{"_id":"69765d9c6a577af18e09607e","slug":"the-indian-constitution-is-a-purely-hindu-constitution-gonda-news-c-100-1-gon1041-151001-2026-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: शुद्ध रूप से हिंदू संविधान है भारतीय संविधान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: शुद्ध रूप से हिंदू संविधान है भारतीय संविधान
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 25 Jan 2026 11:44 PM IST
विज्ञापन
एससीपीएम कॉलेज में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्व
विज्ञापन
गोंडा। भारतीय संविधान शुद्ध रूप से हिंदू संविधान है। इसकी गलत व्याख्या की जा रही है। हमें वास्तविकता समझने की जरूरत है। जिस दिन हम तथ्यों को भली-भांति समझ जाएंगे, हमारा सारा भ्रम दूर हो जाएगा। यह बात प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता अश्विनी उपाध्याय ने शनिवार रात एससीपीएम मेडिकल कॉलेज में आरएसएस द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन में कही।
अश्विनी उपाध्याय के अनुसार, आज हमें पढ़ाया जाता है कि विश्व के 10 देशों के संविधानों से प्रमुख तत्व लेकर भारतीय संविधान बनाया गया। किंतु क्या कभी इस प्रश्न पर विचार किया गया कि आखिर उन देशों ने ये तत्व कहां से प्राप्त किए? शायद नहीं। दरअसल, उन देशों के संविधानों में जो तत्व वर्णित हैं, वे विश्व के प्राचीनतम संहिताबद्ध ग्रंथ मनुस्मृति से लिए गए हैं। विश्व में जब शिक्षा नाम की चीज नहीं हुआ करती थी, तब मनुस्मृति में राजा और शासन, न्याय और दंड, स्त्री, परिवार और उत्तराधिकार, वर्ण और सामाजिक व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से लिख दिया गया था। 2,500 श्लोकों वाले इस मूल ग्रंथ में मुगल और अंग्रेज शासनकाल तथा आजादी के बाद कुछ वामपंथी कलमकारों ने टीका-टिप्पणी लिखी और जान-बूझकर इसमें कुछ विवादित श्लोक शामिल कर दिए।
अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि ‘जननी जन्मभूमिश्च’, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ और ‘नारी तू नारायणी’ जैसे तथ्यों के माध्यम से महिला सम्मान की बात करने वाले इस ग्रंथ को कुछ सत्तालोलुप लेखकों ने महिला और दलित विरोधी बताने का काम किया। प्राचीनकाल से ही सनातन धर्म में इसी ग्रंथ के प्रकाश में बालिकाओं को न केवल शास्त्र, बल्कि शस्त्र की भी शिक्षा दी जाती थी।
उपाध्याय ने कहा कि मनुस्मृति के 10वें अध्याय के 65वें श्लोक में ‘कर्मणा जायते जातिः’ का स्पष्ट उल्लेख है। इसी कारण संगोत्रीय होने के बावजूद राजा दशरथ और गुरु वशिष्ठ दोनों की जाति कर्म के आधार पर निर्धारित की गई। हस्तिनापुर (वर्तमान एशिया) के महाराजा शांतनु के निधन के बाद रानी सत्यवती (नाविक पुत्री) ने राज सिंहासन का कुशलतापूर्वक संचालन किया। सूतपुत्र होने के बावजूद कर्ण न केवल कौरव सेना के प्रधान सेनापति बने, बल्कि दुर्योधन ने उन्हें अंग देश का राजा भी बनाया। इतिहास की ये घटनाएं बताती हैं कि भारत में वर्ण व्यवस्था जाति नहीं, बल्कि कर्म पर आधारित थी।
उन्होंने कहा कि विश्व की 6,500 भाषाओं में लिखे गए 1,100 धार्मिक ग्रंथों में से केवल हिंदू ग्रंथों में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ की बात की गई है। कुछ लोग तलवार के बल पर अपने धर्म के विस्तार तथा उसे न मानने वाले का सिर कलम करने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान समानता की बात करता है, किंतु न तो भेड़िये और बकरी को साथ में रखा जा सकता है और न ही बबूल और आम के पौधे एक साथ रोपे जा सकते हैं। प्रकृति ने ही उनके चरित्र भिन्न-भिन्न बनाए हैं, उनमें समानता संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत की भांति ही संविधान, सेना, सुप्रीम कोर्ट और सरकार जैसी सभी व्यवस्थाएं हमारे पड़ोसी देशों में भी हैं, किंतु भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी निरंतर बढ़ रही है, जबकि पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक तेजी से घट रहे हैं। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से आठ हिंदू विहीन हो चुके हैं। यदि हम नहीं चेते तो आने वाले समय में स्थिति भयावह हो सकती है।
