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Hathras News: मंडी में पसरा सन्नाटा, नहीं हो सकी फसल की तौल

Sun, 28 Jun 2026 01:20 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sun, 28 Jun 2026 01:20 AM IST
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Silence prevails at the mandi; crop weighing could not take place.
मंडी समिति की आढ़त पर बंद पड़ी तौल। संवाद - फोटो : Samvad
मंडी में मारपीट, फायरिंग व हंगामे का खामियाजा दूर-दराज के गांवों से अपनी मक्का और बाजरा की फसल बेचने आए किसानों को भुगतना पड़ा। सुबह हुई इस वारदात के बाद मंडी में पूरी तरह से सन्नाटा और तनाव पसरा रहा, जिससे फसल की तौल नहीं हो सकी।
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दोपहर तक जब फसल की तुलाई और खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी, तो किसानों का सब्र जवाब दे गया। जिन किसानों की मक्का व बाजरा की फसल गाड़ियों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ही लदी हुई थी, वे मंडी की अव्यवस्था को देखते हुए अपनी उपज वापस लेकर घरों को लौट गए।
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सबसे बुरी स्थिति उन किसानों की रही, जिन्होंने अपनी फसल को मंडी के फड़ पर उतार दिया था। फसल जमीन पर होने के कारण वे न तो उसे वापस ले जा सके और न ही उसकी तौल हो सकी। ऐसे किसान भीषण गर्मी और उमस के बीच शाम तक बेबसी में मंडी परिसर में ही परेशान खड़े रहे।
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सुरक्षा और व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

मंडी समिति परिसर में सरेआम हुई इस मारपीट और कथित फायरिंग की घटना ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। किसानों का कहना है कि मंडी प्रशासन और स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी न होने के कारण आढ़ती और मजदूरों के आपसी विवाद का खामियाजा हमेशा किसानों को आर्थिक और मानसिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है।

मैं गांव बैरुआ (सादाबाद) से मंडी में मक्का बेचने के लिए आया था, लेकिन यहां आते ही आढ़तियों और पल्लेदारों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान फायरिंग भी हुई। विवाद के बाद तुलाई का काम पूरी तरह ठप पड़ा है और कोई खरीद नहीं की गई। सुबह से शाम हो गई है, हम बेहद परेशान हैं और हमारा समय बर्बाद हो रहा है।


-सुनील कुमार, किसान

मंडी समिति में बाजरा बेचने आया था, ताकि दो पैसे हाथ में आएं, लेकिन मंडी में हुए झगड़े और हंगामे के चलते यहां कोई सुनने वाला नहीं है। शाम ढलने को है, लेकिन बाजरे की एक बोरी तक की तौल नहीं हो सकी है। किसान हर तरफ से केवल पिसने के लिए मजबूर है।

-विशंभर सिंह, पीड़ित किसान (गांव भूड़री, मुरसान)
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