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Hathras News: स्वगणना की जानकारी जनगणना पोर्टल पर नहीं हो रही लोड.. दोबारा पूछने पड़ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 25 May 2026 02:39 AM IST
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जनगणना करने पहुंचे प्रगणक। संवाद
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स्वगणना के दौरान जिले के जागरूक नागरिकों ने ऑनलाइन सारी जानकारियां भरीं थीं। इसमें उन्हें काफी परेशानी का सामना भी करना पड़ा था। लेकिन, अब जनगणना के दौरान उन्हें एक बार फिर से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, जनगणना पोर्टल एसईआईडी को सर्च ही नहीं कर पा रहा है, इसके चलते प्रगणकों को तपती धूप में दोबारा खड़े होकर वही सारे लंबे-चौड़े सवाल पूछने पड़ रहे हैं।
इसके अलावा सैटेलाइट मैपिंग में हुई चूक और सुबह के वक्त बंद बाजारों ने प्रगणकों की परेशानी को दोगुना कर दिया है। एडीएम प्रशांत तिवारी ने बताया कि जो भी त्रुटियां या समस्या आ रही हैं, उनका समाधान तत्काल किया जा रहा है। मैपिंग में कुछ दिक्कत थी, उसे दूर करा दी गई है।
ग्राउंड जीरो पर हालात
रविवार को जब संवाद की टीम ने शहर के विभिन्न वार्डों और बाजारों का रुख किया, तो डिजिटल सिस्टम की पोल खुलती नजर आई। पोर्टल में गलती के कारण प्रगणकों और जनता दोनों में खीझ देखने को मिली।
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केस-1: विद्यापति नगर में लोड नहीं हुआ नंबर
मुरसान गेट क्षेत्र के मोहल्ला विद्यापति नगर की जागेश्वर गली नंबर एक में प्रगणक सोनाली शर्मा जनगणना करने पहुंचीं। उन्होंने स्थानीय निवासी मालती देवी (पत्नी स्वर्गीय प्रेम चंद्र) से जानकारी मांगी, तो मालती देवी ने अपने बेटे प्रदीप गुप्ता को बुलाया।
प्रदीप ने बताया कि सजग नागरिक होने के नाते वे पहले ही स्वगणना कर चुके हैं और उन्होंने अपना एसईआईडी नंबर प्रगणक को सौंप दिया। लेकिन, जैसे ही सोनाली शर्मा ने उस नंबर को सॉफ्टवेयर में फीड किया, वह लोड ही नहीं हुआ। मजबूरन उन्हें दोबारा नए सिरे से पूरी जानकारी भरनी पड़ी।
केस-2: अशोक नगर में सॉफ्टवेयर ने खड़े किए हाथ
आवास विकास कॉलोनी के अशोक नगर में भी रविवार सुबह ठीक यही स्थिति देखने को मिली। प्रगणक सुरेश चंद्र सुबह आठ बजे सुनील कुमार बंसल के घर पहुंचे। बंसल परिवार ने बताया कि उनकी स्वगणना पूरी हो चुकी है।
जब सुरेश चंद्र ने मोबाइल एप के जरिए उनका एसईआईडी नंबर डाला, तो सॉफ्टवेयर ने डेटा उठाने से मना कर दिया। कुछ ही दूरी पर रहने वाले आनंद खंडेलवाल के घर पर भी यही वाकया दोहराया गया। उनकी भी स्वगणना आईडी सॉफ्टवेयर में नॉट लोडेड दिखाती रही।
केस-3: बंद बाजारों ने बढ़ाई सिरदर्दी, धूप ने छुड़ाए पसीने
तकनीकी दिक्कतों के अलावा प्रगणकों को व्यावहारिक समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। रविवार सुबह जब प्रगणक श्वेता सिंह और सीमा दिवाकर नजिहाई बाजार में डेटा इकट्ठा करने पहुंचीं, तो सुबह 11 बजे तक दुकानें पूरी तरह बंद मिलीं।
यही हाल लोहट बाजार का भी रहा, जहां प्रगणक चितरंजन सिंह और राम किशन को दुकानें बंद होने के कारण बैरंग लौटना पड़ा। इंतजार करने के बाद दोपहर को वे गणना करने पहुंचे। दोपहर होते-होते तेज धूप और लू के थपेड़ों ने प्रगणकों को बेहाल कर दिया।
जनगणना में आ रहीं समस्याएं :
प्रगणकों और विभागीय सूत्रों से बातचीत के बाद तीन बड़ी समस्याएं सामने आई हैं।
डेटा सिंकिंग की समस्या :
नागरिकों द्वारा पोर्टल पर सेल्फ-वेरिफिकेशन करने के बाद भी वह डेटा प्रगणकों के मोबाइल एप्लीकेशन या मुख्य सर्वर पर समय से अपडेट नहीं हो रहा है।
सैटेलाइट मैपिंग में चूक : जनगणना के लिए जो डिजिटल और सैटेलाइट मैप तैयार किए गए हैं, उनमें गलियों और मकानों के नंबरों में भारी अंतर है। इस चूक के कारण प्रगणकों को सही घर या लोकेशन ट्रेस (खोजने) करने में घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है।
बाजारों का समय :
व्यावसायिक क्षेत्रों में सुबह जल्दी सर्वे करने पर दुकानें बंद मिलती हैं और दोपहर में व्यापारी व्यस्त हो जाते हैं या धूप के कारण फील्ड में काम करना दूभर हो जाता है।
प्रगणकों का कहना है
स्वगणना का प्रावधान इसलिए था ताकि हमारा समय बचे। लेकिन अब हमें दोहरी मेहनत करनी पड़ रही है। एक तो पोर्टल नंबर नहीं उठाता, ऊपर से जनता को यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि जब वे एक बार फॉर्म भर चुके हैं, तो हम दोबारा क्यों पूछ रहे हैं।
स्वगणना में चूक
प्रगणकों के अनुसार एसईआईडी के मिलान के पीछे स्वगणना में सैटेलाइट मैपिंग में हुई चूक भी है। मैपिंग में लोगों ने जो लेटीट्यूड-लांगीट्यूड फीड किए हैं, वे उनके एप में दर्शाए जा रही मैपिंग से भिन्न है। इसलिए उन्हें दोबारा पूरी प्रक्रिया करनी पड़ रही है।
35 हजार लोगों ने की है स्वगणना
जिले में सात मई से स्वगणना का अभियान शुरू हुआ था। 21 मई तक चले अभियान में 35 हजार लोगों ने स्वगणना की, जबकि लक्ष्य 15 हजार का था।
इसके अलावा सैटेलाइट मैपिंग में हुई चूक और सुबह के वक्त बंद बाजारों ने प्रगणकों की परेशानी को दोगुना कर दिया है। एडीएम प्रशांत तिवारी ने बताया कि जो भी त्रुटियां या समस्या आ रही हैं, उनका समाधान तत्काल किया जा रहा है। मैपिंग में कुछ दिक्कत थी, उसे दूर करा दी गई है।
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ग्राउंड जीरो पर हालात
रविवार को जब संवाद की टीम ने शहर के विभिन्न वार्डों और बाजारों का रुख किया, तो डिजिटल सिस्टम की पोल खुलती नजर आई। पोर्टल में गलती के कारण प्रगणकों और जनता दोनों में खीझ देखने को मिली।
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केस-1: विद्यापति नगर में लोड नहीं हुआ नंबर
मुरसान गेट क्षेत्र के मोहल्ला विद्यापति नगर की जागेश्वर गली नंबर एक में प्रगणक सोनाली शर्मा जनगणना करने पहुंचीं। उन्होंने स्थानीय निवासी मालती देवी (पत्नी स्वर्गीय प्रेम चंद्र) से जानकारी मांगी, तो मालती देवी ने अपने बेटे प्रदीप गुप्ता को बुलाया।
