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Hathras News: 11.56 लाख लोगों को मिला आभा का कवच, हाथरस अव्वल
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 25 Jan 2026 03:00 AM IST
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आभा आईडी में जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान पाया है। पात्र लाभार्थियों में से अब तक 11,56,376 लोगों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है, जबकि विभाग का लक्ष्य कुल 16 लाख आईडी बनाने का है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिसमें आशा, एएनएम और सीएचओ शामिल हैं, ई-कवच पोर्टल के माध्यम से युद्ध स्तर पर डेटा फीडिंग कर रही है।आभा एप के माध्यम से स्वयं भी लोग अपनी आईडी जनरेट कर रहे हैं, लेकिन इसका डाटा विभाग के पास नहीं है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इस मोबाइल एप्लीकेशन डाटा, जल्द ही ई-कवच से जोड़ा जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ई-कवच से आभा आईडी बनाने में जिले को प्रथम स्थान मिला है। लक्ष्य के सापेक्ष 73 फीसदी लोगों की आईडी बन चुकी है। आगरा में हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण ने भी इस उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की सराहना की है।
यह है डिजिटल मिशन
आभा आईडी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का प्रथम चरण है, जो नागरिक के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखेगा। इसके अगले चरण में मरीजों को एप के जरिये पर्चा बनवाने, टोकन, ओपीडी चयन, परामर्श, दवा व जांच कराने की सहूलियत मिलेगी। लोगों को पुराने पर्चे और रिपोर्ट आदि सुरक्षित रखने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। परामर्शदाता ही अपने पोर्टल पर केवल आभा आईडी के 14 अंकों के जरिये मरीज का स्वास्थ्य इतिहास जान सकेगा।
अगले चरण में टोकन व्यवस्था शुरू
प्रथम चरण के बाद अब एप्लीकेशन से अस्पतालों में पर्चा बनाने की सुविधा शुरू हो गई है। जिला अस्पताल में क्यूआर कोड चस्पा कर दिए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर एप डाउनलोड किया जा सकता है और इस एप से टोकन प्राप्त कर लाइन के झंझट से बच सकते हैं।
डिजिटल मिशन में आभा आईडी के फायदे
-आभा एक 14 अंकों का डिजिटल नंबर है, जो कि डिजिटल मिशन का पहला पायदान है।
-पैन नंबर जैसे वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखता है, वैसे ही यह आभा नंबर स्वास्थ्य की जानकारी स्टोर रखेगा।
-ई-कवच के जरिये स्वास्थ्य विभाग के लिए मरीजों की निगरानी आसान होगी, जिससे नीतियां बनाना सुलभ होगा।
-देश के किसी भी अस्पताल में चिकित्सक मरीज की सहमति से उसका पिछला रिकॉर्ड एक क्लिक में देख सकेंगे।
-इससे इलाज में सटीकता आएगी और समय की बचत होगी।
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जिले में 73 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर हम प्रथम स्थान पर हैं। ई-कवच पोर्टल के माध्यम से डेटा को सुव्यवस्थित किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि शत-प्रतिशत आबादी को डिजिटल हेल्थ मिशन से जोड़कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाएं।
-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिसमें आशा, एएनएम और सीएचओ शामिल हैं, ई-कवच पोर्टल के माध्यम से युद्ध स्तर पर डेटा फीडिंग कर रही है।आभा एप के माध्यम से स्वयं भी लोग अपनी आईडी जनरेट कर रहे हैं, लेकिन इसका डाटा विभाग के पास नहीं है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इस मोबाइल एप्लीकेशन डाटा, जल्द ही ई-कवच से जोड़ा जाएगा।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ई-कवच से आभा आईडी बनाने में जिले को प्रथम स्थान मिला है। लक्ष्य के सापेक्ष 73 फीसदी लोगों की आईडी बन चुकी है। आगरा में हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण ने भी इस उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की सराहना की है।
यह है डिजिटल मिशन
आभा आईडी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का प्रथम चरण है, जो नागरिक के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखेगा। इसके अगले चरण में मरीजों को एप के जरिये पर्चा बनवाने, टोकन, ओपीडी चयन, परामर्श, दवा व जांच कराने की सहूलियत मिलेगी। लोगों को पुराने पर्चे और रिपोर्ट आदि सुरक्षित रखने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। परामर्शदाता ही अपने पोर्टल पर केवल आभा आईडी के 14 अंकों के जरिये मरीज का स्वास्थ्य इतिहास जान सकेगा।
अगले चरण में टोकन व्यवस्था शुरू
प्रथम चरण के बाद अब एप्लीकेशन से अस्पतालों में पर्चा बनाने की सुविधा शुरू हो गई है। जिला अस्पताल में क्यूआर कोड चस्पा कर दिए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर एप डाउनलोड किया जा सकता है और इस एप से टोकन प्राप्त कर लाइन के झंझट से बच सकते हैं।
डिजिटल मिशन में आभा आईडी के फायदे
-आभा एक 14 अंकों का डिजिटल नंबर है, जो कि डिजिटल मिशन का पहला पायदान है।
-पैन नंबर जैसे वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखता है, वैसे ही यह आभा नंबर स्वास्थ्य की जानकारी स्टोर रखेगा।
-ई-कवच के जरिये स्वास्थ्य विभाग के लिए मरीजों की निगरानी आसान होगी, जिससे नीतियां बनाना सुलभ होगा।
-देश के किसी भी अस्पताल में चिकित्सक मरीज की सहमति से उसका पिछला रिकॉर्ड एक क्लिक में देख सकेंगे।
-इससे इलाज में सटीकता आएगी और समय की बचत होगी।
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जिले में 73 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर हम प्रथम स्थान पर हैं। ई-कवच पोर्टल के माध्यम से डेटा को सुव्यवस्थित किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि शत-प्रतिशत आबादी को डिजिटल हेल्थ मिशन से जोड़कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाएं।
-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ
