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Hathras News: 70 की उम्र में पढ़ने की ललक, घूंघट की ओट में महिलाओं ने दी परीक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 16 Mar 2026 02:53 AM IST
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सादाबाद में परीक्षा देतीं महिलाएं व बुजुर्ग। संवाद
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द्वितीय मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक मूल्यांकन परीक्षा के दौरान सादाबाद के कई परीक्षा केंद्रों पर ग्रामीण क्षेत्रों से आई महिला प्रतिभागियों ने घूंघट की आड़ में परीक्षा दी। सुबह घर का काम छोड़कर परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने पहुंचीं।
शिक्षा के प्रति उनकी लगन और उत्साह देखने लायक रहा। परीक्षा दे रहीं इन महिलाओं ने बताया कि पढ़ना-लिखना सीखकर वे अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने के साथ-साथ दैनिक जीवन के कार्य भी बेहतर तरीके से कर सकेंगी।
शासन के दिशा-निर्देशों के क्रम में रविवार को असाक्षरों को साक्षर बनाए जाने के लिए जिले के 411 परिषदीय विद्यालयों में द्वितीय मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा ऑफलाइन मोड में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस दौरान जिलेभर के चिन्हित प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा यह परीक्षा उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत द्वितीय साक्षरता मूल्यांकन के रूप में आयोजित कराई गई। परीक्षा में चिन्हित 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के असाक्षर व्यक्तियों ने भाग लेकर पढ़ना-लिखना और संख्यात्मक ज्ञान से संबंधित अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया। परीक्षा संपन्न होने के बाद प्रतिभागियों की प्रश्न एवं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी किया गया।
मूल्यांकन के पश्चात प्राप्त अंकों के आधार पर परीक्षा परिणाम दर्ज किए गए। सफल प्रतिभागियों को पास तथा जिन प्रतिभागियों को और अभ्यास की आवश्यकता है उन्हें नीड इम्प्रूवमेंट की श्रेणी में रखा गया।
बीएसए स्वाती भारती ने बताया कि इस प्रकार की परीक्षाओं का उद्देश्य वयस्कों को साक्षर बनाना और उन्हें पढ़ने-लिखने के साथ-साथ संख्यात्मक ज्ञान से जोड़ना है, ताकि वे दैनिक जीवन के कार्यों को आत्मविश्वास के साथ कर सकें। कार्यक्रम के माध्यम से जिले में निरक्षरता को कम करने और अधिक से अधिक लोगों को साक्षर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। परीक्षा का आयोजन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया।
- बचपन में घर की जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई नहीं कर सके। अब सरकार द्वारा चलाए जा रहे साक्षरता अभियान से पढ़ना-लिखना सीखने का अवसर मिला है, जिससे उन्हें काफी खुशी है।
- मंजू देवी, मिढावली
पहली बार ऐसी परीक्षा में बैठी हैं। अब थोड़ा-बहुत पढ़ना-लिखना सीख लिया है, जिससे उन्हें अपने नाम लिखने और जरूरी काम समझने में आसानी होती है।
- सरोज देवी, मिढावली
- इस परीक्षा से आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे बैंक, दवाई और अन्य जरूरी चीजों से जुड़े कामों की भी समझ बढ़ेगी।
- गुड्डी देवी, नगला काठ
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शिक्षा के प्रति उनकी लगन और उत्साह देखने लायक रहा। परीक्षा दे रहीं इन महिलाओं ने बताया कि पढ़ना-लिखना सीखकर वे अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने के साथ-साथ दैनिक जीवन के कार्य भी बेहतर तरीके से कर सकेंगी।
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शासन के दिशा-निर्देशों के क्रम में रविवार को असाक्षरों को साक्षर बनाए जाने के लिए जिले के 411 परिषदीय विद्यालयों में द्वितीय मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक मूल्यांकन परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा ऑफलाइन मोड में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस दौरान जिलेभर के चिन्हित प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा यह परीक्षा उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत द्वितीय साक्षरता मूल्यांकन के रूप में आयोजित कराई गई। परीक्षा में चिन्हित 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के असाक्षर व्यक्तियों ने भाग लेकर पढ़ना-लिखना और संख्यात्मक ज्ञान से संबंधित अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया। परीक्षा संपन्न होने के बाद प्रतिभागियों की प्रश्न एवं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी किया गया।
मूल्यांकन के पश्चात प्राप्त अंकों के आधार पर परीक्षा परिणाम दर्ज किए गए। सफल प्रतिभागियों को पास तथा जिन प्रतिभागियों को और अभ्यास की आवश्यकता है उन्हें नीड इम्प्रूवमेंट की श्रेणी में रखा गया।
बीएसए स्वाती भारती ने बताया कि इस प्रकार की परीक्षाओं का उद्देश्य वयस्कों को साक्षर बनाना और उन्हें पढ़ने-लिखने के साथ-साथ संख्यात्मक ज्ञान से जोड़ना है, ताकि वे दैनिक जीवन के कार्यों को आत्मविश्वास के साथ कर सकें। कार्यक्रम के माध्यम से जिले में निरक्षरता को कम करने और अधिक से अधिक लोगों को साक्षर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। परीक्षा का आयोजन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया।
- बचपन में घर की जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई नहीं कर सके। अब सरकार द्वारा चलाए जा रहे साक्षरता अभियान से पढ़ना-लिखना सीखने का अवसर मिला है, जिससे उन्हें काफी खुशी है।
- मंजू देवी, मिढावली
पहली बार ऐसी परीक्षा में बैठी हैं। अब थोड़ा-बहुत पढ़ना-लिखना सीख लिया है, जिससे उन्हें अपने नाम लिखने और जरूरी काम समझने में आसानी होती है।
- सरोज देवी, मिढावली
- इस परीक्षा से आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे बैंक, दवाई और अन्य जरूरी चीजों से जुड़े कामों की भी समझ बढ़ेगी।
- गुड्डी देवी, नगला काठ

सादाबाद में परीक्षा देतीं महिलाएं व बुजुर्ग। संवाद