{"_id":"6a402b8a1ca7ed5ce503c1db","slug":"yogi-ji-outsiders-have-walked-away-with-the-plots-we-fought-for-for-years-hathras-news-c-56-1-sali1016-150536-2026-06-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: योगी जी! जिन प्लॉटों के लिए हम वर्षों लड़े, उन्हें बाहरी ले उड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: योगी जी! जिन प्लॉटों के लिए हम वर्षों लड़े, उन्हें बाहरी ले उड़े
Sun, 28 Jun 2026 01:29 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:29 AM IST
विज्ञापन
सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र का नक्शा। संवाद
- फोटो : Samvad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रशांत भारती
हाथरस। मुख्यमंत्री के हाथरस आगमन से पहले जिले के उद्यमियों की टीस उभर आई है। उनका आरोप है कि सलेमपुर में विकसित हो रहे नए औद्योगिक आस्थान के जिन प्लॉटों को हासिल करने के लिए उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया, आज उनका बड़ा हिस्सा बाहरी निवेशकों को आवंटित किया जा रहा है।
दी हाथरस मर्चेंट्स चैंबर के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गोयल के अनुसार इस जमीन का एक लंबा और संघर्षपूर्ण इतिहास रहा है। 70 के दशक में यह जमीन जेके समूह और बाद में मोहन मेकिंस समूह को दी गई थी, लेकिन वहां कोई उद्योग स्थापित नहीं हो सका।
हाथरस की बहुसंख्यक औद्योगिक इकाइयां आज घने शहरी इलाकों में सिमटी हुई हैं और पुराना 25 एकड़ का औद्योगिक आस्थान पूरी तरह भर चुका है। नए उद्योगों और विस्तारीकरण के लिए स्थानीय उद्यमियों ने साल 2007-08 से जिला और मंडल स्तर पर उद्योग बंधु की बैठकों में निरंतर पैरवी की।
विज्ञापन
लंबी कानूनी लड़ाइयों और स्थानीय संगठन के प्रयासों के बाद ही मोहन मेकिंस से यह विशाल भूमि मुक्त हो सकी। आज जब यहां नया औद्योगिक क्षेत्र आकार ले रहा है, तो स्थानीय उद्यमियों को ही दरकिनार किया जा रहा है। संवाद
बिडिंग (बोली) के जाल में उलझे स्थानीय उद्यमी
सलेमपुर के इस मास्टर प्लान में 432 औद्योगिक प्लॉटों में से पांच बड़े प्लॉट पहले ही शासन स्तर से आवंटित किए जा चुके हैं, जो कुल औद्योगिक क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा (6,96,347.19 वर्ग मीटर) घेरते हैं। अब बचे हुए 427 प्लॉटों को लेकर यूपीसीडा के अफसर स्थानीय उद्यमियों को कोई स्पष्ट जानकारी या नोटिफिकेशन उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। उद्यमियों को भनक लगी है कि अफसर इन बचे हुए प्लॉटों को बिडिंग (खुलने वाली बोली) के जरिये आवंटित करने की तैयारी में हैं।
सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र का गणित
कुल नेट एरिया : 19,45,489.96 वर्ग मीटर
इंडस्ट्रीज के लिए आरक्षित प्लॉट : 432 प्लॉट (कुल क्षेत्रफल : 12,06,636.16 वर्ग मीटर)
शासन स्तर से पहले ही आवंटित प्लॉट : पांच बड़े प्लॉट (ए-1 से ए-5), जिनका क्षेत्रफल 6,96,347.19 वर्ग मीटर है।
शेष बचे प्लॉट : 427 प्लॉट (इनका आवंटन अभी होना बाकी है)।
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में साइन हुए थे 245 एमओयू
हाथरस। यूपी इन्वेस्टर्स समिट 2018 के तहत निवेश के प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए जुलाई 2019 में लखनऊ में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हुई थी, जिसमें 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स लांच किए गए थे। हाथरस से 245 उद्यमियों ने एमओयू हस्ताक्षर किए थे, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट के लिए लंबे इंतजार और अनिश्चिता के कारण 48 उद्यामियों ने शहर से बाहर अपनी व्यवस्था अनुसार उद्योग स्थापित कर लिए। बाकी उद्योग किसी न किसी तरह बस गुजर-बसर कर रहे हैं। 136 इकाइयां अभी भी ऐसी हैं, जिन्हें भूमि की आवश्यकता है ही और आज भी प्रदेश सरकारी की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।
6.96 लाख वर्ग मीटर जमीन बाहरियों को मिली
जिन उद्यमियों ने एमओयू हस्ताक्षर किए थे, उन्हें 13,76,783 वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता है। इनके द्वारा लगभग 3,648 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना है, जिससे 15240 लोगों को रोजगार मिलेगा। हैरानी की बात है कि यूपीसीडा ने केवल उद्योगों के लिए 12.06 लाख वर्ग जगह रखी है, जिसमें से 6.96 लाख वर्ग मीटर से अधिक जगह बाहरी उद्योगों को दी जा चुकी है।
136 उद्यमी तो वर्तमान में जमीन लेने के लिए इंतजार में खड़े हैं। सरकार को चाहिए कि पहले स्थानीय उद्योगों को अवसर दे, जिससे वे शहर से बाहर उद्योग लगा सकें। इसके बाद बाहरी उद्योगों को वरीयता दी जाए। बिडिंग में स्थानीय उद्योग प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेंगे। दिल्ली नोएडा के ही उद्योग सारी जगह घेर लेंगे।
-देवेंद्र मोहता, उपाध्यक्ष हाथरस औद्योगिक आस्थान सहकारी समिति
शहर में कई प्रकार की एनओसी के कारण उद्योग लगाना मुश्किल हो रहा है। जो उद्यमी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग लगाना चाहते हैं, उन्हें प्लॉट नहीं मिल रहे। हालात ये हैं कि प्रदेश स्तरीय अधिकारी कुछ कह रहे हैं और स्थानीय अधिकारी कुछ और। कोई साफ नहीं कर रहा कि किसी तरह आवेदन किए जाने हैं।
-अजय शर्मा, एमडी, वीआर अथर्ववेद फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड
विज्ञापन
हाथरस। मुख्यमंत्री के हाथरस आगमन से पहले जिले के उद्यमियों की टीस उभर आई है। उनका आरोप है कि सलेमपुर में विकसित हो रहे नए औद्योगिक आस्थान के जिन प्लॉटों को हासिल करने के लिए उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया, आज उनका बड़ा हिस्सा बाहरी निवेशकों को आवंटित किया जा रहा है।
दी हाथरस मर्चेंट्स चैंबर के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गोयल के अनुसार इस जमीन का एक लंबा और संघर्षपूर्ण इतिहास रहा है। 70 के दशक में यह जमीन जेके समूह और बाद में मोहन मेकिंस समूह को दी गई थी, लेकिन वहां कोई उद्योग स्थापित नहीं हो सका।
विज्ञापन
हाथरस की बहुसंख्यक औद्योगिक इकाइयां आज घने शहरी इलाकों में सिमटी हुई हैं और पुराना 25 एकड़ का औद्योगिक आस्थान पूरी तरह भर चुका है। नए उद्योगों और विस्तारीकरण के लिए स्थानीय उद्यमियों ने साल 2007-08 से जिला और मंडल स्तर पर उद्योग बंधु की बैठकों में निरंतर पैरवी की।
विज्ञापन
लंबी कानूनी लड़ाइयों और स्थानीय संगठन के प्रयासों के बाद ही मोहन मेकिंस से यह विशाल भूमि मुक्त हो सकी। आज जब यहां नया औद्योगिक क्षेत्र आकार ले रहा है, तो स्थानीय उद्यमियों को ही दरकिनार किया जा रहा है। संवाद
बिडिंग (बोली) के जाल में उलझे स्थानीय उद्यमी
