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Hamirpur News: प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर, टाइगर स्टेट की साख पर दाग
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Wed, 22 Apr 2026 11:57 PM IST
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फोटो - 11 जंगल में मिला बाघ का शव। स्त्रोत : विभाग
- फोटो : 1
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करतल। मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने वाले वन विभाग के दावों की पोल पन्ना टाइगर रिजर्व की एक घटना ने खोल दी है। गंगऊ अभयारण्य क्षेत्र में एक वयस्क नर बाघ का शव पिछले 20-25 दिनों से सड़ता रहा और प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह शव मुख्य मार्ग से मात्र 100 मीटर की दूरी पर पड़ा था, जो वन विभाग की गश्त और हाईटेक निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह घटना गंगऊ अभयारण्य के कटरिया बीट (वन कक्ष क्रमांक P-278) में सामने आई, जहां मंगलवार को एक 5 से 6 वर्ष के नर बाघ का कंकाल बरामद हुआ। अधिकारियों के अनुसार बाघ की मौत लगभग 20-25 दिन पहले हुई थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में जब मुख्य मार्ग से रोज अधिकारियों की गाड़ियां और गश्ती दल गुजरते थे तो क्या किसी को भी सड़े हुए शव की दुर्गंध नहीं आई। क्या वन विभाग की गश्त केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित है।
पन्ना टाइगर रिजर्व का हाईटेक निगरानी तंत्र इतना सुस्त साबित हुआ कि उसे एक बाघ की मौत का पता तब चला जब एक ग्रामीण ने जंगल में कंकाल देखा। यह घटना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या पार्क के बीट गार्ड और जिम्मेदार अधिकारियों ने पिछले 25 दिनों में उस इलाके का दौरा तक नहीं किया। यदि दौरा किया भी तो 100 मीटर दूर पड़े बाघ के शव को वे क्यों नहीं देख पाए।
फिलहाल स्पेशल टास्क फोर्स की टीम मामले की जांच कर रही है और इसे शिकार या प्राकृतिक मौत के एंगल से देखा जा रहा है। हालांकि, मौत का कारण चाहे जो भी हो असली मुद्दा प्रबंधन की घोर लापरवाही है। यदि समय रहते ध्यान दिया जाता तो शायद मौत से जुड़े सबूत बेहतर स्थिति में होते।
पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने बताया कि टाइगर के कंकाल मिलने पर स्पेशल टीम बनाकर जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई होगी।
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यह घटना गंगऊ अभयारण्य के कटरिया बीट (वन कक्ष क्रमांक P-278) में सामने आई, जहां मंगलवार को एक 5 से 6 वर्ष के नर बाघ का कंकाल बरामद हुआ। अधिकारियों के अनुसार बाघ की मौत लगभग 20-25 दिन पहले हुई थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में जब मुख्य मार्ग से रोज अधिकारियों की गाड़ियां और गश्ती दल गुजरते थे तो क्या किसी को भी सड़े हुए शव की दुर्गंध नहीं आई। क्या वन विभाग की गश्त केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित है।
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पन्ना टाइगर रिजर्व का हाईटेक निगरानी तंत्र इतना सुस्त साबित हुआ कि उसे एक बाघ की मौत का पता तब चला जब एक ग्रामीण ने जंगल में कंकाल देखा। यह घटना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है। क्या पार्क के बीट गार्ड और जिम्मेदार अधिकारियों ने पिछले 25 दिनों में उस इलाके का दौरा तक नहीं किया। यदि दौरा किया भी तो 100 मीटर दूर पड़े बाघ के शव को वे क्यों नहीं देख पाए।
फिलहाल स्पेशल टास्क फोर्स की टीम मामले की जांच कर रही है और इसे शिकार या प्राकृतिक मौत के एंगल से देखा जा रहा है। हालांकि, मौत का कारण चाहे जो भी हो असली मुद्दा प्रबंधन की घोर लापरवाही है। यदि समय रहते ध्यान दिया जाता तो शायद मौत से जुड़े सबूत बेहतर स्थिति में होते।
पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने बताया कि टाइगर के कंकाल मिलने पर स्पेशल टीम बनाकर जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई होगी।

फोटो - 11 जंगल में मिला बाघ का शव। स्त्रोत : विभाग- फोटो : 1

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