की हत्या के मामले में आरोपी पिता और सौतेली मां को दोषी करार देते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग नरायन सिंह की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मोतीगंज के खिरई खिरवा निवासी बृज बिहारी मिश्र ने धानेपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उनकी बेटी नीतू की शादी तुलसीराम पुरवा निवासी राजेश शुक्ल से हुई थी। राजेश ने नीतू की हत्या कर दूसरी शादी कर ली थी। कुछ समय बाद उन्हें इसकी जानकारी हुई, लेकिन नीतू की बेटी श्वेता के भविष्य को देखते हुए उन्होंने उस समय एफआईआर नहीं दर्ज कराई।
11 जून 2024 को उन्हें सूचना मिली कि राजेश शुक्ल, उसकी दूसरी पत्नी किरन शुक्ला और एक अन्य ने श्वेता की हत्या कर दी है। सूचना के आधार पर धानेपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू की। साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने राजेश शुक्ल और किरन शुक्ला के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाहों और साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने राजेश शुक्ल और किरन शुक्ला को हत्या का दोषी करार दिया। मंगलवार को दोनों को सजा सुनाई गई।
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शादी से इन्कार पर रची थी साजिश
गोंडा। श्वेता की हत्या महज एक वारदात नहीं, बल्कि घर में ही रची गई ऐसी साजिश थी, जिसकी परतें पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ खुलती गईं। पुलिस के मुताबिक, जिस युवक से श्वेता की शादी कराने की बात हो रही थी, उस पर दहेज हत्या का आरोप था। इस वजह से श्वेता ने शादी से इन्कार कर दिया। ये बात उसके पिता राजेश शुक्ल और सौतेली मां किरन को नागवार गुजरी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि 11 जून 2024 की रात श्वेता घर में सो रही थी। तभी सौतेली मां किरन ने उसके दोनों पैर पकड़ लिए और पिता राजेश ने चाकू से गला रेत दिया। हत्या के बाद मामले को दूसरा रूप देने की कोशिश की गई।
पुलिस के अनुसार, राजेश का अपने भाइयों से जमीन और मकान को लेकर विवाद चल रहा था। जांच में यह आशंका सामने आई कि श्वेता की हत्या के बाद राजेश अपने भाइयों और भतीजों पर आरोप मढ़ने की तैयारी में था। हालांकि, पुलिस की विवेचना में घटनाक्रम की कड़ियां जुड़ती गईं और शक की सुई राजेश और किरन की ओर ही घूम गई।
श्वेता की हत्या की जानकारी मिलने पर उसके नाना बृज बिहारी मिश्र ने धानेपुर थाने में इन्हीं दोनों के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। राजेश व किरन की गिरफ्तारी हुई और साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। दो साल बाद न्यायालय का फैसला आया है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी
एसपी विनीत जायसवाल ने कहा कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिह्नित अपराधों में प्रभावी पैरवी को प्राथमिकता दी जा रही है। श्वेता हत्याकांड में पुलिस और अभियोजन की टीम ने मजबूत पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप दोनों दोषियों को न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा हुई। भविष्य में भी गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी जारी रहेगी।
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मोतीगंज के खिरई खिरवा निवासी बृज बिहारी मिश्र ने धानेपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उनकी बेटी नीतू की शादी तुलसीराम पुरवा निवासी राजेश शुक्ल से हुई थी। राजेश ने नीतू की हत्या कर दूसरी शादी कर ली थी। कुछ समय बाद उन्हें इसकी जानकारी हुई, लेकिन नीतू की बेटी श्वेता के भविष्य को देखते हुए उन्होंने उस समय एफआईआर नहीं दर्ज कराई।
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11 जून 2024 को उन्हें सूचना मिली कि राजेश शुक्ल, उसकी दूसरी पत्नी किरन शुक्ला और एक अन्य ने श्वेता की हत्या कर दी है। सूचना के आधार पर धानेपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू की। साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने राजेश शुक्ल और किरन शुक्ला के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाहों और साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने राजेश शुक्ल और किरन शुक्ला को हत्या का दोषी करार दिया। मंगलवार को दोनों को सजा सुनाई गई।
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शादी से इन्कार पर रची थी साजिश
गोंडा। श्वेता की हत्या महज एक वारदात नहीं, बल्कि घर में ही रची गई ऐसी साजिश थी, जिसकी परतें पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ खुलती गईं। पुलिस के मुताबिक, जिस युवक से श्वेता की शादी कराने की बात हो रही थी, उस पर दहेज हत्या का आरोप था। इस वजह से श्वेता ने शादी से इन्कार कर दिया। ये बात उसके पिता राजेश शुक्ल और सौतेली मां किरन को नागवार गुजरी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि 11 जून 2024 की रात श्वेता घर में सो रही थी। तभी सौतेली मां किरन ने उसके दोनों पैर पकड़ लिए और पिता राजेश ने चाकू से गला रेत दिया। हत्या के बाद मामले को दूसरा रूप देने की कोशिश की गई।
पुलिस के अनुसार, राजेश का अपने भाइयों से जमीन और मकान को लेकर विवाद चल रहा था। जांच में यह आशंका सामने आई कि श्वेता की हत्या के बाद राजेश अपने भाइयों और भतीजों पर आरोप मढ़ने की तैयारी में था। हालांकि, पुलिस की विवेचना में घटनाक्रम की कड़ियां जुड़ती गईं और शक की सुई राजेश और किरन की ओर ही घूम गई।
श्वेता की हत्या की जानकारी मिलने पर उसके नाना बृज बिहारी मिश्र ने धानेपुर थाने में इन्हीं दोनों के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। राजेश व किरन की गिरफ्तारी हुई और साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। दो साल बाद न्यायालय का फैसला आया है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी
एसपी विनीत जायसवाल ने कहा कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिह्नित अपराधों में प्रभावी पैरवी को प्राथमिकता दी जा रही है। श्वेता हत्याकांड में पुलिस और अभियोजन की टीम ने मजबूत पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप दोनों दोषियों को न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा हुई। भविष्य में भी गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी जारी रहेगी।

श्वेता की फाइल फोटो और दोषी पिता व सौतेली मां। संवाद