सलेमपुर के इस मास्टर प्लान में 432 औद्योगिक प्लॉटों में से पांच बड़े प्लॉट पहले ही शासन स्तर से आवंटित किए जा चुके हैं, जो कुल औद्योगिक क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा (6,96,347.19 वर्ग मीटर) घेरते हैं। अब बचे हुए 427 प्लॉटों को लेकर यूपीसीडा के अफसर स्थानीय उद्यमियों को कोई स्पष्ट जानकारी या नोटिफिकेशन उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। उद्यमियों को भनक लगी है कि अफसर इन बचे हुए प्लॉटों को बिडिंग (खुलने वाली बोली) के जरिये आवंटित करने की तैयारी में हैं।
सलेमपुर औद्योगिक क्षेत्र का गणित
कुल नेट एरिया : 19,45,489.96 वर्ग मीटर
इंडस्ट्रीज के लिए आरक्षित प्लॉट : 432 प्लॉट (कुल क्षेत्रफल : 12,06,636.16 वर्ग मीटर)
शासन स्तर से पहले ही आवंटित प्लॉट : पांच बड़े प्लॉट (ए-1 से ए-5), जिनका क्षेत्रफल 6,96,347.19 वर्ग मीटर है।
शेष बचे प्लॉट : 427 प्लॉट (इनका आवंटन अभी होना बाकी है)।
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में साइन हुए थे 245 एमओयू
हाथरस। यूपी इन्वेस्टर्स समिट 2018 के तहत निवेश के प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए जुलाई 2019 में लखनऊ में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हुई थी, जिसमें 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स लांच किए गए थे। हाथरस से 245 उद्यमियों ने एमओयू हस्ताक्षर किए थे, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट के लिए लंबे इंतजार और अनिश्चिता के कारण 48 उद्यामियों ने शहर से बाहर अपनी व्यवस्था अनुसार उद्योग स्थापित कर लिए। बाकी उद्योग किसी न किसी तरह बस गुजर-बसर कर रहे हैं। 136 इकाइयां अभी भी ऐसी हैं, जिन्हें भूमि की आवश्यकता है ही और आज भी प्रदेश सरकारी की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।
6.96 लाख वर्ग मीटर जमीन बाहरियों को मिली
जिन उद्यमियों ने एमओयू हस्ताक्षर किए थे, उन्हें 13,76,783 वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता है। इनके द्वारा लगभग 3,648 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना है, जिससे 15240 लोगों को रोजगार मिलेगा। हैरानी की बात है कि यूपीसीडा ने केवल उद्योगों के लिए 12.06 लाख वर्ग जगह रखी है, जिसमें से 6.96 लाख वर्ग मीटर से अधिक जगह बाहरी उद्योगों को दी जा चुकी है।
136 उद्यमी तो वर्तमान में जमीन लेने के लिए इंतजार में खड़े हैं। सरकार को चाहिए कि पहले स्थानीय उद्योगों को अवसर दे, जिससे वे शहर से बाहर उद्योग लगा सकें। इसके बाद बाहरी उद्योगों को वरीयता दी जाए। बिडिंग में स्थानीय उद्योग प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेंगे। दिल्ली नोएडा के ही उद्योग सारी जगह घेर लेंगे।
-देवेंद्र मोहता, उपाध्यक्ष हाथरस औद्योगिक आस्थान सहकारी समिति
शहर में कई प्रकार की एनओसी के कारण उद्योग लगाना मुश्किल हो रहा है। जो उद्यमी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग लगाना चाहते हैं, उन्हें प्लॉट नहीं मिल रहे। हालात ये हैं कि प्रदेश स्तरीय अधिकारी कुछ कह रहे हैं और स्थानीय अधिकारी कुछ और। कोई साफ नहीं कर रहा कि किसी तरह आवेदन किए जाने हैं।
-अजय शर्मा, एमडी, वीआर अथर्ववेद फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड