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Hamirpur News: बेतवा पुल हादसे की जांच में झोल, छह मौतों के 76 दिन बाद भी जवाब देही गोल
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फोटो 14 एचएएमपी 10- हादसे के बाद बंद पड़ा बेतवा पुल का निर्माण कार्य। संवाद
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फोटो 14 एचएएमपी 09- बेतवा पुल का क्षतिग्रस्त पियर-5 की फाइल फोटो।
फोटो 14 एचएएमपी 10- हादसे के बाद बंद पड़ा बेतवा पुल का निर्माण कार्य। संवाद
- तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री की बड़ी खामी नहीं
- तेज आंधी में काम जारी रखना हादसे की वजह
- ठेकेदार पर कार्रवाई, एई निलंबित, अफसरों पर विभागीय जांच जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे में छह श्रमिकों की मौत के 76 दिन बाद भी अंतिम जवाबदेही तय नहीं हुई है। तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में बड़ी खामी नहीं मिली है। सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथिलेश कुमार के अनुसार हादसे की बड़ी वजह तेज आंधी-तूफान के दौरान निर्माण कार्य जारी रहना सामने आई है। खराब मौसम में काम रोककर श्रमिकों को सुरक्षित हटाया जाना चाहिए था।
28/29 मई की रात मोराकांदर-परसनी मार्ग पर बेतवा नदी में निर्माणाधीन पुल का पियर-5 और उससे जुड़ा सेगमेंट तेज आंधी में गिर गया था। हादसे में छह श्रमिकों की मौत हुई थी, जबकि तीन मजदूर पुल के ऊपरी हिस्से में फंस गए थे। हादसे के बाद जिला और शासन स्तर पर जांच शुरू हुई। कुरारा थाने में द शेल्टर कंपनी, निदेशक विजय प्रताप सिंह और सुपरवाइजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
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जिला जांच समिति भंग, रिपोर्ट का निष्कर्ष सामने नहीं
हादसे के बाद जिलाधिकारी अभिषेक कुमार ने जिला स्तरीय जांच समिति गठित की थी। इसमें एडीएम (नमामि गंगे) सुरेश कुमार, अधीक्षण अभियंता सुनील कांत और मुख्य परियोजना प्रबंधक वीके सेन शामिल थे। समिति ने मौके की जांच कर रिपोर्ट तैयार की थी। शासन स्तर पर तकनीकी जांच शुरू होने के बाद जिला समिति को भंग कर दिया गया। उसकी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकला, यह भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ।
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एक जून को टीम ने लिए थे नमूने
शासन स्तर से आई तीन सदस्यीय टीम ने एक जून को पियर-5 और मलबे की जांच की। टीम में संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथिलेश कुमार, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित और जनरल मैनेजर प्रेम सिंह शामिल थे। टीम ने पियर की कोर कटिंग कर कंक्रीट के नमूने लिए। सरिया, कपलर और एग्रीगेट के नमूने भी जांच के लिए लिए गए। इनकी जांच आईआईटी-बीएचयू, वाराणसी में कराई गई।
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अफसरों पर जांच, ठेकेदार पर कार्रवाई
कार्यदायी संस्था द शेल्टर कंपनी को ब्लैकलिस्ट और डिबार किया गया है। सहायक अभियंता गजेंद्र कुमार चौधरी निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार के खिलाफ भी विभागीय जांच जारी है। वह अभी निर्माण कार्य से जुड़े काम देख रहे हैं।
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जुलाई के पहले सप्ताह में ही मिल गई थी रिपोर्ट
तकनीकी जांच रिपोर्ट कब आई, इसकी स्थिति अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई। अमर उजाला से बातचीत में संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथिलेश कुमार ने बताया कि रिपोर्ट जुलाई के पहले सप्ताह में ही सेतु निगम को मिल गई थी। उनके अनुसार रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट आने के बावजूद इसका पूरा निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। छह मौतों वाले हादसे में तकनीकी जांच का परिणाम सामने आने के बाद भी अंतिम जवाबदेही तय नहीं होने से जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। मिथिलेश कुमार के अनुसार पूरे निर्माणाधीन पुल की स्टेबिलिटी जांच कराई जाएगी। अब तक हुए निर्माण की स्थायित्व जांच पूरी होने के बाद ही आगे का काम शुरू कराया जाएगा।
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76 दिन बाद भी तीन स्तरों पर जांच
तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है। जिला स्तरीय जांच समिति भंग हो चुकी है। विभागीय जांच और पुलिस विवेचना जारी है। ठेकेदार पर कार्रवाई हो चुकी है और एई निलंबित हैं। फिर भी छह मौतों की अंतिम जवाबदेही सामने नहीं आई है। खराब मौसम में काम जारी रखने की जिम्मेदारी किसकी थी, श्रमिकों की सुरक्षा क्यों सुनिश्चित नहीं हुई और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद भी उसके निष्कर्ष सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। इन सवालों का जवाब अब अंतिम कार्रवाई से ही मिलेगा।
