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Jalaun News: पूर्व एसडीएम की बढ़ीं मुश्किलें, अग्रिम जमानत हो चुकी खारिज
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कालपी। 18 साल पहले हुए केरोसिन घोटाले में गिरफ्तार किए गए दो डीलरों को जेल भेजे जाने के बाद अब मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन एसडीएम इंद्रपाल उत्तम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सत्र न्यायालय से उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है, जिसके बाद गिरफ्तारी की आशंका और प्रबल हो गई है।
आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने हाल ही में मामले में नामजद डीलर राकेश पुरवार और मीनू गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद जांच का फोकस अब उन अधिकारियों की भूमिका पर है, जिनके कार्यकाल में सूखा प्रभावित क्षेत्र की जनता के लिए आया 30650 लीटर केरोसिन तेल कथित रूप से खुले बाजार में बेच दिया गया था।
मामले की जांच के दौरान तत्कालीन एसडीएम इंद्रपाल उत्तम और तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक अनिल कुमार की भूमिका भी सामने आई थी। जांच एजेंसी ने दोनों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन कार्रवाई आगे बढ़ने से पहले ही एसडीएम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत की शरण ली थी। हालांकि सत्र न्यायालय ने मई में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बताया जा रहा है कि अब उन्होंने राहत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
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वहीं तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक अनिल कुमार के खिलाफ अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल सकी है। जांच अधिकारी मोहम्मद शाकिर के अनुसार शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2007 में सामने आए इस बहुचर्चित घोटाले की शिकायत तत्कालीन विधायक छोटे सिंह चौहान ने शासन से की थी। इसके बाद वर्ष 2009 में जांच शुरू हुई थी। करीब 18 वर्ष बाद मामले में गिरफ्तारी होने से अब अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने हाल ही में मामले में नामजद डीलर राकेश पुरवार और मीनू गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद जांच का फोकस अब उन अधिकारियों की भूमिका पर है, जिनके कार्यकाल में सूखा प्रभावित क्षेत्र की जनता के लिए आया 30650 लीटर केरोसिन तेल कथित रूप से खुले बाजार में बेच दिया गया था।
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मामले की जांच के दौरान तत्कालीन एसडीएम इंद्रपाल उत्तम और तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक अनिल कुमार की भूमिका भी सामने आई थी। जांच एजेंसी ने दोनों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन कार्रवाई आगे बढ़ने से पहले ही एसडीएम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत की शरण ली थी। हालांकि सत्र न्यायालय ने मई में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। बताया जा रहा है कि अब उन्होंने राहत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
वहीं तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक अनिल कुमार के खिलाफ अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल सकी है। जांच अधिकारी मोहम्मद शाकिर के अनुसार शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद उनके विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2007 में सामने आए इस बहुचर्चित घोटाले की शिकायत तत्कालीन विधायक छोटे सिंह चौहान ने शासन से की थी। इसके बाद वर्ष 2009 में जांच शुरू हुई थी। करीब 18 वर्ष बाद मामले में गिरफ्तारी होने से अब अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।