प्रदीप ने बताया कि सजग नागरिक होने के नाते वे पहले ही स्वगणना कर चुके हैं और उन्होंने अपना एसईआईडी नंबर प्रगणक को सौंप दिया। लेकिन, जैसे ही सोनाली शर्मा ने उस नंबर को सॉफ्टवेयर में फीड किया, वह लोड ही नहीं हुआ। मजबूरन उन्हें दोबारा नए सिरे से पूरी जानकारी भरनी पड़ी।
केस-2: अशोक नगर में सॉफ्टवेयर ने खड़े किए हाथ
आवास विकास कॉलोनी के अशोक नगर में भी रविवार सुबह ठीक यही स्थिति देखने को मिली। प्रगणक सुरेश चंद्र सुबह आठ बजे सुनील कुमार बंसल के घर पहुंचे। बंसल परिवार ने बताया कि उनकी स्वगणना पूरी हो चुकी है।
जब सुरेश चंद्र ने मोबाइल एप के जरिए उनका एसईआईडी नंबर डाला, तो सॉफ्टवेयर ने डेटा उठाने से मना कर दिया। कुछ ही दूरी पर रहने वाले आनंद खंडेलवाल के घर पर भी यही वाकया दोहराया गया। उनकी भी स्वगणना आईडी सॉफ्टवेयर में नॉट लोडेड दिखाती रही।
केस-3: बंद बाजारों ने बढ़ाई सिरदर्दी, धूप ने छुड़ाए पसीने
तकनीकी दिक्कतों के अलावा प्रगणकों को व्यावहारिक समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। रविवार सुबह जब प्रगणक श्वेता सिंह और सीमा दिवाकर नजिहाई बाजार में डेटा इकट्ठा करने पहुंचीं, तो सुबह 11 बजे तक दुकानें पूरी तरह बंद मिलीं।
यही हाल लोहट बाजार का भी रहा, जहां प्रगणक चितरंजन सिंह और राम किशन को दुकानें बंद होने के कारण बैरंग लौटना पड़ा। इंतजार करने के बाद दोपहर को वे गणना करने पहुंचे। दोपहर होते-होते तेज धूप और लू के थपेड़ों ने प्रगणकों को बेहाल कर दिया।
जनगणना में आ रहीं समस्याएं :
प्रगणकों और विभागीय सूत्रों से बातचीत के बाद तीन बड़ी समस्याएं सामने आई हैं।
डेटा सिंकिंग की समस्या :
नागरिकों द्वारा पोर्टल पर सेल्फ-वेरिफिकेशन करने के बाद भी वह डेटा प्रगणकों के मोबाइल एप्लीकेशन या मुख्य सर्वर पर समय से अपडेट नहीं हो रहा है।
सैटेलाइट मैपिंग में चूक : जनगणना के लिए जो डिजिटल और सैटेलाइट मैप तैयार किए गए हैं, उनमें गलियों और मकानों के नंबरों में भारी अंतर है। इस चूक के कारण प्रगणकों को सही घर या लोकेशन ट्रेस (खोजने) करने में घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है।
बाजारों का समय :
व्यावसायिक क्षेत्रों में सुबह जल्दी सर्वे करने पर दुकानें बंद मिलती हैं और दोपहर में व्यापारी व्यस्त हो जाते हैं या धूप के कारण फील्ड में काम करना दूभर हो जाता है।
प्रगणकों का कहना है
स्वगणना का प्रावधान इसलिए था ताकि हमारा समय बचे। लेकिन अब हमें दोहरी मेहनत करनी पड़ रही है। एक तो पोर्टल नंबर नहीं उठाता, ऊपर से जनता को यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि जब वे एक बार फॉर्म भर चुके हैं, तो हम दोबारा क्यों पूछ रहे हैं।
स्वगणना में चूक
प्रगणकों के अनुसार एसईआईडी के मिलान के पीछे स्वगणना में सैटेलाइट मैपिंग में हुई चूक भी है। मैपिंग में लोगों ने जो लेटीट्यूड-लांगीट्यूड फीड किए हैं, वे उनके एप में दर्शाए जा रही मैपिंग से भिन्न है। इसलिए उन्हें दोबारा पूरी प्रक्रिया करनी पड़ रही है।
35 हजार लोगों ने की है स्वगणना
जिले में सात मई से स्वगणना का अभियान शुरू हुआ था। 21 मई तक चले अभियान में 35 हजार लोगों ने स्वगणना की, जबकि लक्ष्य 15 हजार का था।

जनगणना करने पहुंचे प्रगणक। संवाद