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मजदूरों ने सुनाई पीड़ा... कहा, काम रोकने को किसी ने नहीं कहा
हादसे में बचे भूरागढ़, बांदा निवासी सुरेश कुमार रात आठ बजे ड्यूटी पर पहुंचे थे। वह पुल निर्माण में रिगर का काम करते थे। उनके अनुसार रात करीब 12 बजे हवा तेज हुई, लेकिन किसी ने काम रोकने या श्रमिकों को सुरक्षित हटने के लिए नहीं कहा। सुरेश के अनुसार मौके पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, लाइफ जैकेट और सुरक्षित आवागमन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। हादसे के समय वह पुल के ऊपरी हिस्से में फंस गए थे। उनके भतीजे सावन यादव और सभाजीत यादव की हादसे में मौत हुई है।
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मुआवजा मिला, कार्रवाई का इंतजार
मृतक गंगाचरण उर्फ सावन यादव के भाई राजीव ने बताया कि परिवार को कंपनी से 10 लाख और सरकार से चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल चुकी है। श्रम विभाग से मिलने वाली सहायता अभी नहीं मिली है। राजीव के अनुसार सावन परिवार के कमाने वाले सदस्य थे। परिवार अब जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक होने का इंतजार कर रहा है।
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वर्जन
तकनीकी जांच रिपोर्ट जुलाई के पहले सप्ताह में मिल गई थी। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कोई बड़ी कमी नहीं मिली। तेज आंधी-तूफान में काम नहीं होना चाहिए था। पूरे पुल की स्टेबिलिटी जांच के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा। - मिथिलेश कुमार, संयुक्त प्रबंध निदेशक, राज्य सेतु निगम
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वर्जन
मेरी जानकारी में जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं है। इस संबंध में विभागीय स्तर पर मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई है। -वीके सेन, मुख्य परियोजना प्रबंधक, राज्य सेतु निगम
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वर्जन
हादसे से संबंधित जांच और रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजी गई है। आगे की कार्रवाई और निर्णय शासन स्तर से होना है। विभागीय कार्रवाई की स्थिति की जानकारी भी वहीं से मिल सकेगी। - फरहान बासित, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, सेतु निगम
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वर्जन
मामले की विवेचना जारी है। नामजद पक्षों के बयान और साक्ष्य संकलन की कार्रवाई चल रही है। सुरक्षा मानकों समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। तकनीकी रिपोर्ट के अवलोकन के बाद दोष और आपराधिक दायित्व के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -यशपाल सिंह, सीओ सदर
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फोटो 14 एचएएमपी 10- हादसे के बाद बंद पड़ा बेतवा पुल का निर्माण कार्य। संवाद
- तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री की बड़ी खामी नहीं
- तेज आंधी में काम जारी रखना हादसे की वजह
- ठेकेदार पर कार्रवाई, एई निलंबित, अफसरों पर विभागीय जांच जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे में छह श्रमिकों की मौत के 76 दिन बाद भी अंतिम जवाबदेही तय नहीं हुई है। तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में बड़ी खामी नहीं मिली है। सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथिलेश कुमार के अनुसार हादसे की बड़ी वजह तेज आंधी-तूफान के दौरान निर्माण कार्य जारी रहना सामने आई है। खराब मौसम में काम रोककर श्रमिकों को सुरक्षित हटाया जाना चाहिए था।
28/29 मई की रात मोराकांदर-परसनी मार्ग पर बेतवा नदी में निर्माणाधीन पुल का पियर-5 और उससे जुड़ा सेगमेंट तेज आंधी में गिर गया था। हादसे में छह श्रमिकों की मौत हुई थी, जबकि तीन मजदूर पुल के ऊपरी हिस्से में फंस गए थे। हादसे के बाद जिला और शासन स्तर पर जांच शुरू हुई। कुरारा थाने में द शेल्टर कंपनी, निदेशक विजय प्रताप सिंह और सुपरवाइजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
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जिला जांच समिति भंग, रिपोर्ट का निष्कर्ष सामने नहीं
हादसे के बाद जिलाधिकारी अभिषेक कुमार ने जिला स्तरीय जांच समिति गठित की थी। इसमें एडीएम (नमामि गंगे) सुरेश कुमार, अधीक्षण अभियंता सुनील कांत और मुख्य परियोजना प्रबंधक वीके सेन शामिल थे। समिति ने मौके की जांच कर रिपोर्ट तैयार की थी। शासन स्तर पर तकनीकी जांच शुरू होने के बाद जिला समिति को भंग कर दिया गया। उसकी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकला, यह भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ।
एक जून को टीम ने लिए थे नमूने
