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Jaunpur News: मेडिकल कॉलेज को मिलेगी एमआरआई मशीन, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
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मेडिकल कॉलेज जौनपुर। स्रोत-संवाद
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जौनपुर। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, सिद्दीकपुर (मेडिकल कॉलेज) में जल्द ही एमआरआई जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। शासन ने मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन लगाने की स्वीकृति दे दी है। अगले दो से तीन माह में मशीन मिलने की संभावना है, जबकि सितंबर तक इसके स्थापित होकर अक्तूबर से मरीजों के लिए सेवा शुरू होने की उम्मीद है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एमआरआई मशीन की स्थापना के लिए पहले ही शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन की ओर से एमआरआई सूट तैयार कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि इसके लिए सीटी स्कैन केंद्र के समीप स्थान चिह्नित कर लिया गया है। जल्द ही विशेषज्ञ टीम प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करेगी। मशीन मिलने के बाद स्थापना की प्रक्रिया पूरी कर सेवा शुरू कर दी जाएगी।
जिले में सरकारी स्तर पर एमआरआई की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी जांच केंद्रों या दूसरे जनपदों का रुख करना पड़ता है। गंभीर और आंतरिक बीमारियों की जांच के लिए चिकित्सक अक्सर एमआरआई कराने की सलाह देते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा नहीं होने से मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
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वर्तमान में निजी जांच केंद्रों पर एमआरआई कराने के लिए मरीजों को पांच से छह हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, जिन सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है, वहां मशीनों की कमी, खराबी या तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन शुरू होने के बाद मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेंगे तथा निजी केंद्रों पर उनकी निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
मशीन लगने से फायदे
मुफ्त या बेहद किफायती जांच: सरकारी दर पर जांच होने से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को आर्थिक बोझ से बड़ी राहत मिलेगी।
समय की बचत: रिपोर्ट जल्द मिलने से मरीजों का इलाज समय पर शुरू हो सकेगा।
निजी सेंटरों पर निर्भरता खत्म: जौनपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
एमआरआई सूट के निर्माण और तकनीकी बारीकियों के निरीक्षण के लिए जल्द ही एक विशेषज्ञ टीम आ रही है। शासन से मशीन प्राप्त होते ही इसे युद्धस्तर पर स्थापित कर चालू कर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय मरीजों को जल्द से जल्द इस आधुनिक सुविधा का लाभ मिल सके।- डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य, उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एमआरआई मशीन की स्थापना के लिए पहले ही शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन की ओर से एमआरआई सूट तैयार कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरबी कमल ने बताया कि इसके लिए सीटी स्कैन केंद्र के समीप स्थान चिह्नित कर लिया गया है। जल्द ही विशेषज्ञ टीम प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करेगी। मशीन मिलने के बाद स्थापना की प्रक्रिया पूरी कर सेवा शुरू कर दी जाएगी।
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जिले में सरकारी स्तर पर एमआरआई की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी जांच केंद्रों या दूसरे जनपदों का रुख करना पड़ता है। गंभीर और आंतरिक बीमारियों की जांच के लिए चिकित्सक अक्सर एमआरआई कराने की सलाह देते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा नहीं होने से मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
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वर्तमान में निजी जांच केंद्रों पर एमआरआई कराने के लिए मरीजों को पांच से छह हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, जिन सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है, वहां मशीनों की कमी, खराबी या तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन शुरू होने के बाद मरीजों का समय और पैसा दोनों बचेंगे तथा निजी केंद्रों पर उनकी निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
मशीन लगने से फायदे
मुफ्त या बेहद किफायती जांच: सरकारी दर पर जांच होने से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को आर्थिक बोझ से बड़ी राहत मिलेगी।
समय की बचत: रिपोर्ट जल्द मिलने से मरीजों का इलाज समय पर शुरू हो सकेगा।
निजी सेंटरों पर निर्भरता खत्म: जौनपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
एमआरआई सूट के निर्माण और तकनीकी बारीकियों के निरीक्षण के लिए जल्द ही एक विशेषज्ञ टीम आ रही है। शासन से मशीन प्राप्त होते ही इसे युद्धस्तर पर स्थापित कर चालू कर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय मरीजों को जल्द से जल्द इस आधुनिक सुविधा का लाभ मिल सके।- डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य, उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय