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हाथरस: दाऊजी मेले के 16 में से आठ झूले नहीं मिले संचालन योग्य, लगी रोक, मानक पूरे होने तक रहेंगे बंद

Fri, 18 Sep 2026 12:00 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 18 Sep 2026 12:00 PM IST
सार

मेला परिसर में मनोरंजन के लिए तीन अलग-अलग सेक्टरों में कुल 16 बड़े झूले स्थापित किए गए हैं। इनमें रेवती मैया पंडाल क्षेत्र में सात झूले, दंगल पंडाल के पास पांच और पार्किंग ग्राउंड में चार बड़े झूले लगाए गए हैं। इन झूलों में जाॅइंट व्हील (आसमानी झूला), ब्रेक डांस, कोलंबस नाव, टोरा-टोरा और ड्रैगन ट्रेन शामिल हैं।

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Eight swings of Dauji Mela closed
दाऊजी मेला परिसर में लगे झूले - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस के लोक निर्माण विभाग की तकनीकी टीम द्वारा किए गए सघन निरीक्षण और ट्रायल रन के दौरान दाऊजी मेले में लगे कुल 16 बड़े झूलों में से आठ संचालन योग्य नहीं पाए गए। तकनीकी कमियों और ट्रायल न हो पाने के कारण विभाग ने इन झूलों का अनापत्ति प्रमाणपत्र रोक दिया है, जबकि सफल ट्रायल वाले शेष आठ झूलों को संचालन की हरी झंडी दे दी गई है।

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मेले के मुख्य दिन यानी देव छठ पर दूर-दराज से दाऊजी महाराज के दर्शन करने और मेला घूमने पहुंचे हजारों लोगों, खासकर बच्चों व युवाओं को आधे झूले बंद मिलने से निराशा का सामना करना पड़ा। मेलार्थी पूरे उत्साह के साथ झूला परिसर पहुंचे थे, लेकिन कई प्रमुख और रोमांचक झूलों के पहिए थमे देख उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
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ऊपर से स्थिति यह है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस साल मेला परिसर में बड़े झूलों की संख्या पहले से ही करीब 30 फीसदी कम है। ऐसे में कुल 16 में से भी केवल आठ झूलों को ही एनओसी मिल पाने से मेले का रोमांच आधा रह गया है।

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तीन प्रमुख स्थलों पर लगे हैं 16 झूले
मेला परिसर में मनोरंजन के लिए तीन अलग-अलग सेक्टरों में कुल 16 बड़े झूले स्थापित किए गए हैं। इनमें रेवती मैया पंडाल क्षेत्र में सात झूले, दंगल पंडाल के पास पांच और पार्किंग ग्राउंड में चार बड़े झूले लगाए गए हैं। इन झूलों में जाॅइंट व्हील (आसमानी झूला), ब्रेक डांस, कोलंबस नाव, टोरा-टोरा और ड्रैगन ट्रेन शामिल हैं।

दोपहर दो बजे हुआ भौतिक सत्यापन
जांच में झूले तैयार न मिलने के बाद बलदेव छठ के दिन दोपहर करीब दो बजे झूला ठेकेदार व संचालक लोनिवि की तकनीकी टीम को ट्रायल कराने पहुंचे। अधिशासी अभियंता के निर्देशन में पहुंची तकनीकी टीम ने मौके पर एक-एक झूले के फाउंडेशन, नट-बोल्ट की कसावट, मोटर व गियर सिस्टम, विद्युत वायरिंग और आपातकालीन ब्रेक की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान आठ झूलों का ट्रायल पूरी तरह सफल रहा, जिसके बाद लोनिवि ने उन्हें सशर्त एनओसी जारी कर दी।

मानक पूरे होने तक बंद रहेंगे आठ झूले
लोनिवि विभाग के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि विभाग की तकनीकी टीम के इंजीनियर मौका मुआयना कर रहे हैं। स्पष्ट कर दिया है कि जब तक बाकी बचे आठ झूलों की सभी तकनीकी तौर पर दुरुस्त नहीं किया जाता और इनका सफल ट्रायल नहीं करा लेते, तब तक इनका संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। बच्चों और महिलाओं व आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी सूरत में बिना एनओसी के झूलों का संचालन नहीं करने दिया जाएगा।

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