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Jalaun News: निर्माणाधीन बंधौली उपकेंद्र पूरा होने से मिलेगी भरपूर बिजली
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सुधीर राना/आसिफ खान
मुहम्मदाबाद। ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चली आ रही बिजली समस्या के समाधान की उम्मीद अब बंधौली में बन रहे 220 केवी विद्युत उपकेंद्र से जुड़ गई है। उपकेंद्र के चालू होने के बाद डकोर ब्लॉक सहित आसपास के करीब 30 गांवों को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलने की संभावना है। निर्माणाधीन उपकेंद्र के दो से तीन माह में तैयार होने की उम्मीद है।
अब तक कोटरा और कुसमिलिया पावर हाउस को कालपी सड़क स्थित 132 केवी उपकेंद्र से लगभग 27-28 किलोमीटर लंबी लाइन के माध्यम से बिजली मिलती रही है। लंबी दूरी के चलते आए दिन फॉल्ट, तार टूटने और खंभे गिरने की समस्याएं बनी रहती थीं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित रहती थी। नया उपकेंद्र शुरू होने के बाद यह दूरी घटकर महज आठ से 10 किलोमीटर रह जाएगी जिससे तकनीकी खराबियां कम होंगी और सप्लाई अधिक सुचारू हो सकेगी।
करीब 89.04 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस उपकेंद्र का निर्माण तीन मार्च 2024 को शुरू हुआ था और इसे 15 अगस्त 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। परियोजना का कार्य पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के तहत पीसी रेड्डी एंड कंपनी, तिरुपति द्वारा कराया जा रहा है। हालांकि, निर्माण की धीमी गति के चलते अभी तक कार्य अधूरा है और इसके चालू होने में करीब दो से तीन महीने और लगने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इस उपकेंद्र को गुढ़ा स्थित सोलर प्लांट से बिजली आपूर्ति मिलेगी। यहां से कोटरा और कुसमिलिया पावर हाउस को सीधे सप्लाई दी जाएगी और अतिरिक्त बिजली उरई शहर को भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि शहरी क्षेत्र को भी राहत मिलेगी। वहीं, ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर उम्मीद के साथ नाराजगी भी देखने को मिल रही है। (संवाद)
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मुहम्मदाबाद। ग्रामीण अंचलों में वर्षों से चली आ रही बिजली समस्या के समाधान की उम्मीद अब बंधौली में बन रहे 220 केवी विद्युत उपकेंद्र से जुड़ गई है। उपकेंद्र के चालू होने के बाद डकोर ब्लॉक सहित आसपास के करीब 30 गांवों को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलने की संभावना है। निर्माणाधीन उपकेंद्र के दो से तीन माह में तैयार होने की उम्मीद है।
अब तक कोटरा और कुसमिलिया पावर हाउस को कालपी सड़क स्थित 132 केवी उपकेंद्र से लगभग 27-28 किलोमीटर लंबी लाइन के माध्यम से बिजली मिलती रही है। लंबी दूरी के चलते आए दिन फॉल्ट, तार टूटने और खंभे गिरने की समस्याएं बनी रहती थीं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित रहती थी। नया उपकेंद्र शुरू होने के बाद यह दूरी घटकर महज आठ से 10 किलोमीटर रह जाएगी जिससे तकनीकी खराबियां कम होंगी और सप्लाई अधिक सुचारू हो सकेगी।
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करीब 89.04 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस उपकेंद्र का निर्माण तीन मार्च 2024 को शुरू हुआ था और इसे 15 अगस्त 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। परियोजना का कार्य पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के तहत पीसी रेड्डी एंड कंपनी, तिरुपति द्वारा कराया जा रहा है। हालांकि, निर्माण की धीमी गति के चलते अभी तक कार्य अधूरा है और इसके चालू होने में करीब दो से तीन महीने और लगने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, इस उपकेंद्र को गुढ़ा स्थित सोलर प्लांट से बिजली आपूर्ति मिलेगी। यहां से कोटरा और कुसमिलिया पावर हाउस को सीधे सप्लाई दी जाएगी और अतिरिक्त बिजली उरई शहर को भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि शहरी क्षेत्र को भी राहत मिलेगी। वहीं, ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर उम्मीद के साथ नाराजगी भी देखने को मिल रही है। (संवाद)

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