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Hamirpur News: बिना कनेक्शन थमाया 72 हजार का बिल, आयोग ने किया निरस्त
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हमीरपुर। विद्युत संयोजन दिए बिना उपभोक्ता को 72,081 रुपये का बिल थमाना बिजली विभाग को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता आयोग की तीन सदस्यीय न्याय पीठ ने इसे विभाग की लापरवाही मानते हुए फैसला सुनाया। आयोग ने बिल को पूरी तरह निरस्त करने का आदेश दिया है।
सुरौला बुजुर्ग गांव निवासी राम मनोहर साहू ने 15 मई 2012 को घरेलू विद्युत संयोजन के लिए आवेदन किया था। उस समय मोहल्ले में खंभे और तार नहीं थे जिससे कनेक्शन नहीं मिल सका। इसके बावजूद मई 2020 में उनके नाम से 72,081 रुपये का बिल जारी कर दिया गया। राम मनोहर साहू ने स्थानीय और मंडलीय अफसरों तक शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 24 अक्तूबर 2018 को उनकी पत्नी राजरानी के नाम से एक अलग कनेक्शन जारी हुआ। पुराना बिल फिर भी आता रहा जिससे समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुना।
दलीलें और अभिलेखों के परीक्षण के बाद आयोग ने पाया कि विभाग यह साबित नहीं कर सका। विभाग 2012 में मौके पर विद्युत आपूर्ति के संसाधन साबित करने में असफल रहा। यह भी साबित नहीं हुआ कि मीटर लगाकर कनेक्शन चालू किया गया था। आयोग के आयुक्त की जांच में मौके पर केवल एक ही कनेक्शन मिला जो पत्नी के नाम था।
मामले में जिला उपभोक्ता आयोग की तीन सदस्यीय न्याय पीठ के अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा, सदस्य रामप्रताप व स्वर्णलता जायसवाल ने 72,081 रुपये का बिल शून्य घोषित किया जिसे वसूलने का अधिकार नहीं है। संबंधित कनेक्शन को 30 दिन के भीतर अभिलेखों से हटाने का भी आदेश दिया गया। उपभोक्ता को मानसिक कष्ट के लिए पांच हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये देने का आदेश दिया।
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सुरौला बुजुर्ग गांव निवासी राम मनोहर साहू ने 15 मई 2012 को घरेलू विद्युत संयोजन के लिए आवेदन किया था। उस समय मोहल्ले में खंभे और तार नहीं थे जिससे कनेक्शन नहीं मिल सका। इसके बावजूद मई 2020 में उनके नाम से 72,081 रुपये का बिल जारी कर दिया गया। राम मनोहर साहू ने स्थानीय और मंडलीय अफसरों तक शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 24 अक्तूबर 2018 को उनकी पत्नी राजरानी के नाम से एक अलग कनेक्शन जारी हुआ। पुराना बिल फिर भी आता रहा जिससे समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुना।
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दलीलें और अभिलेखों के परीक्षण के बाद आयोग ने पाया कि विभाग यह साबित नहीं कर सका। विभाग 2012 में मौके पर विद्युत आपूर्ति के संसाधन साबित करने में असफल रहा। यह भी साबित नहीं हुआ कि मीटर लगाकर कनेक्शन चालू किया गया था। आयोग के आयुक्त की जांच में मौके पर केवल एक ही कनेक्शन मिला जो पत्नी के नाम था।
मामले में जिला उपभोक्ता आयोग की तीन सदस्यीय न्याय पीठ के अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा, सदस्य रामप्रताप व स्वर्णलता जायसवाल ने 72,081 रुपये का बिल शून्य घोषित किया जिसे वसूलने का अधिकार नहीं है। संबंधित कनेक्शन को 30 दिन के भीतर अभिलेखों से हटाने का भी आदेश दिया गया। उपभोक्ता को मानसिक कष्ट के लिए पांच हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये देने का आदेश दिया।

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