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Jalaun News: एग्रीमेंट की राशि नहीं दी, अब चुकाने होंगे दो लाख रुपये
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उरई। एग्रीमेंट करने के बाद भी आवासीय प्लाट के रुपये न देने वाले को कोर्ट ने दो लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। छह साल पुराने मामले में पूर्व सैनिक ने कोर्ट में वाद दायर किया था।
आवासीय प्लाट का मुहायदा करने के बाद रुपये न देने पर वादी ने कोर्ट में छह वर्ष पहले वाद दायर किया था। जिसमें उसने आरोप लगाया था कि प्रतिवादी उसके दो लाख रुपये नहीं दे रहा है। इस पर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश ने दो माह के भीतर दो लाख रुपये वादी को देने के आदेश दिए हैं।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नया पटेल नगर निवासी शिववीर सिंह ने कोर्ट में वाद दायर किया। इसमें बताया था कि मोहल्ले में ही उसका आवासीय मकान है। 9 अक्तूबर 2015 को उसने मोहल्ले के ही अशोक कुमार को अपना मकान लिखित इकरारनामा में साढ़े तीन लाख रुपये में पंजीकृत किया था। इसके एवज में उसे अशोक कुमार ने तीन लाख रुपये दिए थे। बाकी पचास हजार रुपये एक वर्ष में देने व बैनामा कराने को कहा था।
आरोप लगाया था कि इसके बाद उसने बहाना बनाकर टालना शुरू कर दिया। समय पूरा हो जाने पर उसने नोटिस भी दिया था लेकिन अशोक ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। 25 अक्तूबर 2019 को उसने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में वाद दायर किया। कोर्ट में चले ट्रायल के बाद सोमवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश ने मामले की सुनवाई करते हुए एक पक्षीय आदेश सुनाया। इसमें प्रतिवादी को दो माह के अंदर दो लाख रुपये भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नया पटेल नगर निवासी शिववीर सिंह ने कोर्ट में वाद दायर किया। इसमें बताया था कि मोहल्ले में ही उसका आवासीय मकान है। 9 अक्तूबर 2015 को उसने मोहल्ले के ही अशोक कुमार को अपना मकान लिखित इकरारनामा में साढ़े तीन लाख रुपये में पंजीकृत किया था। इसके एवज में उसे अशोक कुमार ने तीन लाख रुपये दिए थे। बाकी पचास हजार रुपये एक वर्ष में देने व बैनामा कराने को कहा था।
आरोप लगाया था कि इसके बाद उसने बहाना बनाकर टालना शुरू कर दिया। समय पूरा हो जाने पर उसने नोटिस भी दिया था लेकिन अशोक ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। 25 अक्तूबर 2019 को उसने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में वाद दायर किया। कोर्ट में चले ट्रायल के बाद सोमवार को सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रत्यूष प्रकाश ने मामले की सुनवाई करते हुए एक पक्षीय आदेश सुनाया। इसमें प्रतिवादी को दो माह के अंदर दो लाख रुपये भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं।