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Hardoi News: मजाक बन कर रह गईं परिषदीय स्कूल की परीक्षाएं
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फोटो 20 : मल्लावां के गंगारामपुर प्राथमिक विद्यालय में चटाई पर बैठकर परीक्षा देते छात्र। संवाद
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मल्लावां। परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षा मजाक बन कर रह गई है। बृहस्पतिवार को क्षेत्र के कुछ विद्यालयों की पड़ताल में यह तथ्य सामने आए हैं। परीक्षा के नाम पर मनमानी और अनियमितताएं देखने को मिलीं।
परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। वैसे तो शासन ने ही व्यवस्था दी है कि किसी भी विद्यार्थी को फेल न किया जाए लेकिन बच्चों के शैक्षिक स्तर को परखने के लिए वार्षिक परीक्षा ली जा रही है। जिम्मेदारों ने परीक्षा को मजाक बना दिया है। कई विद्यालयों में परीक्षा की व्यवस्थाओं को देखा गया तो व्यवस्था कम अव्यवस्था अधिक नजर आई।
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केस एक
ब्लॉक मल्लावां कबीरपुर प्राथमिक विद्यालय
समय दोपहर 1:14 बजे
विद्यालय के बरामदे में तीन छात्र खेल रहे थे। स्कूल की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका संगीता वर्मा, सहायक अध्यापिका मीना देवी मौजूद नहीं थीं। विद्यालय में 31 के सापेक्ष नौ बच्चे मौजूद थे। शिक्षामित्र ने बताया कि कुल 29 बच्चे परीक्षा देने आए थे। इनमें 20 की इंचार्ज प्रधानाध्यापक ने दोपहर करीब 12 बजे छुट्टी कर दी थी।
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केस दो
संविलियन विद्यालय सुनासीनाथ
समय दोपहर 1:40 बजे
उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत 34 में 32 बच्चे कला विषय की परीक्षा दे रहे थे। प्राथमिक स्कूल में पंजीकृत 46 के सापेक्ष 42 बच्चे चटाई पर बैठ कर परीक्षा दे रहे थे। इंचार्ज प्रधानाध्यापिका माया देवी ने बताया कि बेंच-डेस्क उपलब्ध नहीं हैं। बीईओ को पत्र लिखा जा चुका है।
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केस तीन
प्राथमिक विद्यालय गंगारामपुर
समय 2:05 बजे
विद्यालय में 75 के सापेक्ष 62 बच्चे चटाई पर बैठकर कला विषय की परीक्षा देते मिले। इंचार्ज अध्यापिका निरुपमा देवी ने बताया कि वह चार साल से लगातार बीईओ को पत्राचार कर रही हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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विद्यालयों में एचसीएल फाउंडेशन की ओर से फर्नीचर उपलब्ध कराया गया था। जिन विद्यालयों में फर्नीचर नहीं पहुंचा है वहां फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा। फर्नीचर न होने से विद्यार्थियों को टाट-पट्टी पर बैठना पड़ रहा है। -राजेश राम, खंड शिक्षा अधिकारी
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परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। वैसे तो शासन ने ही व्यवस्था दी है कि किसी भी विद्यार्थी को फेल न किया जाए लेकिन बच्चों के शैक्षिक स्तर को परखने के लिए वार्षिक परीक्षा ली जा रही है। जिम्मेदारों ने परीक्षा को मजाक बना दिया है। कई विद्यालयों में परीक्षा की व्यवस्थाओं को देखा गया तो व्यवस्था कम अव्यवस्था अधिक नजर आई।
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केस एक
ब्लॉक मल्लावां कबीरपुर प्राथमिक विद्यालय
समय दोपहर 1:14 बजे
विद्यालय के बरामदे में तीन छात्र खेल रहे थे। स्कूल की इंचार्ज प्रधानाध्यापिका संगीता वर्मा, सहायक अध्यापिका मीना देवी मौजूद नहीं थीं। विद्यालय में 31 के सापेक्ष नौ बच्चे मौजूद थे। शिक्षामित्र ने बताया कि कुल 29 बच्चे परीक्षा देने आए थे। इनमें 20 की इंचार्ज प्रधानाध्यापक ने दोपहर करीब 12 बजे छुट्टी कर दी थी।
केस दो
संविलियन विद्यालय सुनासीनाथ
समय दोपहर 1:40 बजे
उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत 34 में 32 बच्चे कला विषय की परीक्षा दे रहे थे। प्राथमिक स्कूल में पंजीकृत 46 के सापेक्ष 42 बच्चे चटाई पर बैठ कर परीक्षा दे रहे थे। इंचार्ज प्रधानाध्यापिका माया देवी ने बताया कि बेंच-डेस्क उपलब्ध नहीं हैं। बीईओ को पत्र लिखा जा चुका है।
केस तीन
प्राथमिक विद्यालय गंगारामपुर
समय 2:05 बजे
विद्यालय में 75 के सापेक्ष 62 बच्चे चटाई पर बैठकर कला विषय की परीक्षा देते मिले। इंचार्ज अध्यापिका निरुपमा देवी ने बताया कि वह चार साल से लगातार बीईओ को पत्राचार कर रही हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विद्यालयों में एचसीएल फाउंडेशन की ओर से फर्नीचर उपलब्ध कराया गया था। जिन विद्यालयों में फर्नीचर नहीं पहुंचा है वहां फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा। फर्नीचर न होने से विद्यार्थियों को टाट-पट्टी पर बैठना पड़ रहा है। -राजेश राम, खंड शिक्षा अधिकारी

फोटो 20 : मल्लावां के गंगारामपुर प्राथमिक विद्यालय में चटाई पर बैठकर परीक्षा देते छात्र। संवाद

फोटो 20 : मल्लावां के गंगारामपुर प्राथमिक विद्यालय में चटाई पर बैठकर परीक्षा देते छात्र। संवाद