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Hathras News: महाराष्ट्र के तरबूज का स्वाद चखेंगे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 23 Mar 2026 01:12 AM IST
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आगरा रोड पर बिकते महाराष्ट्र के तरबूज। संवाद
- फोटो : Samvad
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गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर के आगरा रोड पर महाराष्ट्र से आए तरबूजों की बहार नजर आने लगी है। स्थानीय फसल आने से करीब दो माह पहले ही ये अगेती तरबूज बाजार में पहुंच गए हैं, जिससे लोगों को समय से पहले ही मीठे फल का स्वाद मिल रहा है।
आगरा रोड पर तीन-चार स्थानों पर बड़े पैमाने पर तरबूज के ढेर लगाकर बिक्री की जा रही है। विक्रेता सीधे महाराष्ट्र के किसानों से खरीदकर तरबूज लाते हैं, जिससे लागत कम पड़ती है और यह 30 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। वहीं ठेलों पर यही तरबूज 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
विक्रेता मंजीत निवासी बड़ा अहियापुर ने बताया कि महाराष्ट्र में तरबूज की फसल जल्दी तैयार हो जाती है। खासकर ईद के आसपास। इसी वजह से वे तीन-चार लोग मिलकर डीसीएम से सीधे वहां से तरबूज खरीदकर लाते हैं। ट्रांसपोर्ट के जरिये मंगाने पर खर्च अधिक पड़ता है। ग्राहकों का कहना है कि महाराष्ट्र के तरबूज का स्वाद अलग ही होता है।
आगरा रोड निवासी पदम सिंह ने बताया कि इस तरबूज का छिलका गहरा हरा और अंदर का गूदा लाल व मीठा होता है। स्थानीय तरबूज की तुलना में इसमें खपटा भी कम होता है, जिससे खाने में अधिक स्वादिष्ट लगता है। गर्मी बढ़ने के साथ ही इन अगेती तरबूजों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है और लोग सड़क किनारे लग रही दुकानों से इनकी खरीदारी कर रहे हैं।
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आगरा रोड पर तीन-चार स्थानों पर बड़े पैमाने पर तरबूज के ढेर लगाकर बिक्री की जा रही है। विक्रेता सीधे महाराष्ट्र के किसानों से खरीदकर तरबूज लाते हैं, जिससे लागत कम पड़ती है और यह 30 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। वहीं ठेलों पर यही तरबूज 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
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विक्रेता मंजीत निवासी बड़ा अहियापुर ने बताया कि महाराष्ट्र में तरबूज की फसल जल्दी तैयार हो जाती है। खासकर ईद के आसपास। इसी वजह से वे तीन-चार लोग मिलकर डीसीएम से सीधे वहां से तरबूज खरीदकर लाते हैं। ट्रांसपोर्ट के जरिये मंगाने पर खर्च अधिक पड़ता है। ग्राहकों का कहना है कि महाराष्ट्र के तरबूज का स्वाद अलग ही होता है।
आगरा रोड निवासी पदम सिंह ने बताया कि इस तरबूज का छिलका गहरा हरा और अंदर का गूदा लाल व मीठा होता है। स्थानीय तरबूज की तुलना में इसमें खपटा भी कम होता है, जिससे खाने में अधिक स्वादिष्ट लगता है। गर्मी बढ़ने के साथ ही इन अगेती तरबूजों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है और लोग सड़क किनारे लग रही दुकानों से इनकी खरीदारी कर रहे हैं।