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Jalaun News: 42 डिग्री की तपिश में जले गुलाब, मुरझाए बागवान
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फोटो - 27 गुलाब के फूलों को बर्फ में लगाकर रखे दुकानदार। संवाद
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उरई। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पहुंचते ही फूलों की खेती पर सीधा असर दिखने लगा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण गुलाब जैसे नाजुक फूलों की खुशबू लगभग खत्म हो गई है और उनका आकार भी छोटा हो गया है। हालात यह हैं कि खेतों में फूल मुरझाने लगे हैं, जिससे बागवान को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
डकोर ब्लॉक के कुठौदा, मुहम्मदाबाद, खरका सहित कई गांवों में फूलों की खेती करने वाले बगवान परेशान हैं। बागवान रमेश सैनी बताते हैं कि गुलाब के लिए आदर्श तापमान 20- 25 डिग्री होना चाहिए, लेकिन अभी तापमान 42 डिग्री तक पहुंच रहा है। इससे फूलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो रही है।
बागवान कपिल के अनुसार पहले जहां एक दिन में 30- 40 किलो गुलाब निकलता था, अब वह घटकर 5- 10 किलो रह गया है। सिंचाई का खर्च भी बढ़ गया है। पहले सप्ताह में एक बार पानी देना पड़ता था, अब हर दो दिन में देना पड़ रहा है।
उधर, व्यापारियों की भी मुश्किलें कम नहीं हैं। फूल व्यापारी सुरेश माली बताते हैं कि इतनी गर्मी में गुलाब के फूल जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए उन्हें बर्फ में लपेटकर रखना पड़ रहा है ताकि पत्तियां न झड़ें। स्थानीय स्तर पर फूलों की कमी के चलते अब लखनऊ और कानपुर से महंगे दामों पर फूल मंगाने पड़ रहे हैं। सहालग के चलते फूलों के दामों में भी तेजी आई है। गुलाब, गेंदा, बेला और अन्य फूलों के रेट बढ़ गए हैं।
किसानों का कहना है कि गुलाब और गेंदा की फसल लगभग चौपट हो चुकी है, जबकि नौरंगी फूल से कुछ उम्मीद बनी हुई है। फिलहाल किसान घाटे के बावजूद फसल बचाने में जुटे हैं।
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डकोर ब्लॉक के कुठौदा, मुहम्मदाबाद, खरका सहित कई गांवों में फूलों की खेती करने वाले बगवान परेशान हैं। बागवान रमेश सैनी बताते हैं कि गुलाब के लिए आदर्श तापमान 20- 25 डिग्री होना चाहिए, लेकिन अभी तापमान 42 डिग्री तक पहुंच रहा है। इससे फूलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो रही है।
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बागवान कपिल के अनुसार पहले जहां एक दिन में 30- 40 किलो गुलाब निकलता था, अब वह घटकर 5- 10 किलो रह गया है। सिंचाई का खर्च भी बढ़ गया है। पहले सप्ताह में एक बार पानी देना पड़ता था, अब हर दो दिन में देना पड़ रहा है।
उधर, व्यापारियों की भी मुश्किलें कम नहीं हैं। फूल व्यापारी सुरेश माली बताते हैं कि इतनी गर्मी में गुलाब के फूल जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए उन्हें बर्फ में लपेटकर रखना पड़ रहा है ताकि पत्तियां न झड़ें। स्थानीय स्तर पर फूलों की कमी के चलते अब लखनऊ और कानपुर से महंगे दामों पर फूल मंगाने पड़ रहे हैं। सहालग के चलते फूलों के दामों में भी तेजी आई है। गुलाब, गेंदा, बेला और अन्य फूलों के रेट बढ़ गए हैं।
किसानों का कहना है कि गुलाब और गेंदा की फसल लगभग चौपट हो चुकी है, जबकि नौरंगी फूल से कुछ उम्मीद बनी हुई है। फिलहाल किसान घाटे के बावजूद फसल बचाने में जुटे हैं।

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