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Jaunpur News: सवा तीन लाख की आबादी पर सिर्फ 150 डस्टबिन, रोजाना सौ टन निकलता है कूड़ा
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फैजबाग में सड़क पर पड़ा कूड़ा। संवाद
- फोटो : Archive
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जौनपुर। जनपद में संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के 18 दिन बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं नजर आ रहा है। ग्रामीण इलाकों को तो छोड़िए शहर के 39 वार्ड को ही देख सकते हैं। यहां सफाई व्यवस्था के लिए 500 से अधिक कर्मचारी हैं।
इसके बाद भी 30 से अधिक स्थानों पर कूड़ा पूरे दिन सड़क पर पड़ा रहता है। यहां सवा तीन लाख की आबादी पर सिर्फ 150 डस्टबिन है जबकि रोजाना सौ टन कूड़ा निकलता है। नगर पालिका का दावा है कि पांच हजार लोगों से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन होता है। इसके लिए 24 गाड़ियों लगाई गई हैं। दो गाड़ियां हॉस्पिटलों से निकलने वाले कचरों को उठाने के लिए लगाई गईं हैं।
शहर से कूड़ा उठाने के लिए छोटा-बड़ा मिलाकर कुल 180 संसाधन हैं। इनमें तीन लोडर तीन जेसीबी, दो छोटा लोडर, 15 ट्रैक्टर, 20 मैजिक प्रमुख रूप से शामिल हैं। करीब 150 डस्टबिन हैं। शहर से निकलने वाले कूड़ों को कुल्हनामऊ ले जाया जाता है, जहां एक बार गाड़ी जाने पर दो घंटे से अधिक का समय लगता है।
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हालांकि जिम्मेदारों का दावा है कि कूड़ा उठान का काम भोर में चार बजे से दोपहर दो बजे तक होता है। लेकिन इसके बाद भी दिन भर कूड़ा सड़कों पर पड़ा रहता है। बारिश में समस्या बढ़ जाती है। दुर्गंध से उस राह से गुजरना मुश्किल होता है। जलभराव और गंदगी के कारण एडीज मच्छर के अटैक का खतरा मड़राने लगा है।
एक जुलाई से चल रहा अभियान: एक जुलाई से 31 जुलाई तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। 12 विभागों के संयुक्त सहयोग से संचारी रोगों के रोकथाम को लेकर यह अभियान चलाया जा रहा है। जागरूकता के साथ ही दिखावे की साफ-सफाई भी हो रही है, लेकिन धरातल पर काम नहीं होने से ही बीमारियों पर रोक नहीं लग पाती है। यही कारण है कि हर साल डेंगू, मलेरिया के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। गंदगी से बढ़ रही समस्या: जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने बताया कि गंदगी के चलते एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी डेंगू है। शुरुआत में मामूली बुखार, तेज सिरदर्द और जोड़ों में असहनीय दर्द के साथ शुरू हो सकता है लेकिन गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
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इसके बाद भी 30 से अधिक स्थानों पर कूड़ा पूरे दिन सड़क पर पड़ा रहता है। यहां सवा तीन लाख की आबादी पर सिर्फ 150 डस्टबिन है जबकि रोजाना सौ टन कूड़ा निकलता है। नगर पालिका का दावा है कि पांच हजार लोगों से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन होता है। इसके लिए 24 गाड़ियों लगाई गई हैं। दो गाड़ियां हॉस्पिटलों से निकलने वाले कचरों को उठाने के लिए लगाई गईं हैं।
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शहर से कूड़ा उठाने के लिए छोटा-बड़ा मिलाकर कुल 180 संसाधन हैं। इनमें तीन लोडर तीन जेसीबी, दो छोटा लोडर, 15 ट्रैक्टर, 20 मैजिक प्रमुख रूप से शामिल हैं। करीब 150 डस्टबिन हैं। शहर से निकलने वाले कूड़ों को कुल्हनामऊ ले जाया जाता है, जहां एक बार गाड़ी जाने पर दो घंटे से अधिक का समय लगता है।
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हालांकि जिम्मेदारों का दावा है कि कूड़ा उठान का काम भोर में चार बजे से दोपहर दो बजे तक होता है। लेकिन इसके बाद भी दिन भर कूड़ा सड़कों पर पड़ा रहता है। बारिश में समस्या बढ़ जाती है। दुर्गंध से उस राह से गुजरना मुश्किल होता है। जलभराव और गंदगी के कारण एडीज मच्छर के अटैक का खतरा मड़राने लगा है।
एक जुलाई से चल रहा अभियान: एक जुलाई से 31 जुलाई तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। 12 विभागों के संयुक्त सहयोग से संचारी रोगों के रोकथाम को लेकर यह अभियान चलाया जा रहा है। जागरूकता के साथ ही दिखावे की साफ-सफाई भी हो रही है, लेकिन धरातल पर काम नहीं होने से ही बीमारियों पर रोक नहीं लग पाती है। यही कारण है कि हर साल डेंगू, मलेरिया के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। गंदगी से बढ़ रही समस्या: जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने बताया कि गंदगी के चलते एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी डेंगू है। शुरुआत में मामूली बुखार, तेज सिरदर्द और जोड़ों में असहनीय दर्द के साथ शुरू हो सकता है लेकिन गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

फैजबाग में सड़क पर पड़ा कूड़ा। संवाद- फोटो : Archive