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Hardoi News: एजुकेटर भर्ती में भ्रष्टाचार की आशंका में डीएम ने बैठक में ही जिला समन्वयक को पकड़वाया
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हरदोई। अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) एजुकेटर की नियुक्ति के लिए बीती 12 जून को हुई परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों के अभिलेखों का सत्यापन ही नहीं कराया गया। भ्रष्टाचार की आशंका को देखते हुए डीएम अनुनय झा ने बेसिक शिक्षा विभाग के एक लिपिक को कलक्ट्रेट में बैठक के दौरान ही पुलिस के हवाले करा दिया। इससे इतर गत वर्ष जनपद में तैनात किए गए 65 शिक्षकों की नियुक्ति पत्रावली न मिलने के मामले में भी प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश डीएम ने दिए हैं।
ईसीसीई के एजुकेटर पद पर भर्तियां होनी हैं। जिले में 210 पद हैं। पद के सापेक्ष तीन गुना लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। इसी बीच जिलाधिकारी को कुछ गंभीर शिकायतें मिलीं। इस पर उन्होंने साक्षात्कार से पहले लिखित परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। बीती 12 जून को राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में बनाए गए केंद्रों पर परीक्षा हुई। डीएम ने बृहस्पतिवार शाम कलक्ट्रेट स्थित विवेकानंद सभागार में भर्ती प्रक्रिया के संबंध में बैठक बुलाई थी। बैठक में पत्रावली के परीक्षण के दौरान पता चला कि अभ्यर्थियों के अभिलेखों के सत्यापन ही नहीं कराए गए हैं। यह कार्य परीक्षा के दिन ही होना था। इस पर डीएम ने सख्त नाराजगी जताई। इसके पीछे उन्होंने भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए बेसिक शिक्षा विभाग में संबंधित कार्य देख रहे जिला समन्वयक को पुलिस बुलाकर कोतवाली भेज दिया।
जिलाधिकारी के इस निर्णय से मौके पर मौजूद अधिकारी सकते में आ गए। इसी बीच जिलाधिकारी ने गत वर्ष 12400 शिक्षक भर्ती के तहत जनपद में नियुक्त शिक्षकों की पत्रावली भी मांगी। मौके पर मौजूद वरिष्ठ लिपिक श्रीनिवास मिश्र ने उक्त पत्रावली विभागीय लिपिक अनुपम मिश्रा के पास होने की जानकारी अधिकारियों को दी जबकि अनुपम मिश्रा ने इससे इन्कार कर दिया। चर्चा है की बैठक के बीच ही वरिष्ठ लिपिक ने कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी के कहने पर उन्होंने पत्रावली अनुपम मिश्रा को दी थी। डीएम ने पत्रावली गायब होने पर प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। अपर जिला अधिकारी प्रफुल्ल त्रिपाठी ने बताया कि वरिष्ठ लिपिक श्रीनिवास मिश्र ने अनुपम मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए शिकायत शहर कोतवाली में दे दी है।
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ईसीसीई के एजुकेटर पद पर भर्तियां होनी हैं। जिले में 210 पद हैं। पद के सापेक्ष तीन गुना लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। इसी बीच जिलाधिकारी को कुछ गंभीर शिकायतें मिलीं। इस पर उन्होंने साक्षात्कार से पहले लिखित परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। बीती 12 जून को राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में बनाए गए केंद्रों पर परीक्षा हुई। डीएम ने बृहस्पतिवार शाम कलक्ट्रेट स्थित विवेकानंद सभागार में भर्ती प्रक्रिया के संबंध में बैठक बुलाई थी। बैठक में पत्रावली के परीक्षण के दौरान पता चला कि अभ्यर्थियों के अभिलेखों के सत्यापन ही नहीं कराए गए हैं। यह कार्य परीक्षा के दिन ही होना था। इस पर डीएम ने सख्त नाराजगी जताई। इसके पीछे उन्होंने भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए बेसिक शिक्षा विभाग में संबंधित कार्य देख रहे जिला समन्वयक को पुलिस बुलाकर कोतवाली भेज दिया।
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जिलाधिकारी के इस निर्णय से मौके पर मौजूद अधिकारी सकते में आ गए। इसी बीच जिलाधिकारी ने गत वर्ष 12400 शिक्षक भर्ती के तहत जनपद में नियुक्त शिक्षकों की पत्रावली भी मांगी। मौके पर मौजूद वरिष्ठ लिपिक श्रीनिवास मिश्र ने उक्त पत्रावली विभागीय लिपिक अनुपम मिश्रा के पास होने की जानकारी अधिकारियों को दी जबकि अनुपम मिश्रा ने इससे इन्कार कर दिया। चर्चा है की बैठक के बीच ही वरिष्ठ लिपिक ने कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी के कहने पर उन्होंने पत्रावली अनुपम मिश्रा को दी थी। डीएम ने पत्रावली गायब होने पर प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। अपर जिला अधिकारी प्रफुल्ल त्रिपाठी ने बताया कि वरिष्ठ लिपिक श्रीनिवास मिश्र ने अनुपम मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए शिकायत शहर कोतवाली में दे दी है।