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जानकी संस्कार के इतिहास को जन जन तक पहुंचाना जरूरी:सूर्य प्रकाश टोंक
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अंतर्राष्ट्रीय नारी महाकुम्भ में मौजूद महिलाएं। आयोजक
- फोटो : सांकेतिक
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जलालपुर। विशाल भारत संस्थान एवं राज राजेश्वर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में बड़कू हनुमान आश्रम, पुरेव में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय नारी महाकुम्भ का छठवां दिन महान नारियों के शौर्य पूर्ण इतिहास को समर्पित किया गया।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय संघचालक सूर्य प्रकाश टोंक ने कहा कि माता जानकी का प्रभाव भारत के प्रत्येक नारी पर है, जो माता जानकी को अपना आदर्श मानती है उनका परिवार बेहतर चल रहा है । आज परिवारों के टूटने का कारण घर में माता जानकी का संस्कार न होना है। अब हमें मिलकर जानकी संस्कार के इतिहास को जन जन तक पहुंचाना है।
नई दिल्ली से आए प्रसिद्ध गऊ कथा वाचक मो फ़ैज़ खान ने कहा कि भारत की संस्कृति को महान बनाने में नारियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। प्रेम देने में माता जानकी का कोई उदाहरण नहीं है। तीनो माताओं के प्रति उनका वही आदर और प्रेम था जो अपनी माँ के प्रति था। हिमाचल प्रदेश के कुलू मनाली से आए श्रीमहंत राम मोहन दास रामायणी महाराज ने कहा कि माता जानकी के इतिहास ने नारी की प्रकृति को सम्मान प्रदान किया है। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राम पंथ के पंथाचार्य डॉ राजीव ने कहा कि आज समूचे देश में जो परिवार बचा है वह माता जानकी की वजह से ही बचा है।
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इसलिए दुनियाँ के इतिहास से अलग मातृ शक्ति को भारत में सम्मान दिया गया है। महाकुंभ के दौरान मातु जानकी कथा के छठें दिन बलकदेवाचार्य महाराज ने माता जानकी के शक्ति का वर्णन किया।इस अवसर पर बड़कू हनुमान जी के पीठाधीश्वर प्रभु रामदास , आभा उपाध्याय , डॉ कवीन्द्र नारायण अफरोज पांडेय , संदीप मिश्र , डॉ अर्चना भारतवंशी , प्रोफेसर पंकज मिश्रा , डॉ नजमा परवीन , डॉ मृदुला जायसवाल , शैलेन्द्र शुक्ला , युवा परिषद की चेयरपर्सन जीनत रहमान , विवेक मिश्रा , अजीत सिंह टीका , द्वारिका प्रसाद खरवार आदि मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय संघचालक सूर्य प्रकाश टोंक ने कहा कि माता जानकी का प्रभाव भारत के प्रत्येक नारी पर है, जो माता जानकी को अपना आदर्श मानती है उनका परिवार बेहतर चल रहा है । आज परिवारों के टूटने का कारण घर में माता जानकी का संस्कार न होना है। अब हमें मिलकर जानकी संस्कार के इतिहास को जन जन तक पहुंचाना है।
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नई दिल्ली से आए प्रसिद्ध गऊ कथा वाचक मो फ़ैज़ खान ने कहा कि भारत की संस्कृति को महान बनाने में नारियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। प्रेम देने में माता जानकी का कोई उदाहरण नहीं है। तीनो माताओं के प्रति उनका वही आदर और प्रेम था जो अपनी माँ के प्रति था। हिमाचल प्रदेश के कुलू मनाली से आए श्रीमहंत राम मोहन दास रामायणी महाराज ने कहा कि माता जानकी के इतिहास ने नारी की प्रकृति को सम्मान प्रदान किया है। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राम पंथ के पंथाचार्य डॉ राजीव ने कहा कि आज समूचे देश में जो परिवार बचा है वह माता जानकी की वजह से ही बचा है।
इसलिए दुनियाँ के इतिहास से अलग मातृ शक्ति को भारत में सम्मान दिया गया है। महाकुंभ के दौरान मातु जानकी कथा के छठें दिन बलकदेवाचार्य महाराज ने माता जानकी के शक्ति का वर्णन किया।इस अवसर पर बड़कू हनुमान जी के पीठाधीश्वर प्रभु रामदास , आभा उपाध्याय , डॉ कवीन्द्र नारायण अफरोज पांडेय , संदीप मिश्र , डॉ अर्चना भारतवंशी , प्रोफेसर पंकज मिश्रा , डॉ नजमा परवीन , डॉ मृदुला जायसवाल , शैलेन्द्र शुक्ला , युवा परिषद की चेयरपर्सन जीनत रहमान , विवेक मिश्रा , अजीत सिंह टीका , द्वारिका प्रसाद खरवार आदि मौजूद रहे।