शासन स्तर से आई तीन सदस्यीय टीम ने एक जून को पियर-5 और मलबे की जांच की। टीम में संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथिलेश कुमार, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित और जनरल मैनेजर प्रेम सिंह शामिल थे। टीम ने पियर की कोर कटिंग कर कंक्रीट के नमूने लिए। सरिया, कपलर और एग्रीगेट के नमूने भी जांच के लिए लिए गए। इनकी जांच आईआईटी-बीएचयू, वाराणसी में कराई गई।
अफसरों पर जांच, ठेकेदार पर कार्रवाई
कार्यदायी संस्था द शेल्टर कंपनी को ब्लैकलिस्ट और डिबार किया गया है। सहायक अभियंता गजेंद्र कुमार चौधरी निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। उप परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार के खिलाफ भी विभागीय जांच जारी है। वह अभी निर्माण कार्य से जुड़े काम देख रहे हैं।
जुलाई के पहले सप्ताह में ही मिल गई थी रिपोर्ट
तकनीकी जांच रिपोर्ट कब आई, इसकी स्थिति अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई। अमर उजाला से बातचीत में संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथिलेश कुमार ने बताया कि रिपोर्ट जुलाई के पहले सप्ताह में ही सेतु निगम को मिल गई थी। उनके अनुसार रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। रिपोर्ट आने के बावजूद इसका पूरा निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। छह मौतों वाले हादसे में तकनीकी जांच का परिणाम सामने आने के बाद भी अंतिम जवाबदेही तय नहीं होने से जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। मिथिलेश कुमार के अनुसार पूरे निर्माणाधीन पुल की स्टेबिलिटी जांच कराई जाएगी। अब तक हुए निर्माण की स्थायित्व जांच पूरी होने के बाद ही आगे का काम शुरू कराया जाएगा।
76 दिन बाद भी तीन स्तरों पर जांच
तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है। जिला स्तरीय जांच समिति भंग हो चुकी है। विभागीय जांच और पुलिस विवेचना जारी है। ठेकेदार पर कार्रवाई हो चुकी है और एई निलंबित हैं। फिर भी छह मौतों की अंतिम जवाबदेही सामने नहीं आई है। खराब मौसम में काम जारी रखने की जिम्मेदारी किसकी थी, श्रमिकों की सुरक्षा क्यों सुनिश्चित नहीं हुई और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद भी उसके निष्कर्ष सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। इन सवालों का जवाब अब अंतिम कार्रवाई से ही मिलेगा।
मजदूरों ने सुनाई पीड़ा... कहा, काम रोकने को किसी ने नहीं कहा
हादसे में बचे भूरागढ़, बांदा निवासी सुरेश कुमार रात आठ बजे ड्यूटी पर पहुंचे थे। वह पुल निर्माण में रिगर का काम करते थे। उनके अनुसार रात करीब 12 बजे हवा तेज हुई, लेकिन किसी ने काम रोकने या श्रमिकों को सुरक्षित हटने के लिए नहीं कहा। सुरेश के अनुसार मौके पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, लाइफ जैकेट और सुरक्षित आवागमन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। हादसे के समय वह पुल के ऊपरी हिस्से में फंस गए थे। उनके भतीजे सावन यादव और सभाजीत यादव की हादसे में मौत हुई है।
मुआवजा मिला, कार्रवाई का इंतजार
मृतक गंगाचरण उर्फ सावन यादव के भाई राजीव ने बताया कि परिवार को कंपनी से 10 लाख और सरकार से चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल चुकी है। श्रम विभाग से मिलने वाली सहायता अभी नहीं मिली है। राजीव के अनुसार सावन परिवार के कमाने वाले सदस्य थे। परिवार अब जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक होने का इंतजार कर रहा है।
वर्जन
तकनीकी जांच रिपोर्ट जुलाई के पहले सप्ताह में मिल गई थी। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कोई बड़ी कमी नहीं मिली। तेज आंधी-तूफान में काम नहीं होना चाहिए था। पूरे पुल की स्टेबिलिटी जांच के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा। - मिथिलेश कुमार, संयुक्त प्रबंध निदेशक, राज्य सेतु निगम
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मेरी जानकारी में जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं है। इस संबंध में विभागीय स्तर पर मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई है। -वीके सेन, मुख्य परियोजना प्रबंधक, राज्य सेतु निगम
वर्जन
हादसे से संबंधित जांच और रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजी गई है। आगे की कार्रवाई और निर्णय शासन स्तर से होना है। विभागीय कार्रवाई की स्थिति की जानकारी भी वहीं से मिल सकेगी। - फरहान बासित, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, सेतु निगम
वर्जन
मामले की विवेचना जारी है। नामजद पक्षों के बयान और साक्ष्य संकलन की कार्रवाई चल रही है। सुरक्षा मानकों समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। तकनीकी रिपोर्ट के अवलोकन के बाद दोष और आपराधिक दायित्व के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -यशपाल सिंह, सीओ सदर

फोटो 14 एचएएमपी 10- हादसे के बाद बंद पड़ा बेतवा पुल का निर्माण कार्य। संवाद