इस मौके पर संघ के अवध प्रांत के संपर्क प्रमुख गंगा सिंह, विभाग प्रचारक प्रवीण, जिला प्रचारक सतीश, नगर प्रचारक अमित, डॉ. ओएन पांडेय, अलका पांडेय, पंकज अग्रवाल, अश्विनी शुक्ल, रणविजय सिंह, ज्योति पांडेय, धर्मेंद्र पांडेय, तारकेश्वर शुक्ल आदि मौजूद रहे।
Trending Videos
अश्विनी उपाध्याय के अनुसार, आज हमें पढ़ाया जाता है कि विश्व के 10 देशों के संविधानों से प्रमुख तत्व लेकर भारतीय संविधान बनाया गया। किंतु क्या कभी इस प्रश्न पर विचार किया गया कि आखिर उन देशों ने ये तत्व कहां से प्राप्त किए? शायद नहीं। दरअसल, उन देशों के संविधानों में जो तत्व वर्णित हैं, वे विश्व के प्राचीनतम संहिताबद्ध ग्रंथ मनुस्मृति से लिए गए हैं। विश्व में जब शिक्षा नाम की चीज नहीं हुआ करती थी, तब मनुस्मृति में राजा और शासन, न्याय और दंड, स्त्री, परिवार और उत्तराधिकार, वर्ण और सामाजिक व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से लिख दिया गया था। 2,500 श्लोकों वाले इस मूल ग्रंथ में मुगल और अंग्रेज शासनकाल तथा आजादी के बाद कुछ वामपंथी कलमकारों ने टीका-टिप्पणी लिखी और जान-बूझकर इसमें कुछ विवादित श्लोक शामिल कर दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि ‘जननी जन्मभूमिश्च’, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ और ‘नारी तू नारायणी’ जैसे तथ्यों के माध्यम से महिला सम्मान की बात करने वाले इस ग्रंथ को कुछ सत्तालोलुप लेखकों ने महिला और दलित विरोधी बताने का काम किया। प्राचीनकाल से ही सनातन धर्म में इसी ग्रंथ के प्रकाश में बालिकाओं को न केवल शास्त्र, बल्कि शस्त्र की भी शिक्षा दी जाती थी।
उपाध्याय ने कहा कि मनुस्मृति के 10वें अध्याय के 65वें श्लोक में ‘कर्मणा जायते जातिः’ का स्पष्ट उल्लेख है। इसी कारण संगोत्रीय होने के बावजूद राजा दशरथ और गुरु वशिष्ठ दोनों की जाति कर्म के आधार पर निर्धारित की गई। हस्तिनापुर (वर्तमान एशिया) के महाराजा शांतनु के निधन के बाद रानी सत्यवती (नाविक पुत्री) ने राज सिंहासन का कुशलतापूर्वक संचालन किया। सूतपुत्र होने के बावजूद कर्ण न केवल कौरव सेना के प्रधान सेनापति बने, बल्कि दुर्योधन ने उन्हें अंग देश का राजा भी बनाया। इतिहास की ये घटनाएं बताती हैं कि भारत में वर्ण व्यवस्था जाति नहीं, बल्कि कर्म पर आधारित थी।
उन्होंने कहा कि विश्व की 6,500 भाषाओं में लिखे गए 1,100 धार्मिक ग्रंथों में से केवल हिंदू ग्रंथों में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ की बात की गई है। कुछ लोग तलवार के बल पर अपने धर्म के विस्तार तथा उसे न मानने वाले का सिर कलम करने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान समानता की बात करता है, किंतु न तो भेड़िये और बकरी को साथ में रखा जा सकता है और न ही बबूल और आम के पौधे एक साथ रोपे जा सकते हैं। प्रकृति ने ही उनके चरित्र भिन्न-भिन्न बनाए हैं, उनमें समानता संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत की भांति ही संविधान, सेना, सुप्रीम कोर्ट और सरकार जैसी सभी व्यवस्थाएं हमारे पड़ोसी देशों में भी हैं, किंतु भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी निरंतर बढ़ रही है, जबकि पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक तेजी से घट रहे हैं। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से आठ हिंदू विहीन हो चुके हैं। यदि हम नहीं चेते तो आने वाले समय में स्थिति भयावह हो सकती है।
इस मौके पर संघ के अवध प्रांत के संपर्क प्रमुख गंगा सिंह, विभाग प्रचारक प्रवीण, जिला प्रचारक सतीश, नगर प्रचारक अमित, डॉ. ओएन पांडेय, अलका पांडेय, पंकज अग्रवाल, अश्विनी शुक्ल, रणविजय सिंह, ज्योति पांडेय, धर्मेंद्र पांडेय, तारकेश्वर शुक्ल आदि मौजूद रहे।
